{"_id":"68a0ead7b633fdb7be08f01b","slug":"i-feel-like-reciting-ramayana-in-chitrakoot-and-bhagwat-katha-in-vrindavan-rambhadracharya-mathura-news-c-369-1-mt11010-134384-2025-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"चित्रकूट में रामायण और वृंदावन में भागवत कथा करने का ही मन करता है : रामभद्राचार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चित्रकूट में रामायण और वृंदावन में भागवत कथा करने का ही मन करता है : रामभद्राचार्य
विज्ञापन
रामभद्राचार्य महाराज।
वृंदावन। परिक्रमा मार्ग स्थित तुलसी कुंज में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य महाराज ने परीक्षित जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि चित्रकूट में रामायण और वृंदावन में भागवत कथा करने का विशेष मन होता है।
कथा के दौरान महाराजश्री ने महाभारत के पश्चात अश्वत्थामा द्वारा पांचों पांडव पुत्रों की हत्या, उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र का प्रहार और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गर्भस्थ परीक्षित की रक्षा जैसे मार्मिक प्रसंगों को अत्यंत भावुकता के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान ने उत्तरा के गर्भ में स्वयं प्रवेश कर परीक्षित की रक्षा की और सुदर्शन चक्र से ब्रह्मास्त्र का नाश किया। इस मौके पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ (उच्च न्यायालय), महामंडलेश्वर गोपीकृष्ण दास, पं. बिहारीलाल वशिष्ठ, ज्ञानी जी (जगन्नाथ आश्रम), बलरामाचार्य, डॉ. राम विलास चतुर्वेदी, रविकांत गर्ग आदि मौजूद रहे।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य को मिला अंतरराष्ट्रीय सनातन रत्न सम्मान
वृंदावन। छत्तीसगढ़ कुंज, परिक्रमा मार्ग में चल रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर ब्रजभूमि कल्याण परिषद द्वारा जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य महाराज को अंतरराष्ट्रीय सनातन रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ द्वारा प्रदान किया गया। उन्होेंने बताया कि रामभद्राचार्य महाराज प्रभु श्रीराम के महान भक्त हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे सामाजिक सेवा में भी निरंतर सक्रिय हैं, इसलिए उन्हें यह सम्मान दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महामंडलेश्वर गोपीकृष्ण दास महाराज को राष्ट्रीय सनातन रत्न सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें गोसेवा और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
कथा के दौरान महाराजश्री ने महाभारत के पश्चात अश्वत्थामा द्वारा पांचों पांडव पुत्रों की हत्या, उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र का प्रहार और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गर्भस्थ परीक्षित की रक्षा जैसे मार्मिक प्रसंगों को अत्यंत भावुकता के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान ने उत्तरा के गर्भ में स्वयं प्रवेश कर परीक्षित की रक्षा की और सुदर्शन चक्र से ब्रह्मास्त्र का नाश किया। इस मौके पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ (उच्च न्यायालय), महामंडलेश्वर गोपीकृष्ण दास, पं. बिहारीलाल वशिष्ठ, ज्ञानी जी (जगन्नाथ आश्रम), बलरामाचार्य, डॉ. राम विलास चतुर्वेदी, रविकांत गर्ग आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जगद्गुरु रामभद्राचार्य को मिला अंतरराष्ट्रीय सनातन रत्न सम्मान
वृंदावन। छत्तीसगढ़ कुंज, परिक्रमा मार्ग में चल रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर ब्रजभूमि कल्याण परिषद द्वारा जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य महाराज को अंतरराष्ट्रीय सनातन रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ द्वारा प्रदान किया गया। उन्होेंने बताया कि रामभद्राचार्य महाराज प्रभु श्रीराम के महान भक्त हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे सामाजिक सेवा में भी निरंतर सक्रिय हैं, इसलिए उन्हें यह सम्मान दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महामंडलेश्वर गोपीकृष्ण दास महाराज को राष्ट्रीय सनातन रत्न सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें गोसेवा और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संवाद
विज्ञापन