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UP: लोकेशन मिलती है न हो सकती है पहचान...प्रॉक्सी VPN का इस तरह प्रयोग कर रहे साइबर ठग, जानकर पुलिस भी सन्न

Sat, 13 Dec 2025 11:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 13 Dec 2025 11:58 AM IST
सार

मथुरा के जिन चार गांव से पुलिस ने 37 ठगों को गिरफ्तार किया है, उनके मोबाइल में प्रॉक्सी वीपीएन मिला है। ये अपराधी इसके सहारे अपनी पहचान छुपाते हैं। 

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Proxy VPN Exposed in Cyber Fraud: Mobiles of Accused Sent for Forensic Analysis in Mathura
VPN एप - फोटो : AI

विस्तार

मथुरा के रेड जोन के गांवों के अभियुक्त साइबर ठगी करने के लिए अपने मोबाइल में प्रॉक्सी वीपीएन का सहारा लेते हैं, ताकि वह अपनी पहचान छुपा सकें। देवसेरस से पकड़े गए अभियुक्तों के मोबाइलों को चेक किया गया तो लगभग सभी ने प्रॉक्सी वीपीएन लगा रखे हैं। अब इन मोबाइलों को फोरेंसिक एनालिसिस के लिए भेजा जाएगा।
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प्रॉक्सी और वीपीएन दोनों ही इंटरनेट के ट्रैफिक को किसकी दूसरे सर्वर से रूट करके पहचान को छुपाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वीपीएन पूरे डिवाइस के इंटरनेट कनेक्शन को सुरक्षित करता है। इससे ज्यादा सुरक्षा मिलती है। वहीं प्रॉक्सी एक ऐप के लिए काम करता है और आईपी को छुपाता है। दोनों ही तरीकों से मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि साइबर क्रिमिनल इन दोनों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि आसानी से इन्हें पकड़ा नहीं जा सके।
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इससे सही लोकेशन छुप जाती है। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि पकड़े गए साइबर ठगी के आरोपियों के मोबाइल में प्रॉक्सी वीपीएन का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा, ताकि इनका डेटा सुरक्षित किया जा सके। इससे यह साबित होगा कि उक्त लोग अपने मोबाइलों का इस्तेमाल साइबर ठगी को अंजाम देने में करते रहे हैं। सजा दिलाने में यह साक्ष्य के रूप में काम करेगा।
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संगठित अपराध में पहली कार्रवाई
साइबर ठगी के आरोपियों पर मथुरा में पहली बार गंभीर संगठित अपराध करने की भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111/3 के तहत कार्रवाई की गई है। एसपीआरए सुरेशचंद्र रावत ने बताया कि यह धारा संगठित तरीके से अपराध करके वित्तीय लाभ उठाता है या उकसाता है तो इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि बीएनएस लागू होने के बाद पुलिस ने पहली बार संगठित अपराध करने वाले अभियुक्तों पर लगाई गई है। इसके में पांच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
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