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करियर, कारोबार सब ठाकुरजी के हवाले
पुनीत शर्मा
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:44 PM IST
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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आराध्य और आराधक के बीच प्रेम का अनन्य उदाहरण ठाकुर बांकेबिहारी और उनके भक्त हैं। यह बात भक्तों के ठाकुरजी के नाम भेजे गए पत्रों को देखकर साबित हो जाती है। इन पत्रों में किया गया अनुरोध भक्तों का अपने बांकेबिहारी पर अटूट विश्वास भी दर्शाता है। तभी तो कोई कारोबार में घाटे से उबारने की बात लिखता है तो कोई मनचाहा वर पाने की। जिन्होंने ठाकुरजी को ही स्वामी मान लिया है उनके पत्रों में दिल की बात खुलकर कही गई है। कुछ ने करियर के निर्णय तक ठाकुरजी के ऊपर ही छोड़ दिए हैं।
यूं तो जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी को उनके भक्त काफी समय से पत्र लिख रहे हैं। हर साल देश-विदेश से लगभग 50000 चिट्ठियां ठाकुरजी के नाम आती हैं। रक्षाबंधन पर राखियों से भरे पत्र और जन्माष्टमी पर जन्मदिवस की बधाई वाले पत्र प्रबंध कमेटी को ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के नाम से प्राप्त होते हैं। पत्र पढ़कर ये साबित हो जाता है कि भक्तों को पूरा विश्वास है कि ठाकुरजी उनकी समस्याओं का समाधान जरूर करेंगे। उदाहरण भी देखिए।
दिल्ली के एक कारोबारी ने बांकेबिहारी को पत्र भेजकर अपने कारोबार की बात की है। उन्होंने लिखा है कि बीते एक साल से कारोबार में घाटा हो रहा है और वे बहुत परेशान हैं। कोई ऐसा रास्ता दिखाइए जिससे कारोबार की गाड़ी पटरी पर आ जाए। नुकसान के कारण वे बीमार भी रहने लगे हैं।
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मुंबई से आए पत्र में एक महिला ने अपनी बेटी की शादी को लेकर परेशानी बताई। चिट्ठी में उन शहरों के नाम भी लिखे जहां से बेटी की शादी की बात चल रही थी।
लखनऊ से भी एक पत्र ठाकुरजी के पास पहुंचा। इसे पढ़कर लग गया कि बांकेबिहारी के भक्त कोई राजनेता हैं। उन्होंने अपनी सियासी टेंशन को ठाकुरजी के सामने रखा। पत्र में लिखा है कि वह बीते कई साल से मेहनत कर रहे हैं लेकिन इलेक्शन में नंबर नहीं लग रहा है। आगे सियासत में किस्मत आजमाई जाए या नहीं, इसका उत्तर वे बांकेबिहारी से मांग रहे हैं।
चिट्ठियाें के बारे में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु कहते हैं कि ये भक्तों का भाव है। लोग अपनी समस्याएं और त्योहार पर बधाई भी भेजते हैं। प्रदेश के लगभग सभी शहरों, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, झारखंड, मुंबई, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर समेत सभी प्रांतों से पत्र आ रहे हैं। यहां तक कि विदेशों में बैठे भक्त भी अपनी आस्था पत्रों के माध्यम से व्यक्त करते हैं।
जन्माष्टमी से 20 दिन पहले हो जाती है शुरूआत
मथुरा (ब्यूरो)। मंदिर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी बताते हैं कि जन्माष्टमी पर बधाई पत्र आने का सिलसिला बीस दिन पहले शुरू हो जाता है। कुछ पत्र डाक से पहुंचते हैं जबकि बांकेबिहारी के कुछ भक्त सीधे मंदिर पर पहुंचकर पत्र और बधाई के कार्ड भेंट कर देते हैं।
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यूं तो जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी को उनके भक्त काफी समय से पत्र लिख रहे हैं। हर साल देश-विदेश से लगभग 50000 चिट्ठियां ठाकुरजी के नाम आती हैं। रक्षाबंधन पर राखियों से भरे पत्र और जन्माष्टमी पर जन्मदिवस की बधाई वाले पत्र प्रबंध कमेटी को ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के नाम से प्राप्त होते हैं। पत्र पढ़कर ये साबित हो जाता है कि भक्तों को पूरा विश्वास है कि ठाकुरजी उनकी समस्याओं का समाधान जरूर करेंगे। उदाहरण भी देखिए।
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दिल्ली के एक कारोबारी ने बांकेबिहारी को पत्र भेजकर अपने कारोबार की बात की है। उन्होंने लिखा है कि बीते एक साल से कारोबार में घाटा हो रहा है और वे बहुत परेशान हैं। कोई ऐसा रास्ता दिखाइए जिससे कारोबार की गाड़ी पटरी पर आ जाए। नुकसान के कारण वे बीमार भी रहने लगे हैं।
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मुंबई से आए पत्र में एक महिला ने अपनी बेटी की शादी को लेकर परेशानी बताई। चिट्ठी में उन शहरों के नाम भी लिखे जहां से बेटी की शादी की बात चल रही थी।
लखनऊ से भी एक पत्र ठाकुरजी के पास पहुंचा। इसे पढ़कर लग गया कि बांकेबिहारी के भक्त कोई राजनेता हैं। उन्होंने अपनी सियासी टेंशन को ठाकुरजी के सामने रखा। पत्र में लिखा है कि वह बीते कई साल से मेहनत कर रहे हैं लेकिन इलेक्शन में नंबर नहीं लग रहा है। आगे सियासत में किस्मत आजमाई जाए या नहीं, इसका उत्तर वे बांकेबिहारी से मांग रहे हैं।
चिट्ठियाें के बारे में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु कहते हैं कि ये भक्तों का भाव है। लोग अपनी समस्याएं और त्योहार पर बधाई भी भेजते हैं। प्रदेश के लगभग सभी शहरों, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, झारखंड, मुंबई, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर समेत सभी प्रांतों से पत्र आ रहे हैं। यहां तक कि विदेशों में बैठे भक्त भी अपनी आस्था पत्रों के माध्यम से व्यक्त करते हैं।
जन्माष्टमी से 20 दिन पहले हो जाती है शुरूआत
मथुरा (ब्यूरो)। मंदिर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी बताते हैं कि जन्माष्टमी पर बधाई पत्र आने का सिलसिला बीस दिन पहले शुरू हो जाता है। कुछ पत्र डाक से पहुंचते हैं जबकि बांकेबिहारी के कुछ भक्त सीधे मंदिर पर पहुंचकर पत्र और बधाई के कार्ड भेंट कर देते हैं।