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उधार की लकड़ी से हो रहे अंतिम संस्कार
अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 14 Nov 2016 11:03 PM IST
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अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
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उधार की लकड़ी से शवों के अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। अगर 2100 रुपये की लकड़ी खरीद रहे हैं तो कोई 500 जमा कर देता है तो कोई हजार रुपये। बाकी पैसे बाद में देने की मोहलत मांगी जा रही है। क्योंकि टाल वाले भी एक हजार और पांच सौ का नोट लेने से बच रहे हैं। कुछ ऐसे भी मामले आ रहे हैं जहां टाल वाले तो बड़े नोट लेने को तैयार हैं लेकिन लोगबाग एटीएम और बैंक से रुपये नहीं निकाल पा रहे हैं।
एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से मची अफरातफरी के बीच हर कोई परेशान है। घर में रुपये हैं मगर किसी काम के नहीं रहे। एक हजार और 500 के नोट लेने को तो कोई तैयार ही नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि जरूरी काम भी रुक गए हैं।
जरा सोचिए उस परिवार के बारे में जिसके घर पर किसी का निधन हो गया हो और घर पर इतना भी रुपया नहीं हो जो अंतिम संस्कार कर सके। इस समय ऐसे मामले भी प्रकाश में आ रहे हैं। लकड़ी तक उधार में ली जा रही है। ध्रुव घाट पर लकड़ी की टाल करने वाले जगदीश शर्मा ने बताया कि तकरीबन 2100 रुपये की लकड़ी खरीदी जाती है।
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सात मन लकड़ी तो अंतिम संस्कार के लिए चाहिए ही। अब क्योंकि लोगों का पैसा बैंक या एटीएम में फंस रहा है लिहाजा पूरे रुपये नहीं होते हैं। बाद में दे जाने को कह दिया जाता है। क्योंकि यह ऐसा पल होता है जहां कुछ कह नहीं सकते। बाद में लोग रुपये दे भी जाते हैं। एक हजार और पांच सौ का नोट भी कई जगह लिया जा रहा है।
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एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से मची अफरातफरी के बीच हर कोई परेशान है। घर में रुपये हैं मगर किसी काम के नहीं रहे। एक हजार और 500 के नोट लेने को तो कोई तैयार ही नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि जरूरी काम भी रुक गए हैं।
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जरा सोचिए उस परिवार के बारे में जिसके घर पर किसी का निधन हो गया हो और घर पर इतना भी रुपया नहीं हो जो अंतिम संस्कार कर सके। इस समय ऐसे मामले भी प्रकाश में आ रहे हैं। लकड़ी तक उधार में ली जा रही है। ध्रुव घाट पर लकड़ी की टाल करने वाले जगदीश शर्मा ने बताया कि तकरीबन 2100 रुपये की लकड़ी खरीदी जाती है।
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सात मन लकड़ी तो अंतिम संस्कार के लिए चाहिए ही। अब क्योंकि लोगों का पैसा बैंक या एटीएम में फंस रहा है लिहाजा पूरे रुपये नहीं होते हैं। बाद में दे जाने को कह दिया जाता है। क्योंकि यह ऐसा पल होता है जहां कुछ कह नहीं सकते। बाद में लोग रुपये दे भी जाते हैं। एक हजार और पांच सौ का नोट भी कई जगह लिया जा रहा है।