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आखिर कैसे हुई रामवृक्ष की मौत?
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 15 Apr 2017 12:20 AM IST
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रामवृक्ष यादव
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जवाहरबाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव की मौत कैसे हुई? सीबीआई अब इस सवाल का जवाब तलाश रही है। फिलहाल रामवृक्ष के करीबी राकेश गुप्ता, चंदन बोस, वीरेश यादव और जवाहरबाग से गिरफ्तार किए गए कब्जाधारियों से पूछताछ में पता चला है कि हिंसा शुरू होने पर कुछ देर के लिए रामवृक्ष नजर आया था लेकिन उसके बाद उसे किसी ने नहीं देखा। जिस तंबू में उसके झुलसकर मरने की बात कही जा रही है, उसमें वह रहता ही नहीं था।
स्वाधीन भारत विधिक संगठन का अध्यक्ष रामवृक्ष यादव अपने साथियों के साथ मार्च, 2014 से जवाहरबाग पर कब्जा जमाए था। 2 जून, 2016 को कब्जा हटाने की कवायद के दौरान भड़की हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव के साथ-साथ 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। इनमें रामवृक्ष यादव भी था। पुलिस ने रामवृक्ष का झुलसा हुआ शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। उसकी शिनाख्त भी संभव नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने जेल में बंद रामवृक्ष के साथियों से उसकी शिनाख्त कराई थी। हालांकि रामवृक्ष की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
अब सीबीआई ने भी रामवृक्ष और उसके साथ झुलसकर मरे 11 लोगों की मौत को लेकर जांच शुरू कर दी है। जवाहरबाग से आपरेशन सर्च के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों ने बताया कि जिस तंबू में रामवृक्ष के झुलसकर मरने की बात की जा रही है वह वहां कभी रहता ही नहीं था। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रामवृक्ष झुलसकर मरा या झुलसने से पहले उसकी मौत हो गई थी? रामवृक्ष के साथी राकेश गुप्ता, चंदनबोस और वीरेश यादव से पूछताछ की जा रही है। इन लोगों ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक हिंसा के वक्त तो रामवृक्ष नजर आ रहा था लेकिन जब पुलिस ने कांबिंग शुरू की उसके बाद वह कहीं नहीं दिखा।
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किसी की पसली टूटी थी तो किसी की हड्डी
जवाहरबाग हिंसा में मारे गए कब्जाधारियों के शवों का जब पोस्टमार्टम कराया गया तो किसी की हड्डी टूटी थी तो किसी की पसली। चोटों से लीवर तक जख्मी हो गए थे। सिर पर भी गंभीर चोटें थीं। माने किसी भारी चीज से सिर पर वार किया गया हो।
अफसर दो दिन छुपाए रहे रामवृक्ष की मौत को
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दो दिनों तक रामवृक्ष की मौत को छुपाए रहे थे। मौत तो दो जून को ही हो गई थी लेकिन घोषणा 4 जून को की गई। 3 जून को डीजीपी जावीद अहमद ने कहा था कि रामवृक्ष या तो मारा गया या भाग गया। अगर भाग गया है तो जल्द पकड़ा जाएगा।
कब्जाधारियों की न्यायालय में पेशी
जवाहर बाग पर कब्जा करने, तहसील में मारपीट और तोड़फोड़ करने के मामले में चंदन बोस, वीरेश यादव, राकेश बाबू, पूनम बोस, अनिल, दुर्गेश, प्रेमचंद्र सहित करीब सौ से अधिक आरोपियों की शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम राधेमोहन श्रीवास्तव की कोर्ट में पेशी हुई।कब्जाधारियों के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि मामले में शुक्रवार को मथुरा जेल से 46 आरोपी न्यायालय में पेश हुए। नो-वर्क के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अब सुनवाई एक मई को होगी।
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स्वाधीन भारत विधिक संगठन का अध्यक्ष रामवृक्ष यादव अपने साथियों के साथ मार्च, 2014 से जवाहरबाग पर कब्जा जमाए था। 2 जून, 2016 को कब्जा हटाने की कवायद के दौरान भड़की हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव के साथ-साथ 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। इनमें रामवृक्ष यादव भी था। पुलिस ने रामवृक्ष का झुलसा हुआ शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। उसकी शिनाख्त भी संभव नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने जेल में बंद रामवृक्ष के साथियों से उसकी शिनाख्त कराई थी। हालांकि रामवृक्ष की मौत की वैज्ञानिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
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अब सीबीआई ने भी रामवृक्ष और उसके साथ झुलसकर मरे 11 लोगों की मौत को लेकर जांच शुरू कर दी है। जवाहरबाग से आपरेशन सर्च के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों ने बताया कि जिस तंबू में रामवृक्ष के झुलसकर मरने की बात की जा रही है वह वहां कभी रहता ही नहीं था। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रामवृक्ष झुलसकर मरा या झुलसने से पहले उसकी मौत हो गई थी? रामवृक्ष के साथी राकेश गुप्ता, चंदनबोस और वीरेश यादव से पूछताछ की जा रही है। इन लोगों ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक हिंसा के वक्त तो रामवृक्ष नजर आ रहा था लेकिन जब पुलिस ने कांबिंग शुरू की उसके बाद वह कहीं नहीं दिखा।
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किसी की पसली टूटी थी तो किसी की हड्डी
जवाहरबाग हिंसा में मारे गए कब्जाधारियों के शवों का जब पोस्टमार्टम कराया गया तो किसी की हड्डी टूटी थी तो किसी की पसली। चोटों से लीवर तक जख्मी हो गए थे। सिर पर भी गंभीर चोटें थीं। माने किसी भारी चीज से सिर पर वार किया गया हो।
अफसर दो दिन छुपाए रहे रामवृक्ष की मौत को
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दो दिनों तक रामवृक्ष की मौत को छुपाए रहे थे। मौत तो दो जून को ही हो गई थी लेकिन घोषणा 4 जून को की गई। 3 जून को डीजीपी जावीद अहमद ने कहा था कि रामवृक्ष या तो मारा गया या भाग गया। अगर भाग गया है तो जल्द पकड़ा जाएगा।
कब्जाधारियों की न्यायालय में पेशी
जवाहर बाग पर कब्जा करने, तहसील में मारपीट और तोड़फोड़ करने के मामले में चंदन बोस, वीरेश यादव, राकेश बाबू, पूनम बोस, अनिल, दुर्गेश, प्रेमचंद्र सहित करीब सौ से अधिक आरोपियों की शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम राधेमोहन श्रीवास्तव की कोर्ट में पेशी हुई।कब्जाधारियों के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि मामले में शुक्रवार को मथुरा जेल से 46 आरोपी न्यायालय में पेश हुए। नो-वर्क के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अब सुनवाई एक मई को होगी।