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Mathura News: यहां लहंगा चोली में दर्शन देते हैं बजरंगबली
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मथुरा। हनुमान जी महाराज।
- फोटो : mathura
तुषार चौहान
वृंदावन। जहां एक ओर हनुमानजी को हम उनके बल, भक्ति और ब्रह्मचर्य स्वरूप में पूजते हैं, वहीं श्रीधाम वृंदावन के मिथिला कुंज आश्रम में उनका एक दुर्लभ और दिव्य रूप चारुशिला सखी के रूप में दर्शन देता है। यहां पवनपुत्र हनुमान सखी स्वरूप में श्री सीताराम युगल सरकार की अंतरंग निकुंज सेवा में निरंतर रत रहते हैं। उन्हें लहंगा चोली पहनाई जाती है।
मंदिर के महंत महामंडलेश्वर किशोरी शरण महाराज बताते हैं कि श्री तुलसीपीठाधीश्वर जगतगुरु निंबार्काचार्य श्री राधे श्याम शरण देवाचार्य महाराज द्वारा श्री चारुशिला सखी के रूप में हनुमानजी की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। यह स्वरूप भक्ति, माधुर्य व अद्वैत सेवा का अनूठा संगम है। संवाद
चारुशिला सखी के स्वरूप की विशेषताएं
इस दिव्य स्वरूप में श्रीहनुमानजी एक हाथ में पूजा की थाली और दूसरे हाथ में चंवर लिए रहते हैं और श्री सीताराम युगल जोड़ी की नित्य सेवा में संलग्न रहते हैं। उन्हें यूथेश्वरी श्री चंद्रकला सखी (भरत) के संग मुख्य सखी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
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शास्त्रों में प्रमाणित स्वरूप
श्री हनुमत संहिता, अगस्त संहिता, लोमश रामायण जैसे अनेक ग्रंथों में इस सखी रूप का विस्तार से वर्णन मिलता है।
श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ दर्शन
श्री मिथिला कुंज आश्रम, वृंदावन में चारुशिला सखी के इस अनुपम स्वरूप के दर्शन भावुक भक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्य का विषय हैं। यह मान्यता है कि इस स्वरूप का दर्शन करने से भक्त को न केवल हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि श्री सीताराम युगल सरकार के परम सानिध्य का लाभ भी सहज प्राप्त होता है।
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वृंदावन। जहां एक ओर हनुमानजी को हम उनके बल, भक्ति और ब्रह्मचर्य स्वरूप में पूजते हैं, वहीं श्रीधाम वृंदावन के मिथिला कुंज आश्रम में उनका एक दुर्लभ और दिव्य रूप चारुशिला सखी के रूप में दर्शन देता है। यहां पवनपुत्र हनुमान सखी स्वरूप में श्री सीताराम युगल सरकार की अंतरंग निकुंज सेवा में निरंतर रत रहते हैं। उन्हें लहंगा चोली पहनाई जाती है।
मंदिर के महंत महामंडलेश्वर किशोरी शरण महाराज बताते हैं कि श्री तुलसीपीठाधीश्वर जगतगुरु निंबार्काचार्य श्री राधे श्याम शरण देवाचार्य महाराज द्वारा श्री चारुशिला सखी के रूप में हनुमानजी की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। यह स्वरूप भक्ति, माधुर्य व अद्वैत सेवा का अनूठा संगम है। संवाद
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चारुशिला सखी के स्वरूप की विशेषताएं
इस दिव्य स्वरूप में श्रीहनुमानजी एक हाथ में पूजा की थाली और दूसरे हाथ में चंवर लिए रहते हैं और श्री सीताराम युगल जोड़ी की नित्य सेवा में संलग्न रहते हैं। उन्हें यूथेश्वरी श्री चंद्रकला सखी (भरत) के संग मुख्य सखी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
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शास्त्रों में प्रमाणित स्वरूप
श्री हनुमत संहिता, अगस्त संहिता, लोमश रामायण जैसे अनेक ग्रंथों में इस सखी रूप का विस्तार से वर्णन मिलता है।
श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ दर्शन
श्री मिथिला कुंज आश्रम, वृंदावन में चारुशिला सखी के इस अनुपम स्वरूप के दर्शन भावुक भक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्य का विषय हैं। यह मान्यता है कि इस स्वरूप का दर्शन करने से भक्त को न केवल हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि श्री सीताराम युगल सरकार के परम सानिध्य का लाभ भी सहज प्राप्त होता है।