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‘वर्ष भर जारी रहेगा नृसिंह लीला पर शोध’
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 25 May 2016 11:46 PM IST
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गोदा विहार मंदिर में आयोजित आठ दिवसीय प्रदर्शनी का समापन
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से ब्रज संस्कृति शोध संस्थान द्वारा गोदा विहार मंदिर में आयोजित ब्रज की नृसिंह लीला पर एकाग्र आठ दिवसीय प्रदर्शनी का बुधवार को समापन हो गया। यह प्रदर्शनी स्वरूप परियोजना के अंतर्गत आयोजित की गई।
प्रख्यात कलाविद् शुकदेव द्विवेदी ने गाय के गोबर से भगवान नृसिंह और वराह की कृति बनाई। समापन समारोह के दौरान मंदिर श्रीधाम गोदा विहार पीठाधीश्वर स्वामी वृंदावन आचार्य ने कहा यह शोध परियोजना वर्ष भर जारी रहेगी।
इसमें लीला प्रशिक्षण, कार्यशालाएं, कलागुरु सम्मान और डाक टिकिट लोकार्पण आदि कार्यक्रम होंगे। पूरी परियोजना के समापन पर ब्रज की नृसिंह लीला पर पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी। संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा संस्थान ब्रज के इतिहास, पुरातत्व, कला साहित्य और लोक संस्कृति की शोध अकादमी के रूप में कार्य कर रहा है।
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संयोजक डा. राजेश शर्मा ने कहा गोबर के चित्रांकन ब्रज की लोक संस्कृति की अपनी विशिष्टता है। ब्रज की नृसिंह लीला परंपरा और युवा पीढ़ी के मध्य सामंजस्य बैठाने के लिए समय-समय पर ऐसे प्रयोगों होने चाहिए। इस अवसर पर राम नारायण ब्रजवासी, चन्द्रप्रकाश शर्मा, गोविन्द शरण पचौरी, महेश भारद्वाज, मधुमंगल शुक्ला, पंकज वेदपाठी, प्रदीप पाण्डेय आदि उपस्थित थे।
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प्रख्यात कलाविद् शुकदेव द्विवेदी ने गाय के गोबर से भगवान नृसिंह और वराह की कृति बनाई। समापन समारोह के दौरान मंदिर श्रीधाम गोदा विहार पीठाधीश्वर स्वामी वृंदावन आचार्य ने कहा यह शोध परियोजना वर्ष भर जारी रहेगी।
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इसमें लीला प्रशिक्षण, कार्यशालाएं, कलागुरु सम्मान और डाक टिकिट लोकार्पण आदि कार्यक्रम होंगे। पूरी परियोजना के समापन पर ब्रज की नृसिंह लीला पर पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी। संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा संस्थान ब्रज के इतिहास, पुरातत्व, कला साहित्य और लोक संस्कृति की शोध अकादमी के रूप में कार्य कर रहा है।
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संयोजक डा. राजेश शर्मा ने कहा गोबर के चित्रांकन ब्रज की लोक संस्कृति की अपनी विशिष्टता है। ब्रज की नृसिंह लीला परंपरा और युवा पीढ़ी के मध्य सामंजस्य बैठाने के लिए समय-समय पर ऐसे प्रयोगों होने चाहिए। इस अवसर पर राम नारायण ब्रजवासी, चन्द्रप्रकाश शर्मा, गोविन्द शरण पचौरी, महेश भारद्वाज, मधुमंगल शुक्ला, पंकज वेदपाठी, प्रदीप पाण्डेय आदि उपस्थित थे।