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मथुरा: कन्हैया की लीला भूमि में बंगाली परिवारों का अपना हुआ घर
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मथुरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जनपद में 35377 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना में प्रवासी बंगाली परिवारों के आवास भी तैयार कराए गए हैं। इसमें प्रत्येक मकान के दरवाजे पर शिलापट्ट लगाया जा रहा है, जिस पर योजना का नाम, पात्र का नाम और आधार नंबर है। साथ ही ज्यादातर ने मकान के बाहर राधा, कृष्ण, मोर, बांसुरी के चित्र भी बनवाए जा रहे हैं।
परियोजना अधिकारी डूडा रमेश कुमार कौशिक के अनुसार जनपद में कुल 35377 आवास स्वीकृत हैं। 2022 तक इस योजना के तहत पात्रता की जरूरी शर्तें पूरी करने वाले सभी पात्र लोगों को पक्के आवास योजना का लाभ दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। नगर पंचायत राधाकुंड में डूडा विभाग द्वारा विशेष प्रयास करते हुए बंगाली परिवारों को आवास तैयार कराए गए हैं।
इससे लाभार्थी महिला काजल दासी के चेहरे पर अब मुस्कान है। अपने आशियाने की चिंता से बेफिक्र यह महिला मूलत: बंगाल की हैं। वह दो दशक पहले कोलकाता के गौरांग इलाके से ब्रज में कृष्ण भक्ति के लिए आई थीं। ब्रज के कस्बा राधाकुंड आने के बाद उसे दर-दर भटकना पड़ा। लंबे समय तक परिक्रमा मार्ग में खुले में रहती थी। अब ये महिला जहां रहती है, वहां की तस्वीर और अपनी तकदीर एक साथ बदल चुकी है। काजल दासी एवं उनका परिवार तुलसी की लकड़ी से कंठी माला बनाकर आजीविका चलाती है।
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परियोजना अधिकारी डूडा रमेश कुमार कौशिक के अनुसार जनपद में कुल 35377 आवास स्वीकृत हैं। 2022 तक इस योजना के तहत पात्रता की जरूरी शर्तें पूरी करने वाले सभी पात्र लोगों को पक्के आवास योजना का लाभ दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। नगर पंचायत राधाकुंड में डूडा विभाग द्वारा विशेष प्रयास करते हुए बंगाली परिवारों को आवास तैयार कराए गए हैं।
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इससे लाभार्थी महिला काजल दासी के चेहरे पर अब मुस्कान है। अपने आशियाने की चिंता से बेफिक्र यह महिला मूलत: बंगाल की हैं। वह दो दशक पहले कोलकाता के गौरांग इलाके से ब्रज में कृष्ण भक्ति के लिए आई थीं। ब्रज के कस्बा राधाकुंड आने के बाद उसे दर-दर भटकना पड़ा। लंबे समय तक परिक्रमा मार्ग में खुले में रहती थी। अब ये महिला जहां रहती है, वहां की तस्वीर और अपनी तकदीर एक साथ बदल चुकी है। काजल दासी एवं उनका परिवार तुलसी की लकड़ी से कंठी माला बनाकर आजीविका चलाती है।
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