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निरखि निरखि मुख लाल को जामै सब बलिहारी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 06 Sep 2015 12:23 AM IST
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मध्य रात्रि 12 बजते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरा और मृदंग बज उठते हैं। भगवान के प्राकट्य के साथ ही संपूर्ण मंदिर परिसर हरिबोल की करतल ध्वनि से गूंज उठा। इस अद्भुत अवसर के साक्षी बने असंख्य भक्तजन कान्हा के जन्म की खुशी में झूमने लगे।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर शनिवार को समूचे ब्रज में गजब का उल्लास रहा। शाम होते ही श्रीकृष्ण जन्म स्थान में प्रवेश के लिए भक्तों में होड़ मच गई। देश-विदेश से आए लाखों भक्तों के मन में जन्मोत्सव के परम आनंद में सराबोर होने की लालसा शिखर को स्पर्श करने लगी। अटूट भक्ति और अगाध श्रद्धा में भक्त भागवत भवन तक पहुंचने में हुए कष्टों को भूूल गए और परम सुख की अनुभूति होने लगी।
वातावरण में प्रत्येक मुख से हरिबोल और Òनंद के आनंद भए जय कन्हैया लाल कीÓ के स्वर गूंज रहे होते हैं। घंटे-घड़ियाल के साथ ढोल एवं मृदंग की गूंजती आवाज ही भगवान के जन्म का चारों दिशाओं में वादन करती हैं। आसमान से फूलों की बरसा, इत्र की खुशबू से संपूर्ण जन्मस्थान परिसर महक उठता है। आनन्द विभोर श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन एवं नृत्य के साथ भगवान के दर्शन को ललायित हो उठते हैं।
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इसी के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान के भागवत भवन में ठाकुर जी का जन्म महाभिषेक शुरू हो गया। केसर आदि सुगंधित द्रव्यों में लिपटे भगवान श्रीकृष्ण के चल श्रीविग्रह का अभिषेक अयोध्या के महंत नृत्यगोपाल दास महाराज, अनुराग डालमिया करते हैं। सचिव कपिल शर्मा, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डा. चंद्रभान गुप्ता सहयोगी बनते हैं। दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से ठाकुर जी के श्रीविग्रह का अभिषेक किया गया।
इस दौरान भागवत भवन के श्रीकेशवदेव मंदिर मेें ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरे, संकीर्तन के मध्य भगवान श्री राधाकृष्ण की दिव्य दर्शन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। रेशम और रत्न जड़े पीले रंग की पोशाक में श्रीराधाकृष्ण की अद्भुत छवि देखते ही बनती है। युगल सरकार के ये अलौकिक दर्शन भक्तों को भाव विभोर कर देते हैं। एक बार भक्तों की नजर ठाकुर जी से मिल जाए तो हटने का नाम नहीं लेती है, ऐसे में आस्था का सागर उन्हें आगे बढ़ने को मजबूर कर देता है।
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर शनिवार को समूचे ब्रज में गजब का उल्लास रहा। शाम होते ही श्रीकृष्ण जन्म स्थान में प्रवेश के लिए भक्तों में होड़ मच गई। देश-विदेश से आए लाखों भक्तों के मन में जन्मोत्सव के परम आनंद में सराबोर होने की लालसा शिखर को स्पर्श करने लगी। अटूट भक्ति और अगाध श्रद्धा में भक्त भागवत भवन तक पहुंचने में हुए कष्टों को भूूल गए और परम सुख की अनुभूति होने लगी।
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वातावरण में प्रत्येक मुख से हरिबोल और Òनंद के आनंद भए जय कन्हैया लाल कीÓ के स्वर गूंज रहे होते हैं। घंटे-घड़ियाल के साथ ढोल एवं मृदंग की गूंजती आवाज ही भगवान के जन्म का चारों दिशाओं में वादन करती हैं। आसमान से फूलों की बरसा, इत्र की खुशबू से संपूर्ण जन्मस्थान परिसर महक उठता है। आनन्द विभोर श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन एवं नृत्य के साथ भगवान के दर्शन को ललायित हो उठते हैं।
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इसी के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान के भागवत भवन में ठाकुर जी का जन्म महाभिषेक शुरू हो गया। केसर आदि सुगंधित द्रव्यों में लिपटे भगवान श्रीकृष्ण के चल श्रीविग्रह का अभिषेक अयोध्या के महंत नृत्यगोपाल दास महाराज, अनुराग डालमिया करते हैं। सचिव कपिल शर्मा, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डा. चंद्रभान गुप्ता सहयोगी बनते हैं। दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से ठाकुर जी के श्रीविग्रह का अभिषेक किया गया।
इस दौरान भागवत भवन के श्रीकेशवदेव मंदिर मेें ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरे, संकीर्तन के मध्य भगवान श्री राधाकृष्ण की दिव्य दर्शन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। रेशम और रत्न जड़े पीले रंग की पोशाक में श्रीराधाकृष्ण की अद्भुत छवि देखते ही बनती है। युगल सरकार के ये अलौकिक दर्शन भक्तों को भाव विभोर कर देते हैं। एक बार भक्तों की नजर ठाकुर जी से मिल जाए तो हटने का नाम नहीं लेती है, ऐसे में आस्था का सागर उन्हें आगे बढ़ने को मजबूर कर देता है।