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Mathura News: आजादी के आंदोलन में तीन बार जेल गए थे हरे कृष्ण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 Aug 2025 01:11 AM IST
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Hare Krishna went to jail three times during the freedom movement
रामश्री देवी।
मथुरा। छाता कस्बे के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. हरे कृष्ण ने आजादी के आंदोलन में प्रमुखता से भाग लिया था। उन्हें तीन बार जेल जाना पड़ा और एक बार नजरबंद रखा गया था।
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स्व. हरे कृष्ण की पुत्रवधू राजश्री देवी ने बताया कि उनके ससुर ने नमक सत्याग्रह में भाग लिया था। इसके कारण सन 1930 में में उन्हें 6 माह का कारावास दिया गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने पर सन् 1932 में उन्हें 1 वर्ष का कारावास तथा सन् 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण 1 मास का कारावास और 50 रुपये का अर्थदंड मिला था। सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें नजरबंद रखा गया। इसका वर्णन स्मृति ग्रंथ व स्वर्ण जयंती में है।
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उन्होंने बताया कि स्व. हरे कृष्ण का जन्म सन् 1906 में हुआ था। इनके पिता का नाम चंदा सिंह और माता का नाम मुन्नी देवी था। आजादी के पूर्व से ही उनका परिवार हरनाथिया थोक में रह रहा है। इनकी पत्नी का नाम फूलमती देवी जबकि तीन तोताराम, श्यामबाबू, और विजयकुमार हैं। तोताराम की पत्नी शांतीदेवी, श्यामबाबू की पत्नी रामश्री और विजयकुमार की पत्नी का नाम रामवती हैं।
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छाता में गांधीजी ने खाया था दलिया
महात्मा गांधीजी 7 नवंबर सन् 1929 को मथुरा से कोसीकलां आए थे। रास्ते में छाता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महाशय हरेकृष्ण के मकान पर रुके थे। हरेकृष्ण ने गांधीजी के साथ अन्य लोगों के लिए छाछ व दलिया के नाश्ते का प्रबंध किया था।
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