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औषधीय और चंदन के पौधों से महकेगा गिरिराज पर्वत
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गोवर्धन। गिरिराज पर्वत अब चंदन और औषधीय पौधों से महकेगा। वन विभाग ने इसकी पहल शुरू कर दी है। इसके लिए पर्वत क्षेत्र में पत्थर चिटा, तमाल, चंदन आदि के पौधे लगाकर वन विभाग मिट्टी की उर्वरक क्षमता की पहचान करने में जुट गया है। वन विभाग की टीम ने लखनऊ नर्सरी से कुछ चंदन एवं पत्थर चिटा के पौधे गिरिराज तलहटी में रोपे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को औषधीय पौधों से परिचित कराने के लिए 5 जून को विभिन्न प्रजातियों के औषधीय, ऑक्सीजन, छायादार पौधे रोपे जाएंगे।
गिरिराज पर्वत के संरक्षण और पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिए वन विभाग द्वारा समय-समय पर बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते रहे हैं। धार्मिक महत्व के कारण गिरिराज पर्वत के संरक्षण के लिए हजारों की संख्या में धौ कीकर, पीलू, बांस, कदंब, बर, पीपल आदि की हरियाली पर्वत क्षेत्र को शोभायमान कर रही है।
अब विभागीय अधिकारी पर्वत क्षेत्र में औषधीय एवं चंदन के पौधा रोपने की तैयारियों में जुटे हैं। वन विभाग द्वारा चंदन व औषधीय पौधा पत्थर चिटा के लखनऊ नर्सरी से लाकर गिरिराज तलहटी में रोपे गए हैं। फिलहाल इन्हें पर्र्वत की तलहटी में रोपने का उद्देश्य इसके इन पौधों के अनुरूप स्थानीय वातावरण की जानकारी करना है।
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औषधीय पौधे के लिए लोगों का बढ़ेगा रुझान
आयुर्वेद के अनुसार, पत्थरचट्टा में तमाम तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं और इसका प्रयोग कई तरह की बीमारियों की दवा बनाने में किया जाता है। पत्थरचट्टा के अलावा इसे एयर प्लांट, कैथेड्रल बेल्स, लाइफ प्लांट और मैजिक लीफ के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इस पौधे को भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी के नाम से जानते हैं, जबकि मेडिकल साइंस में ट्राइन्थिमा मोनोगाइना, सामान्य तौर पर इसे कार्पेट वीड भी कहा जाता है। इस पौधे की पत्तियां स्वाद में खट्टी और नमकीन होती हैं।
पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए गिरिराज पर्वत क्षेत्र में हजारों पौधा धौ, कदंब, करील, पीपल, बर आदि के पहले लगाए जा चुके हैं। हाल ही में कुछ पौधा चंदन एवं 20 पौधे पत्थर चिटा के तलहटी में रोप गए हैं। जिनके संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। 5 जून को पर्यावरण के अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के औषधीय एवं सुगंधित पौधे रोपने की तैयारी चल रही है।
-आशीष कुमार, वन दरोगा गोवर्धन रेंज
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गिरिराज पर्वत के संरक्षण और पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिए वन विभाग द्वारा समय-समय पर बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते रहे हैं। धार्मिक महत्व के कारण गिरिराज पर्वत के संरक्षण के लिए हजारों की संख्या में धौ कीकर, पीलू, बांस, कदंब, बर, पीपल आदि की हरियाली पर्वत क्षेत्र को शोभायमान कर रही है।
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अब विभागीय अधिकारी पर्वत क्षेत्र में औषधीय एवं चंदन के पौधा रोपने की तैयारियों में जुटे हैं। वन विभाग द्वारा चंदन व औषधीय पौधा पत्थर चिटा के लखनऊ नर्सरी से लाकर गिरिराज तलहटी में रोपे गए हैं। फिलहाल इन्हें पर्र्वत की तलहटी में रोपने का उद्देश्य इसके इन पौधों के अनुरूप स्थानीय वातावरण की जानकारी करना है।
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औषधीय पौधे के लिए लोगों का बढ़ेगा रुझान
आयुर्वेद के अनुसार, पत्थरचट्टा में तमाम तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं और इसका प्रयोग कई तरह की बीमारियों की दवा बनाने में किया जाता है। पत्थरचट्टा के अलावा इसे एयर प्लांट, कैथेड्रल बेल्स, लाइफ प्लांट और मैजिक लीफ के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इस पौधे को भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी के नाम से जानते हैं, जबकि मेडिकल साइंस में ट्राइन्थिमा मोनोगाइना, सामान्य तौर पर इसे कार्पेट वीड भी कहा जाता है। इस पौधे की पत्तियां स्वाद में खट्टी और नमकीन होती हैं।
पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए गिरिराज पर्वत क्षेत्र में हजारों पौधा धौ, कदंब, करील, पीपल, बर आदि के पहले लगाए जा चुके हैं। हाल ही में कुछ पौधा चंदन एवं 20 पौधे पत्थर चिटा के तलहटी में रोप गए हैं। जिनके संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। 5 जून को पर्यावरण के अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के औषधीय एवं सुगंधित पौधे रोपने की तैयारी चल रही है।
-आशीष कुमार, वन दरोगा गोवर्धन रेंज