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महाकुंभ : डुबकी लगाकर कोसीकलां वासी गदगद
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कोसीकलां। हर सड़क भक्ति और आध्यात्म की वाहक है। कदम-कदम पर पुण्य संग पर्यटन भी हैं। नागा और अघोरी बाबाओं को लोग कौतूहल भरी निगाहों से देख रहे हैं। कह सकते हैं कि इस वक्त प्रयागराज आश्चर्य से भरा अलग ही संसार है। महाकुंभ से लौटे श्रद्धालुओं ने कुछ इस तरह के अनुभव बयां किए।
महाकुंभ के लिए नगरवासियों में उत्साह है। श्रद्धालु संस्थाओं के साथ सामूहिक तौर पर और अकेले स्नान करने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पूरी तरह से भक्तिभाव में रमे हुए हैं। खरौट गेट निवासी अवधेश गुप्ता पंजाबी काॅलोनी निवासी भगवत स्वर्णकार, मुकेश अग्रवाल ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ महाकुंभ गए थे।
सुभाष चंद शर्मा, किशन गोपाल, हितहरी शास्त्री ने बताया कि वह 25 सदस्यों के साथ प्रयागराज में रुके हुए हैं। 30 जनवरी को वापस आएंगे। महाकुंभ में भक्ति, अध्यात्म की छंटा इतनी रोमांचकारी थी कि पता ही नहीं चला कि कब इतनी दूरी पैदल चल लिए। माधवदास मोनी बाबा के आश्रम में रोजाना भंडरा चल रहा है। सैकड़ों लोग रूककर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
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कामर स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत बलराम दास महाराज के मार्गदर्शन में इस नगर की व्यवस्था मंदिर के साधु-संतों के अलावा युवा देखते हैं। गणेश नगर में कोसीकलां ही नहीं देशभर से साधु-संत आकर ठहर रहे हैं। संवाद
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महाकुंभ के लिए नगरवासियों में उत्साह है। श्रद्धालु संस्थाओं के साथ सामूहिक तौर पर और अकेले स्नान करने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पूरी तरह से भक्तिभाव में रमे हुए हैं। खरौट गेट निवासी अवधेश गुप्ता पंजाबी काॅलोनी निवासी भगवत स्वर्णकार, मुकेश अग्रवाल ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ महाकुंभ गए थे।
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सुभाष चंद शर्मा, किशन गोपाल, हितहरी शास्त्री ने बताया कि वह 25 सदस्यों के साथ प्रयागराज में रुके हुए हैं। 30 जनवरी को वापस आएंगे। महाकुंभ में भक्ति, अध्यात्म की छंटा इतनी रोमांचकारी थी कि पता ही नहीं चला कि कब इतनी दूरी पैदल चल लिए। माधवदास मोनी बाबा के आश्रम में रोजाना भंडरा चल रहा है। सैकड़ों लोग रूककर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
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कामर स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत बलराम दास महाराज के मार्गदर्शन में इस नगर की व्यवस्था मंदिर के साधु-संतों के अलावा युवा देखते हैं। गणेश नगर में कोसीकलां ही नहीं देशभर से साधु-संत आकर ठहर रहे हैं। संवाद