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जोधपुर झाल: प्रकृति की गोद में पक्षियों की अठखेलियों का बनेगा नया ठिकाना, विकसित हुआ ईको-सिस्टम

Sat, 30 Nov 2024 02:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 30 Nov 2024 02:16 PM IST
सार

आगरा और मथुरा जिले की सीमा पर फरह ब्लॉक की ग्राम पंचायत कौह के मौजा जोधपुर के लगभग 65 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला झाल पक्षियों के कलरव और अठखेलियों का नया ठिकाना बनाया जाएगा। इसके लिए यहां ईको-सिस्टम विकसित किया गया है।
 

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Jodhpur Jhal is developing as a bird sanctuary
मथुरा। जोधपुर झाल में विचरण करते पक्षी - फोटो : mathura

विस्तार

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद आगरा और मथुरा के बीच जोधपुर झाल को पक्षी विहार के रूप में विकसित करने जा रहा है। फरह के निकट 64 हेक्टेयर में फैला जोधपुर झाल पिछले कुछ सालों के दौरान देशी-विदेशी पक्षियों की पसंद बन गया है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष ने निरीक्षण भी किया।
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धर्म नगरी मथुरा और ताज नगरी आगरा आने वाले पर्यटकों के लिए फरह के निकट जोधपुर झाल को पक्षी विहार के रूप विकसित किया जा रहा है। टर्मिनल नहर और सिकंदरा रजबहा के बीच करीब चार किलोमीटर की परिधि में फैले जोधपुर झाल वेटलैंड के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित किया जा रहा है। इसके लिए ईको-सिस्टम विकसित किया गया है। प्रवासी पक्षियों के अनुकूल हेविटाट (प्रकृति के बीच रहने का आवास) विकसित किए जा रहे हैं।
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आवासीय पक्षियों के प्रजनन को बढ़ाने और सुरक्षित करने के लिए झाल में घना जंगल भी तैयार होगा। यहां निर्माण कार्य आगामी फरवरी तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद हरित पट्टी विकसित की जाएगी। वहां 7 वाटर बॉडी, 13 आइसलैंड और 13 झोपड़ी के साथ 2200 रनिंग मीटर नेचर वॉक भी विकसित किया जाएगा।
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शुक्रवार को जोधपुर झाल का निरीक्षण उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने किया। उन्होंने निर्माण कार्य सहित अन्य व्यवस्थाओं को देखा। पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश कुमार शर्मा और पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह के सुझाव पर कुछ सुधारात्मक दिशा-निर्देश भी कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को दिए गए।

पर्यटकों के लिए उपलब्ध होंगी सुविधाएं
पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा ने बताया कि जोधपुर झाल पर पर्यटकों के लिए प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें वॉच टावर, जैव विविधता के अध्ययन केंद्र, ईको टूरिज्म के लिए स्थानीय युवकों को नेचर गाइड की प्रशिक्षण की सुविधा, सेमिनार हॉल, पार्किंग, कैंटीन और टायलेट आदि शामिल है। इस पर करीब 8.66 करोड़ की लागत आएगी।


जोधपुर झाल में आने वाले प्रवासी पक्षी
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड पर स्थलीय व जलीय प्रवासी पक्षी आते हैं। प्रमुख रूप से ग्रेटर फ्लेमिंगो, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, कॉटन पिग्मी गूज, बार-हेडेड गूज, पाइड एवोसेट, नॉर्दर्न शॉवेलर, ब्लैक-टेल्ड गॉडविट, टफ्टिड डक, ब्लूथ्रोट, कॉमन टील, नॉर्दर्न पिंटेल, ग्रेलैग गूज, रूडी शेल्डक, मल्लार्ड, यूरेशियन कूट, यूरेशियन विजन, सिट्रिन वेगटेल, जैकोबिन कूको, यूरेशियन स्पूनबिल, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, ब्लिथ रीड वार्बलर, पेंटेड स्टॉर्क, रायनेक आदि प्रमुख हैं।


पक्षियों की 184 प्रजातियां की गईं रिकॉर्ड
जोधपुर झाल में 184 प्रजातियों के पक्षियों को रिकॉर्ड किया गया। इनमें 142 आवासीय प्रजातियां एवं 50 प्रवासी प्रजातियां सालभर दिखती हैं। जोधपुर झाल पर आईयूसीएन की रेड डेटा सूची के अनुसार लुप्त प्राय और निकट संकटग्रस्त पक्षियों की 15 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें 50 से अधिक प्रजातियां जोधपुर झाल पर प्रजनन करती हैं, जिनमें सारस क्रेन, ब्लैक-ब्रेस्टेड वीवर, स्ट्रीक्ड वीवर, बाया वीवर, गोल्डन ओरिओल, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, स्ट्रॉबेरी फिंच, सिल्वरबिल, स्कैली ब्रेस्टेड मुनिया, तिरंगी मुनिया, ग्रीन बी-ईटर, इंडियन रोलर, ग्रे हॉर्नबिल, कॉपर स्मिथ बारबेट, ब्लैक फ्रैंकलिन, लेशर विशलिंग डक, पिजेंट टेल्ड जैकाना, ब्रोंज बिंग्ड जैकाना, स्पॉट-बिल बतख, ग्रेटर पेंटेड स्नाइप, ग्रे-हेडेड स्वैम्पेन, लिटिल ग्रीव शामिल हैं।
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