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सस्ते में फसल बेचने को मजबूर किसान
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:19 AM IST
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गेेहू ख्ारीद
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मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं की सरकारी खरीद अभी तक जोर नहीं पकड़ सकी है। व्यवस्था का अभाव और कुछ पैसा तत्काल नहीं मिलने के डर से किसान खुले बाजार में कम कीमत पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर है। मंडी में आवक बढ़ने से बिचौलिए सस्ते दामों में गेंहू खरीद रहे हैं।
पिछले रबी सीजन की तरह इस बार भी कृषि प्रधान जिले के करीब दो लाख हेक्टेयर से अधिक रकबा में गेहूं की फसल बोई गई थी। होली के बाद से गेहूं की कटाई शुरू हुई। मूल्य समर्थन योजना के तहत एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद का प्रचार होने के साथ ही मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो गई।
एक सप्ताह से मंडी में रोजाना औसतन 10 से 20 हजार क्विंटल गेहूं की आवक हो रही है। अव्यवस्था के कारण किसान मजबूरी में अपनी फसल आढ़तियों को कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। बताया गया कि अधिकांश क्रय केंद्र पर गेहूं में नमी बताकर किसानों को लौटाया जा रहा है।
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तोल की व्यवस्था तक नहीं
नंदगाव रोड पर पीसीएफ के केंद्र पर शुक्रवार को गेहूं को तोलने के लिए ही कोई व्यवस्था नहीं दिखी। जाहिर है केंद्र पर कोई किसान नहीं था। केंद्र प्रभारी बोले कि 5 अप्रैल को पैसा आया था, अब तक 108 क्विंटल गेंहू खरीदा गया है।
किसान कम आ रहा है
बस स्टैंड पर पीसीएफ के केंद्र पर बताया गया कि 112 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। केंद्र पर कुछ मजदूर तुलाई का काम कर रहे थे। धीमी गति से खरीद होने के बारे में पूछे जाने पर बताया कि अगर किसान आएगा तभी तो गेंहू की खरीद की जाएगी।
खरीद तो हुई पर व्यवस्था नाकाफी
अनाज मंडी में चल रहे केंद्र पर बताया गया कि 240 क्विंटल गेंहू की खरीद की जा चुकी है। केंद्र पर बस कामचलाऊ व्यवस्था थी। न तो किसानों के बैठने का इंतजाम था न पीने के पानी की कोई व्यवस्था। एक-दो किसान गेहूं तुलवा रहे थे। फोटो खींचा जाने लगा तो बैनर टांगा गया।
सरकार की ओर से समूचित व्यवस्था
गेंहू खरीद केंद्रों पर सरकार की ओर से समुचित व्यवस्था की गई है। यदि कोई दिक्कत आ रही है तो निरीक्षण कराकर दूर कराया जाएगा। प्रदेश सरकार हर किसान का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए हर सुविधा मुहैया कराएगी।
- चौधरी लक्ष्मीनारायण, दुग्ध विकास मंत्री
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पिछले रबी सीजन की तरह इस बार भी कृषि प्रधान जिले के करीब दो लाख हेक्टेयर से अधिक रकबा में गेहूं की फसल बोई गई थी। होली के बाद से गेहूं की कटाई शुरू हुई। मूल्य समर्थन योजना के तहत एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद का प्रचार होने के साथ ही मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो गई।
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एक सप्ताह से मंडी में रोजाना औसतन 10 से 20 हजार क्विंटल गेहूं की आवक हो रही है। अव्यवस्था के कारण किसान मजबूरी में अपनी फसल आढ़तियों को कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। बताया गया कि अधिकांश क्रय केंद्र पर गेहूं में नमी बताकर किसानों को लौटाया जा रहा है।
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तोल की व्यवस्था तक नहीं
नंदगाव रोड पर पीसीएफ के केंद्र पर शुक्रवार को गेहूं को तोलने के लिए ही कोई व्यवस्था नहीं दिखी। जाहिर है केंद्र पर कोई किसान नहीं था। केंद्र प्रभारी बोले कि 5 अप्रैल को पैसा आया था, अब तक 108 क्विंटल गेंहू खरीदा गया है।
किसान कम आ रहा है
बस स्टैंड पर पीसीएफ के केंद्र पर बताया गया कि 112 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। केंद्र पर कुछ मजदूर तुलाई का काम कर रहे थे। धीमी गति से खरीद होने के बारे में पूछे जाने पर बताया कि अगर किसान आएगा तभी तो गेंहू की खरीद की जाएगी।
खरीद तो हुई पर व्यवस्था नाकाफी
अनाज मंडी में चल रहे केंद्र पर बताया गया कि 240 क्विंटल गेंहू की खरीद की जा चुकी है। केंद्र पर बस कामचलाऊ व्यवस्था थी। न तो किसानों के बैठने का इंतजाम था न पीने के पानी की कोई व्यवस्था। एक-दो किसान गेहूं तुलवा रहे थे। फोटो खींचा जाने लगा तो बैनर टांगा गया।
सरकार की ओर से समूचित व्यवस्था
गेंहू खरीद केंद्रों पर सरकार की ओर से समुचित व्यवस्था की गई है। यदि कोई दिक्कत आ रही है तो निरीक्षण कराकर दूर कराया जाएगा। प्रदेश सरकार हर किसान का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए हर सुविधा मुहैया कराएगी।
- चौधरी लक्ष्मीनारायण, दुग्ध विकास मंत्री