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Mathura News: बरसाना रोप-वे का पहला ट्रायल सफल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jun 2024 04:43 AM IST
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First trial of Barsana ropeway successful
मथुरा। बरसाना रोप-वे परियोजना पहली बार मंगलवार को ट्रायल के तौर पर संचालन में आई। ट्रायल के दौरान दो पेंडोला लगाए गए। इनको नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे के कई चक्कर लगवाए गए। यह सफल रहा है। बुधवार को लोड ट्रायल होगा।
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इन दो पेंडोला में करीब 300-300 किलो रेत की बोरियां लादी जाएंगी। 15 दिन तक इसी प्रकार विभिन्न चरणों में ट्रायल के बाद इसका संचालन श्रद्धालुओं के लिए शुरू किया जाएगा। इसके बाद बरसाना में राधारानी के दर्शन को आने वाले भक्तों को सीढ़ियों चढ़कर जाने की बजाए वैष्णो देवी व मंशा देवी की तर्ज पर रोप-वे के जरिये पहुंचने की सुविधा मिल सकेगी।
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ब्रज की महारानी राधारानी की नगरी बरसाना के ब्रह्माचल पर्वत स्थित लाडली जी मंदिर तक रोप-वे परियोजना 2016 में शुरू हुई थी। इस रोप-वे के जरिये भक्त ऊंचाई का सफर तय करते हुए राधारानी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। धरातल से 48 मीटर ऊंचाई पर स्थित राधारानी मंदिर पहुंचने के लिए भक्तों को सीढि़यों की बजाए रोप-वे से जाना आसान होगा। एमवीडीए के निर्देशन में राधारानी रोप-वे एजेंसी द्वारा दो टावर स्थापित किए गए हैं। एक स्टेशन नीचे जहां से श्रद्धालु पेंडोला में बैठेंगे और दूसरा ऊपर राधारानी मंदिर के समीप बनाया गया है। वहां श्रद्धालु पेंडोला से उतरकर मंदिर की ओर जाएंगे।
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दोनों स्टेशन बनकर पहले ही तैयार हो गए हैं। रोप-वे पर चलने के लिए इंडोनेशिया से 12 पेंडोला लाए गए थे। इनमें छह एक समय में दोनों स्टेशन के बीच चलेंगे, जबकि तीन-तीन दोनों स्टेशनों पर श्रद्धालुओं को उतारने और चढ़ाने के लिए उपयोग में रहेंगे। एक पेंडोला में एक बार में छह श्रद्धालु सफर कर सकेंगे। महज चार मिनट में वह अपना सफर तय कर सकेंगे। एमवीडीए के उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि बरसाना में नीचे से चढ़ाई कराकर श्रीराधारानी मंदिर तक पहुंचाने वाले रोप-वे का मंगलवार को ट्रायल सफलतापूर्वक हुआ।



2016 में शुरू हुई थी परियोजना

2016 में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने बरसाना में रोप-वे के संचालन के लिए राधारानी रोप-वे प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के साथ अनुबंध किया था। करीब 15 करोड़ की यह परियोजना पीपीपी मॉडल पर क्रियान्वित की गई है। आठ वर्ष में विभिन्न प्रकार की बाधाओं के बाद अब यह परियोजना पूरी हो सकी है।




बुजुर्ग और बच्चों को सहूलियत

रोप-वे से सबसे अधिक सहूलियत बुजुर्ग और बच्चों को मिलेगी। वह बिना सीढियां चढ़े ही वे रोप-वे से चंद मिनट में मंदिर तक पहुंच सकेंगे। रोप-वे संचालित करने वाली कंपनी प्रति साल के हिसाब से विकास प्राधिकरण को धनराशि देगी। रोप-वे से यात्री राधारानी के दर्शन के साथ साथ ब्रह्मांचल पर्वत की सुंदरता का भी लुत्फ उठा सकेंगे। हालांकि अभी किराए का निर्धारण नहीं हो सका है। इसके लिए एमवीडीए और प्रशासन की बैठक होगी।
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