{"_id":"5917507f4f1c1b851885123c","slug":"farmer-s-death-due-to-crop-damage","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसली नुकसान के सदमे से किसान की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसली नुकसान के सदमे से किसान की मौत
मथुरा
Updated Sat, 13 May 2017 11:59 PM IST
विज्ञापन
death
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांव चंदौरी में दो बार कपास की फसल में नुकसान होने के सदमे से किसान की मौत हो गई। गांव के चरन सिंह ने कोतवाली छाता में दी तहरीर में कहा है कि उसके भाई लक्ष्मन ने खेत में दो बार कपास की फसल की बुवाई की थी। दोनों बार नुकसान हुआ। बीज उगा ही नहीं।
चरन ने एसडीएम से मृतक के आश्रितों को किसान दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है। चंदौरी गांव में किसान लक्ष्मण (46 वर्ष) अपने परिवार के साथ जैसे-तैसे बटाई पर जमीन लेकर खेती-किसानी करता था। दो साल से वह कपास की फसल बो रहा था। उसके बीज
उसने बाजार से लिए थे। पिछले साल फसल का एक दाना भी नहीं उगा। लेकिन लक्ष्मन ने आस नहीं छोड़ी, इस साल अच्छी फसल की उम्मीद में उसने दोबारा कपास के बीज बोए। इस बार भी बीज नहीं फूटा। 10 मई को वह निराशा में खेतों में बोए बीजों को निकालकर देख
विज्ञापन
रहा था, इसी दौरान उसकी सदमे से मौत हो गई। परेशान और हताश परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। गमगीन परिजनों का कहना है कि लक्ष्मन ने दो बीघा खेत बटाई पर लिया था। उस पर कोई कर्ज तो नहीं था लेकिन किसानी के अलावा परिवार के पास कमाई का
कोई दूसरा जरिया भी नहीं है। परिजनों का आरोप है कि खेतों पर बीज फूट नहीं रहा था, लक्ष्मन ने वह बीज बाजार से लिए थे। उधर, किसान की दुखद मौत पर किसी भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी व नेताओं के न पहुंचने से ग्रामीणों में काफी रोष है।
विज्ञापन
चरन ने एसडीएम से मृतक के आश्रितों को किसान दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है। चंदौरी गांव में किसान लक्ष्मण (46 वर्ष) अपने परिवार के साथ जैसे-तैसे बटाई पर जमीन लेकर खेती-किसानी करता था। दो साल से वह कपास की फसल बो रहा था। उसके बीज
विज्ञापन
उसने बाजार से लिए थे। पिछले साल फसल का एक दाना भी नहीं उगा। लेकिन लक्ष्मन ने आस नहीं छोड़ी, इस साल अच्छी फसल की उम्मीद में उसने दोबारा कपास के बीज बोए। इस बार भी बीज नहीं फूटा। 10 मई को वह निराशा में खेतों में बोए बीजों को निकालकर देख
विज्ञापन
रहा था, इसी दौरान उसकी सदमे से मौत हो गई। परेशान और हताश परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। गमगीन परिजनों का कहना है कि लक्ष्मन ने दो बीघा खेत बटाई पर लिया था। उस पर कोई कर्ज तो नहीं था लेकिन किसानी के अलावा परिवार के पास कमाई का
कोई दूसरा जरिया भी नहीं है। परिजनों का आरोप है कि खेतों पर बीज फूट नहीं रहा था, लक्ष्मन ने वह बीज बाजार से लिए थे। उधर, किसान की दुखद मौत पर किसी भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी व नेताओं के न पहुंचने से ग्रामीणों में काफी रोष है।