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खेलें होरी रंगीली गली, जहां वृषभान की लली

Sun, 22 Feb 2015 11:55 PM IST
ब्यूूराे अमर उजाला
ब्यूूराे अमर उजाला Updated Sun, 22 Feb 2015 11:55 PM IST
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 ‘ब्रज ते शोभा फाग की और ब्रज की शोभा फाग, गोरिन लख रसियान के हिए में उठै अनुराग’ नागरी दासिनी के जा सवैया ने ब्रज के प्रसिद्ध प्रमुख त्यौहार होरी में जान डारि दई। यमुना किनारे रमणरेती के आश्रम में खूबई फागुन की मस्ती छाई रही। कहा बूढ़ौ कहा जवान और किशोरवय छरी छापरी। सब होली के मद में खूबई उल्लासित भईं। ब्रज की रेती तन लगाइ कैं टेसू के फूल कौ रंग और चंदन चोबा कौ तिलक मस्तक लगाइ कै मदमस्त है गई और गामन लगी, मेरो खोइ गयौ बाजू बंद रसिया होरी में...
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मौको हो मथुरा से दस किलोमीटर दूर महावन के ज्हौरि बने संत शरणानंद के आश्रम रमणरेती में रविवार को ब्रज की होरी भई। स्वामी रामस्वरूप शर्मा की रासमंडली के कलाकारों ने होरी में ऐसौ रंग भरियौ कै वो अंदर तक उतर गयौ।
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‘खैलें होरी रंगीली गली, जहां वृषभान की लली
ऊंचे शिखर गिरि पै मंदिर बनियौ
शोभा ताकी बरनि न जाए, कहै कौ गुन्यौ
झुकि झुकि इनके झरोखा की कीरति लली,
वृषभान की लली, खेलेंगे होली, वृषभान की लली...

होली महोत्सव में प्रमुख संत कथा वाचक रमेश भाई ओझा, स्वामी अवधेशानंद, शंकराचार्य आश्रम के मुनीश जी महाराज, महामंडलेश्वर श्याम जी महाराज, स्वामी गुरुचरणानंद, स्वामी महेशानंद, स्वामी अद्वैतानंद, आचार्य अशोक कुमार जोशी सहित हजारों श्रद्धालुओं ने होली के ब्रज रस का आनंद लिया।
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40 टैंकों में घोला टेसू के फूलों का रंग
मथुरा। रमणरेती आश्रम में श्रद्धालुओं पर रंग बिखेरने को 40 टैंकोें में कृत्रिम रूप से बनाए टेसू के फूलों का रंग घोला गया। बिना केमिकल वाले इस रंग मेें श्रद्धालु जमकर नहाए।

चंादी की पिचकारी, भरि भरि मारी
मथुरा। रमणरेती आश्रम में हुई होली में संतों की ओर से छह से अधिक चांदी की पिचकारी से होली खेली गई। संतों के हाथों से टेसू के फूलों से रंग डलवाने को श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही।


लड्डू गोपाल पर रंग की बौछार
मथुरा। रमणरेती आश्रम में होली में ब्रज भ्रमण पर आए सैकड़ों श्रद्धालु लड्डू गोपाल जी को संग लेकर जमकर होली खेले। होली के रंग में रंगे राधाकृष्ण की प्रतिमा हाथों में लिए श्रद्धालु घंटों नांचे। श्रद्धालुओं ने ब्रज की रेती रमणरेती में शरीर पर ब्रज रज लगाकर खुद को धन्य किया।
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