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जुबली पार्क जमीन का बैनामा निरस्त कराएगी पालिका
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:50 PM IST
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मथुरा नगर पालिका ने जुबली पार्क में कथित अनाधिकृत रूप से विक्रय की गई जमीन की रजिस्ट्री के निरस्तीकरण की अनुमति डीएम से मांगी है। इस जमीन पर जितेंद्र सिंह पुत्र किशोर सिंह आदि का वर्तमान में कब्जा है, यहां व्यवसायिक कांपलेक्स का निर्माण किया जा रहा है। किशोर सिंह पूर्व में सपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डा. ब्रजेश कुमार ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि जुबलीपार्क स्थित 320.20 वर्ग मीटर जमीन मथुरानाथ चतुर्वेदी को पांच रुपये किराए पर दी गई थी। 1989 में तत्कालीन अध्यक्ष ने 30 वर्षीय पट्टा अनधिकृत रूप से मथुरानाथ चतुर्वेदी के नाम बगैर बोर्ड अनुमति के रजिस्टर्ड करा दिया।
1994 में यह किरायानामा बसंत चतुर्वेदी व यशवंत चतुर्वेदी पुत्रगण स्व. मथुरानाथ चतुर्वेदी के नाम कर दिया। 1997 में यहां नवनिर्माण की अनुमति पालिका ने नहीं दी। 2009 में पालिका की इस जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसमें जमीन को फ्री होल्ड दर्शाया गया।
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बाद में इस जमीन को आलोक चतुर्वेदी पुत्र वासुदेव चतुर्वेदी निवासी छत्ता बाजार और अग्रवाल एंड ठाकुर एसोसिएट द्वारा पार्टनर जितेंद्र सिंह पुत्र किशोर सिंह को विक्रय कर दिया गया, जो वर्तमान में निर्माण करा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पालिका की जमीन के अवैध रूप से षड्यंत्र के तहत फ्री होल्ड, एनओसी देने के लिए तत्कालीन ईओ की सेवाएं समाप्त की गईं।
संदेह में पालिका और विकास प्राधिकरण की भूमिका
एक वर्ष से जुबली पार्क में पालिका की जमीन पर निर्माण चल रहा है। इसे लेकर लोकायुक्त, डीएम और विकास प्राधिकरण से शिकायत की गई। लेकिन, अफसरों ने फाइल को दबाए रखा। अब निर्माण पूर्ण होने को है तब फाइल पालिका के स्तर से पलटी गई है। प्रशासन अब भी खामोश है।
पालिका की बेश कीमती जमीन की अनियमित और अवैध रूप में रजिस्ट्री कराई गई। इसके निरस्तीकरण की अनुमति मांगी गई है। शासन निरस्तीकरण की कार्रवाई करता है तो वर्तमान में हो रहे निर्माण को गिराया जा सकेगा। यह जमीन पालिका की है।
- डा. ब्रजेश कुमार, ईओ मथुरा नगर पालिका
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नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डा. ब्रजेश कुमार ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि जुबलीपार्क स्थित 320.20 वर्ग मीटर जमीन मथुरानाथ चतुर्वेदी को पांच रुपये किराए पर दी गई थी। 1989 में तत्कालीन अध्यक्ष ने 30 वर्षीय पट्टा अनधिकृत रूप से मथुरानाथ चतुर्वेदी के नाम बगैर बोर्ड अनुमति के रजिस्टर्ड करा दिया।
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1994 में यह किरायानामा बसंत चतुर्वेदी व यशवंत चतुर्वेदी पुत्रगण स्व. मथुरानाथ चतुर्वेदी के नाम कर दिया। 1997 में यहां नवनिर्माण की अनुमति पालिका ने नहीं दी। 2009 में पालिका की इस जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसमें जमीन को फ्री होल्ड दर्शाया गया।
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बाद में इस जमीन को आलोक चतुर्वेदी पुत्र वासुदेव चतुर्वेदी निवासी छत्ता बाजार और अग्रवाल एंड ठाकुर एसोसिएट द्वारा पार्टनर जितेंद्र सिंह पुत्र किशोर सिंह को विक्रय कर दिया गया, जो वर्तमान में निर्माण करा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पालिका की जमीन के अवैध रूप से षड्यंत्र के तहत फ्री होल्ड, एनओसी देने के लिए तत्कालीन ईओ की सेवाएं समाप्त की गईं।
संदेह में पालिका और विकास प्राधिकरण की भूमिका
एक वर्ष से जुबली पार्क में पालिका की जमीन पर निर्माण चल रहा है। इसे लेकर लोकायुक्त, डीएम और विकास प्राधिकरण से शिकायत की गई। लेकिन, अफसरों ने फाइल को दबाए रखा। अब निर्माण पूर्ण होने को है तब फाइल पालिका के स्तर से पलटी गई है। प्रशासन अब भी खामोश है।
पालिका की बेश कीमती जमीन की अनियमित और अवैध रूप में रजिस्ट्री कराई गई। इसके निरस्तीकरण की अनुमति मांगी गई है। शासन निरस्तीकरण की कार्रवाई करता है तो वर्तमान में हो रहे निर्माण को गिराया जा सकेगा। यह जमीन पालिका की है।
- डा. ब्रजेश कुमार, ईओ मथुरा नगर पालिका