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मथुरा: लाडली जी मंदिर की कमान अब कमेटी के हाथ, रिसीवर व्यवस्था खत्म, तीन दिन में सौंपना होगा प्रभार
Wed, 23 Sep 2026 11:15 PM IST
Akash Dubey
अमर उजाला नेटवर्क, बरसाना (मथुरा)
अमर उजाला नेटवर्क, बरसाना (मथुरा)
Published by: Akash Dubey
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:15 PM IST
सार
ठाकुर लाडली जी महाराज मंदिर का 17 साल पुराना न्यायिक विवाद बुधवार को समाप्त हो गया। अपर सिविल जज परविंदर सिंह की अदालत ने वादीगण को वाद वापस लेने की अनुमति दी। नीचे विस्तार से पढ़ें खबर-
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मंदिर परिसर में होती आतिशबाजी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ठाकुर लाडली जी महाराज मंदिर की व्यवस्था को लेकर चली आ रही 17 साल पुरानी न्यायिक खींचतान का बुधवार को पटाक्षेप हो गया। वादीगण की ओर से मुकदमा वापस लेने की अनुमति मांगने पर अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या-02, मथुरा परविंदर सिंह की अदालत ने वाद वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही मंदिर की व्यवस्था अब रिसीवर के हाथों में नहीं रहेगी। पहले से गठित 18 सदस्यीय मंदिर प्रबंध समिति को मंदिर का समस्त प्रभार सौंपा जाएगा। न्यायालय ने रिसीवर को तीन दिन के भीतर समिति के सभापति हरिओम गोस्वामी को प्रभार सौंपने के निर्देश दिए हैं।
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मंदिर से जुड़ा मूल वाद वर्ष 2009 में दाखिल हुआ था। इसके बाद 2019 और 2026 में भी वाद सामने आए। न्यायालय में मूल वाद संख्या 370/2009, 900/2019 और नवीन सिविल वाद संख्या 463/2026 चल रहे थे। वादीगण ने प्रार्थना पत्र और शपथपत्र देकर कहा कि आपसी विवाद सुलझ चुका है और वे मुकदमा आगे नहीं चलाना चाहते। न्यायालय ने आदेश 23 नियम एक सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत वाद वापस लेने की अनुमति देकर तीनों वादों का निस्तारण कर दिया।
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चार सितंबर को गठित हो चुकी थी समिति
न्यायालय ने कोई नई समिति गठित नहीं की है। चार सितंबर को पारित प्रस्ताव के अनुसार मंदिर संचालन के लिए 18 सदस्यीय मंदिर प्रबंध समिति पहले ही गठित हो चुकी थी। इसमें हरिओम गोस्वामी सभापति, ध्रुवेश गोस्वामी उपसभापति और राहुल गोस्वामी मंत्री हैं। समिति के अन्य सदस्यों में यज्ञ पुरुष गोस्वामी, बिसम्बर गोस्वामी, भगवान दास गोस्वामी, सोनू गोस्वामी, नकुल गोस्वामी, दीपक गोस्वामी, चंद्र गोस्वामी, श्याम सुंदर गोस्वामी, नितेश गोस्वामी, कन्हैया गोस्वामी, अमित गोस्वामी, महेश गोस्वामी, बलराम गोस्वामी, किशोरी शरण गोस्वामी और माधव गोस्वामी शामिल हैं। रिसीवर को तीन दिन में मंदिर का पूरा प्रभार समिति के सभापति को सौंपना होगा। इसके बाद वह मंदिर से संबंधित कोई खर्च या व्यवहार नहीं करेगा। प्रभार सौंपने की अनुपालन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। आदेश की प्रतियां संबंधित रिसीवर, बैंक, थानाध्यक्ष, पुलिस क्षेत्राधिकारी और जनपद न्यायाधीश को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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