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सस्ते में ही लुट रहा किसान का धान
Amar Ujala
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:05 PM IST
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सस्ते में ही लूट रहा किसान का धान
- फोटो : Amar Ujala
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नहीं शुरू हुए सरकारी खरीद केंद्र, मंडी में भी नहीं मिला रहा उचित भाव
दीपावली बाद भी रेट नहीं बढ़ने से किसानों में मायूसी
धान के कारोबार के लिए प्रदेश में नामी मंडियों में शामिल कृषि मंडी में धान का कारोबार तो शुरू हुआ, लेकिन दीपावली के बाद धान के रेटों में उछाल की जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी होती नहीं दिख रही। इधर सरकारी क्रय केंद्र शुरू न होने के कारण भी किसान परेशान हैं।
बुधवार को मंडी में सुगंधा, शरबती धान के भाव 15 से 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल पर ही अटक कर रह गए, मोटे धान के भाव में भी कोई उछाल नहीं आया। यह 1300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही अटक कर रह गए। धान के रेट में उछाल नहीं आने के कारण किसान इस बार मायूस दिखाई दे रहा है। मंडी में अभी तक एक भी सरकारी क्रय केंद्र शुरू नहीं हुआ है। धान के कम भावों से किसान अब बाहर की मंडियों के रेटों की भी जानकारी करने लगे हैं। वहां ले जाने का किराया भाड़ा आदि का हिसाब लगाकर किसान देख रहे हैं कि कि बाहर की मंडियों में भेजना कितना लाभकारी रहेगा, लेकिन इस बार बाहर की मंडियों में भी धान के भाव की किसानों को अच्छी खबर नहीं मिल रही है। कोटवन निवासी गंगाराम का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्र मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। सरकार द्वारा अभी तक एक क्विंटल भी धान नहीं खरीदा गया है। खरीदार अपने मन मुताबिक भावों पर धान खरीदकर किसान का शोषण करने में लगे हैं।
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दीपावली बाद भी रेट नहीं बढ़ने से किसानों में मायूसी
धान के कारोबार के लिए प्रदेश में नामी मंडियों में शामिल कृषि मंडी में धान का कारोबार तो शुरू हुआ, लेकिन दीपावली के बाद धान के रेटों में उछाल की जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी होती नहीं दिख रही। इधर सरकारी क्रय केंद्र शुरू न होने के कारण भी किसान परेशान हैं।
बुधवार को मंडी में सुगंधा, शरबती धान के भाव 15 से 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल पर ही अटक कर रह गए, मोटे धान के भाव में भी कोई उछाल नहीं आया। यह 1300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही अटक कर रह गए। धान के रेट में उछाल नहीं आने के कारण किसान इस बार मायूस दिखाई दे रहा है। मंडी में अभी तक एक भी सरकारी क्रय केंद्र शुरू नहीं हुआ है। धान के कम भावों से किसान अब बाहर की मंडियों के रेटों की भी जानकारी करने लगे हैं। वहां ले जाने का किराया भाड़ा आदि का हिसाब लगाकर किसान देख रहे हैं कि कि बाहर की मंडियों में भेजना कितना लाभकारी रहेगा, लेकिन इस बार बाहर की मंडियों में भी धान के भाव की किसानों को अच्छी खबर नहीं मिल रही है। कोटवन निवासी गंगाराम का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्र मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। सरकार द्वारा अभी तक एक क्विंटल भी धान नहीं खरीदा गया है। खरीदार अपने मन मुताबिक भावों पर धान खरीदकर किसान का शोषण करने में लगे हैं।
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