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लॉकडाउन के 40 दिन : कोई ससुराल में फंसा तो कोई ननिहाल में
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मुकुंद प्रिया गार्डन में रह रहे उड़ीसा के दंपती।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। कोई ससुराल आया था तो कोई कन्हैया के दर्शन के लिए यहां पहुंचा था, लेकिन लॉकडाउन में यहीं फंस कर रह गया। अब तो यहां ठहरे हुए लंबा वक्त हो चला है, लेकिन घर निकलने की कोई जुगत अभी भी नजर नहीं आ रही है। इसमें अनेक लोग तो ऐसे हैं जिनके पास पैसे भी बहुत दिन पहले ही खत्म हो चुके हैं।
स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद पर वे जिंदा हैं। सोमवार से एक बार फिर लॉकडाउन का तीसरा दौर शुरू हो रहा है। यह 17 मई तक चलेगा। लॉकडाउन शुरू होने से पहले यहां दर्शन या फिर रिश्तेदारी में आए बहुत सारे लोग अब घर जाने के लिए तड़प रहे हैं। अनेक लोगों की हालत तो बहुत खराब है। उनके पास खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं है। रिश्तेदारियों में फंसे लोग भी बिचलित हैं।
धौलीप्याऊ हिम्मतपुरा स्थित गुजराती धर्मशाला में 25 मार्च से ही उड़ीसा का परिवार फंसा हुआ है। पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे परमानंद का लॉकडाउन का अनुभव बहुत कष्टदायक है। खाने पीने के इंतजाम में उनकी पत्नी प्रमोविन की आंखों में आंसू छलक उठते हैं।
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उड़ीसा के जिला जाजपुर के रहने वाली दंपती 20 मार्च से मथुरा में है। प्रिया गार्डन में रह रहे दंपती के पास पैसे खत्म हो चुके हैं। अग्रवाल धर्मशाला होलीगेट पर उड़ीसा का ही चार लोगों का परिवार फंसा हुआ है। ये परिवार सामाजिक संस्थाओं के भरोसे अपना पेट भर पा रहे हैं। घर लौटने के लिए उक्त लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है। स्थानीय पुलिस को भी जानकारी दे दी है।
दिल्ली से अपनी ससुराल अशोक विहार कॉलोनी आए अभिषेक शर्मा भी अचानक लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद मथुरा में ही फंसे हैं। वे काफी समय से घर लौटने की कोशिश में जुटे हैं। 20 मार्च से जयपुर के रहने वाला चार सदस्यीय परिवार डेंपियर नगर स्थित ममेरे भाई के यहां घूमने आए थे, लेकिन लॉकडाउन में फंस गए हैं।
प्रयागराज से आए मथुरा दर्शन को आया परिवार गोविंदनगर 49-सी में रुका हुआ है। कोची में नौ सेना मेें तैनात लेफ्टीनेंट कमांडर अजीत सिंह सोगरवाल की पत्नी संगीता सिंह एक वर्षीय बेटी अनिका के साथ रिश्तेदारी में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मथुरा आई थी। लॉकडाउन के चलते वह मथुरा मेें ही फंस गईं। इनके अलावा बड़ी संख्या में मजदूर भी यहां फंसे हुए हैं। लॉकडाउन के बढ़ते दौर से विचलित ये लोग अब किसी भी तरह से घर जाना चाहते हैं, लेकिन अब तक उन्हें किसी भी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
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स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद पर वे जिंदा हैं। सोमवार से एक बार फिर लॉकडाउन का तीसरा दौर शुरू हो रहा है। यह 17 मई तक चलेगा। लॉकडाउन शुरू होने से पहले यहां दर्शन या फिर रिश्तेदारी में आए बहुत सारे लोग अब घर जाने के लिए तड़प रहे हैं। अनेक लोगों की हालत तो बहुत खराब है। उनके पास खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं है। रिश्तेदारियों में फंसे लोग भी बिचलित हैं।
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धौलीप्याऊ हिम्मतपुरा स्थित गुजराती धर्मशाला में 25 मार्च से ही उड़ीसा का परिवार फंसा हुआ है। पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे परमानंद का लॉकडाउन का अनुभव बहुत कष्टदायक है। खाने पीने के इंतजाम में उनकी पत्नी प्रमोविन की आंखों में आंसू छलक उठते हैं।
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उड़ीसा के जिला जाजपुर के रहने वाली दंपती 20 मार्च से मथुरा में है। प्रिया गार्डन में रह रहे दंपती के पास पैसे खत्म हो चुके हैं। अग्रवाल धर्मशाला होलीगेट पर उड़ीसा का ही चार लोगों का परिवार फंसा हुआ है। ये परिवार सामाजिक संस्थाओं के भरोसे अपना पेट भर पा रहे हैं। घर लौटने के लिए उक्त लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है। स्थानीय पुलिस को भी जानकारी दे दी है।
दिल्ली से अपनी ससुराल अशोक विहार कॉलोनी आए अभिषेक शर्मा भी अचानक लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद मथुरा में ही फंसे हैं। वे काफी समय से घर लौटने की कोशिश में जुटे हैं। 20 मार्च से जयपुर के रहने वाला चार सदस्यीय परिवार डेंपियर नगर स्थित ममेरे भाई के यहां घूमने आए थे, लेकिन लॉकडाउन में फंस गए हैं।
प्रयागराज से आए मथुरा दर्शन को आया परिवार गोविंदनगर 49-सी में रुका हुआ है। कोची में नौ सेना मेें तैनात लेफ्टीनेंट कमांडर अजीत सिंह सोगरवाल की पत्नी संगीता सिंह एक वर्षीय बेटी अनिका के साथ रिश्तेदारी में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मथुरा आई थी। लॉकडाउन के चलते वह मथुरा मेें ही फंस गईं। इनके अलावा बड़ी संख्या में मजदूर भी यहां फंसे हुए हैं। लॉकडाउन के बढ़ते दौर से विचलित ये लोग अब किसी भी तरह से घर जाना चाहते हैं, लेकिन अब तक उन्हें किसी भी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।