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होरी में मेरे लग जाएगी, मति मारे दृगन की चोट
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 13 Feb 2017 11:22 PM IST
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द्वारिकाधीश मंदिर
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ब्रज के प्रमुख मंदिर द्वारिकाधीश में होली महोत्सव के तीसरे दिन भक्तों ने ठाकुर जी संग होली खेली। होली महोत्सव में होली के रसिया प्रस्तुत किए गए। श्रद्धालुओं पर गुलाल उड़ाया गया। वसंत पंचमी से शुरू हुए होली आयोजनों की शृंखला में पूर्णिमा से द्वारिकाधीश मंदिर में होली गायन और 31 दिवसीय होली महोत्सव शुरू हो गया है।
होरी के हुरियारे, फाग गायक चुन्नीलाल चतुर्वेदी और छोटे लाल ने सोमवार को मंदिर में ‘होरी में मेरे लग जाएगी, मति मारे दृगन की चोट...’ रसिया प्रस्तुत किया। मेरी चूनर में लग गयौ दाग री, ऐसौ चटक रंग डारयौ..., रंग में बोर दई जा कारी कामर बारे ने..., आदि रसिया, छंद प्रस्तुत किए। महोत्सव में रोजाना प्राचीन वाद्य यंत्र बंब वादन, बेला, ढ़ोलक, मजीरा, खरताल और अन्य से मधुर ध्वनि प्रस्फुटित की जा रही है। ठाकुर जी से गुलाल संग होली खेलने को होड़ रहती है।
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होरी के हुरियारे, फाग गायक चुन्नीलाल चतुर्वेदी और छोटे लाल ने सोमवार को मंदिर में ‘होरी में मेरे लग जाएगी, मति मारे दृगन की चोट...’ रसिया प्रस्तुत किया। मेरी चूनर में लग गयौ दाग री, ऐसौ चटक रंग डारयौ..., रंग में बोर दई जा कारी कामर बारे ने..., आदि रसिया, छंद प्रस्तुत किए। महोत्सव में रोजाना प्राचीन वाद्य यंत्र बंब वादन, बेला, ढ़ोलक, मजीरा, खरताल और अन्य से मधुर ध्वनि प्रस्फुटित की जा रही है। ठाकुर जी से गुलाल संग होली खेलने को होड़ रहती है।
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