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आधे से भी कम बिके चाइनीज उत्पाद
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:09 PM IST
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‘स्वदेशी अपनाओ, चाइनीज भगाओ’
- फोटो : अमर उजाला
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‘स्वदेशी अपनाओ, चाइनीज भगाओ’ के संदेश ने लोगों को अपनी जमीन से जोड़ते हुए चाइनीज उत्पादों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके चलते गत वर्ष की अपेक्षा आधे से भी कम कीमत का ही माल बाजार में बिक सका। स्कूली बच्चों द्वारा चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार करने के लिए चलाए जागरूकता कार्यक्रमों का भी खरीदारी पर असर दिखा।
चीन द्वारा पाकिस्तान को सपोर्ट किए जाने से भारतीयों में चीन के प्रति गुस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा है। करीब एक माह से जिले में स्कूल स्तर पर भी विद्यार्थियों द्वारा चीनी उत्पादों के प्रयोग का बहिष्कार किया जा रहा था। लोगों को जागरूक करने के लिए बच्चों ने पैदल यात्रा निकाली। पैंफलेट बांटे। नुक्कड़ नाटक किए। ग्रामीणों को घर-घर जाकर इसके लिए मनाया। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया। इसका असर दीपावली की खरीदारी पर दिखा। स्वदेशी अपनाओ के संदेश ने लोगों को मिट्टी के दीपक, खिलौने, मिट्टी के लक्ष्मी गणेश, बल्बों की झालर, मोमबत्ती खरीदने के लिए प्रेरित किया।
शहर में चाइनीज आइटमों के छह बडे़ थोक व्यापारी हैं। इनके जरिए जिले की इलेक्ट्रोनिक्स दुकान पर छोटा-बड़ा माल पहुुंचाया जाता है। व्यापारियों के अनुसार, इनके पास बीते साल का करीब 125 लाख रुपये का माल बचा था। नए ऑर्डर भी थे। चीन के उत्पादों का बहिष्कार देखते हुए नए ऑर्डर का पूरा माल नहीं उठाया गया। इस साल आधे से भी काफी कम माल ही निकला है। इसमें नुकसान की संभावना फुटकर विक्रेताओं को है।
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चीन द्वारा पाकिस्तान को सपोर्ट किए जाने से भारतीयों में चीन के प्रति गुस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा है। करीब एक माह से जिले में स्कूल स्तर पर भी विद्यार्थियों द्वारा चीनी उत्पादों के प्रयोग का बहिष्कार किया जा रहा था। लोगों को जागरूक करने के लिए बच्चों ने पैदल यात्रा निकाली। पैंफलेट बांटे। नुक्कड़ नाटक किए। ग्रामीणों को घर-घर जाकर इसके लिए मनाया। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया। इसका असर दीपावली की खरीदारी पर दिखा। स्वदेशी अपनाओ के संदेश ने लोगों को मिट्टी के दीपक, खिलौने, मिट्टी के लक्ष्मी गणेश, बल्बों की झालर, मोमबत्ती खरीदने के लिए प्रेरित किया।
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शहर में चाइनीज आइटमों के छह बडे़ थोक व्यापारी हैं। इनके जरिए जिले की इलेक्ट्रोनिक्स दुकान पर छोटा-बड़ा माल पहुुंचाया जाता है। व्यापारियों के अनुसार, इनके पास बीते साल का करीब 125 लाख रुपये का माल बचा था। नए ऑर्डर भी थे। चीन के उत्पादों का बहिष्कार देखते हुए नए ऑर्डर का पूरा माल नहीं उठाया गया। इस साल आधे से भी काफी कम माल ही निकला है। इसमें नुकसान की संभावना फुटकर विक्रेताओं को है।
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