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Mathura News: मथुरा के विधायकों ने लड़ा सांसद का चुनाव, नहीं चढ़ पाए संसद की दहलीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Apr 2024 12:55 AM IST
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Mathura MLAs contested MP elections, could not cross the threshold of Parliament
मथुरा। मथुरा लोकसभा सीट का ऐसा भी इतिहास रहा है कि यहां से कोई भी विधायक संसद की दहलीज नहीं चढ़ पाया है। कई दिग्गज विधायक इसके लिए प्रयास कर चुके हैं, लेकिन संसदीय चुनाव में जीत का सेहरा उनके सिर नहीं बंध पाया।
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कांग्रेस के दिग्गज नेता और मंत्री रह चुके आचार्य लक्ष्मी रमण के बेटे यामिनी रमण आचार्य बताते हैं कि मांट क्षेत्र से श्याम सुन्दर शर्मा आठ बार विधायक रह चुके हैं। मांट विधान सभा क्षेत्र से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में ताल ठोकी, लेकिन जयंत चौधरी के सामने असफलता हाथ लगी थी। वर्तमान में छाता विधायक एवं कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण वर्ष 1991, 1996 और 2004 के लोकसभा चुनाव में खड़े हुए मगर, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान विधायक पूरन प्रकाश ने 1998 का लोकसभा चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें भाजपा के तेजवीर सिंह के सामने हार का सामना करना पड़ा। चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी गोकुल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहीं। गायत्री देवी ने वर्ष 1984 का लोकसभा चुनाव लोकदल के टिकट पर लड़ा था, लेकिन कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी प्रकार आचार्य लक्ष्मी रमण, जो मांट क्षेत्र से चार बार विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे, ने वर्ष 1980 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस की टिकट पर लड़ा था। इस चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार चौधरी दिगंबर सिंह जीत गए थे। छाता विधान सभा क्षेत्र से विधायक रहे रामहेत सिंह ने वर्ष 1977 का चुनाव कांग्रेस की टिकट पर लड़ा था। आपातकाल के ठीक बाद हुए इस चुनाव में उन्हें जनता पार्टी के उम्मीदवार मनीराम बागड़ी के सामने हार का सामना करना पड़ा था।
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प्रत्याशियों को भारी न पड़ जाए राजनीतिक दलों में गुटबाजी
मथुरा। लोकसभा चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, पार्टी के पदाधिकारियों के बीच गुटबाजी ही सामने आने लगी है। कमल वाली पार्टी में तो इस समय दो धड़े हो गए हैं। वहीं, पंजे वाली पार्टी में भी प्रत्याशी को लेकर उधेड़बुन चल रही है। हाथी वाली पार्टी में प्रत्याशी बदले जाने के बाद सब कुछ ठीक नहीं है। कुछ पदाधिकारी पुराने प्रत्याशी को ही चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं। वहीं, कुछ नए के साथ हैं। इधर, साइकिल वाली पार्टी के पदाधिकारी बेशक पंजे के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। मगर, चुनाव में सक्रियता नहीं दिख रही है। कमल वाली पार्टी के साथ गठबंधन में आई हैंडपंप वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का भी यही हाल है।
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