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Mathura News: कान्हा के हिंडोलों की विदेशों तक धूम
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बाजार में बिक रहे कान्हा के झूले ।
वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी की नगरी में राधा-कृष्ण को झूले में झुलाने के लिए हिंडोलों (झूलों) का बाजार सज गया है। आधुनिक झूलों को हल्का सा हिलाते ही इनमें से राधे-राधे की आवाज सुनाई देती है। इन हिंडोलों की देश-विदेश तक मांग है।
सावन माह और जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को झूला झुलाने के लिए श्रद्धालु आकर्षक हिंडोले खरीद रहे हैं। सागवान की लकड़ी से बने पारंपरिक झूलों से लेकर चांदी, स्टील और आकर्षक लाइटों से सजे हिंडोले बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं। बाजार में इस बार स्वचालित हिंडोले विशेष आकर्षण बने हुए हैं। कुछ हिंडोलों में लाइटिंग के साथ संगीत की सुविधा दी गई है। तकनीक और भक्ति के इस संगम को श्रद्धालु खासा पसंद कर रहे हैं। बाजार में पांच सौ से पंद्रह हजार तक के झूले मौजूद हैं।
दुकानदार द्वारकेश अग्रवाल ने बताया कि सागवान की लकड़ी पर बारीक नक्काशी कर आकर्षक हिंडोले तैयार किए गए हैं। इनमें फूल-पत्तियों की डिजाइन, मोर और कृष्णलीला से जुड़े चित्रों को उकेरा है। वहीं चांदी स्टील पर की नक्काशी और डिजाइन वाले हिंडोले भी बाजार में उपलब्ध हैं। लकड़ी के झूले मेरठ और मुरादाबाद से आ रहे हैं। लाइट वाले झूले यहीं कारीगर तैयार कर रहे हैं। कारोबारी गणेश अग्रवाल बताते हैं कि कान्हा हिंडोलों की मांग विदेशों तक है। देश के अलग-अलग शहरों के साथ विदेशों में रहने वाले कृष्ण भक्त भी यहां से हिंडोले मंगा रहे हैं। उन्होंने कई प्रकार के हिंडोले विदेशों में भेजे हैं।
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सावन माह और जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को झूला झुलाने के लिए श्रद्धालु आकर्षक हिंडोले खरीद रहे हैं। सागवान की लकड़ी से बने पारंपरिक झूलों से लेकर चांदी, स्टील और आकर्षक लाइटों से सजे हिंडोले बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं। बाजार में इस बार स्वचालित हिंडोले विशेष आकर्षण बने हुए हैं। कुछ हिंडोलों में लाइटिंग के साथ संगीत की सुविधा दी गई है। तकनीक और भक्ति के इस संगम को श्रद्धालु खासा पसंद कर रहे हैं। बाजार में पांच सौ से पंद्रह हजार तक के झूले मौजूद हैं।
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दुकानदार द्वारकेश अग्रवाल ने बताया कि सागवान की लकड़ी पर बारीक नक्काशी कर आकर्षक हिंडोले तैयार किए गए हैं। इनमें फूल-पत्तियों की डिजाइन, मोर और कृष्णलीला से जुड़े चित्रों को उकेरा है। वहीं चांदी स्टील पर की नक्काशी और डिजाइन वाले हिंडोले भी बाजार में उपलब्ध हैं। लकड़ी के झूले मेरठ और मुरादाबाद से आ रहे हैं। लाइट वाले झूले यहीं कारीगर तैयार कर रहे हैं। कारोबारी गणेश अग्रवाल बताते हैं कि कान्हा हिंडोलों की मांग विदेशों तक है। देश के अलग-अलग शहरों के साथ विदेशों में रहने वाले कृष्ण भक्त भी यहां से हिंडोले मंगा रहे हैं। उन्होंने कई प्रकार के हिंडोले विदेशों में भेजे हैं।
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