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Mathura News: चंद्रपाल हत्याकांड में हिस्ट्रीशीटर मनोहरी व उसके भतीजे को उम्रकैद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Feb 2024 02:10 AM IST
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Life imprisonment to history-sheeter Manohari and his nephew in Chandrapal murder case
मथुरा। वृंदावन में 22 साल पहले हुए चंद्रपाल हत्याकांड में कुख्यात अपराधी एवं हिस्ट्रीशीटर मनोहरी व उसके भतीजे विष्णु को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। एडीजे-10 श्वेता वर्मा की अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इधर, मनोहरी के भाई एवं मुकदमे में आरोपी दीवान सिंह की दौरान-ए-विवेचना मौत हो गई थी। एक अन्य आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट से बरी किया गया है। यह हत्या मौरा गांव की प्रधानी पद की रंजिश में हुई थी।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी मुकेश गोस्वामी ने बताया कि वादी मुकदमा अमर सिंह पुत्र मनोहर निवासी मौरा, वृंदावन ने मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था कि 10 सितंबर 2002 को वे भाई चंद्रपाल और देवीराम पुत्र बाबू सिंह के साथ कोर्ट से तारीख कर लौट रहे थे। भाई चंद्रपाल वृंदावन में एक दुकान पर सब्जी लेने उतर गया। वह स्वयं और देवीराम पास ही खड़े रहे। इसी दौरान गांव के दीवान पुत्र रामस्वरूप उसके भाई मनोहरी, साथी कोमल पुत्र अंतराम, विष्णु पुत्र हरवान असलहा लेकर आए। आते ही भाई चंद्रपाल में गोलियां मारकर हत्या कर दी।
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मामले में थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। विवेचना के दौरान दीवान की बीमारी से मौत हो गई थी। मनोहरी, उसके भतीजे विष्णु और साथी कोमल के खिलाफ अदालत में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। दौरान-ए-ट्रायल अभियोजन पक्ष की ओर से पेश सबूत, गवाहों के आधार पर अदालत ने हिस्ट्रीशीटर मनोहरी व उसके भतीजे विष्णु को चंद्रपाल की हत्या का दोषी पाया। वहीं, कोमल को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
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गांव की टशनबाजी से बने जरायम पेशेवर
हरवान, मनोहरी, कुंजी, दीवान पुत्रगण रामस्वरूप निवासीगण मौरा, वृंदावन ने 90 के दशक में जिले की पुलिस के लिए सिरदर्द बन गए थे। इन चारों भाइयों ने कई अपराधों को अंजाम दिया। गांव की टशन बाजी से पनपने के बाद इन्होंने जरायम को ही अपना पेशा बना लिया। इनके पिता रामस्वरूप गांव के प्रधान थे। दबदबा इस कदर था कि रामस्वरूप का प्रधानी पद पर एकछत्र राज रहा। चंद्रपाल के पिता मनोहर ने प्रधानी जीत ली। इसी बात की रंजिश चंद्रपाल पक्ष से हो गई। इसके बाद चंद्रपाल का मर्डर किया गया। हिस्ट्रीशीटर मनोहरी के भाई हरवान और कुंजी की हत्या हुई थी। दीवान सिंह की बीमारी से मौत हुई थी।
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