{"_id":"68e411c12dd755499f01e217","slug":"excessive-fluoride-in-water-is-weakening-teeth-and-bones-mathura-news-c-369-1-mt11002-137070-2025-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: पानी में फ्लोराइड की अधिकता से दांत व हड्डियां हो रहीं कमजोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: पानी में फ्लोराइड की अधिकता से दांत व हड्डियां हो रहीं कमजोर
विज्ञापन
मथुरा। जिला अस्पताल में मरीजों की दांतों का उपचार करते चिकित्सक।
- फोटो : mathura
मथुरा। पानी में फ्लोराइड की मात्रा ब्रजवासियों को दांत और हड्डियों को कमजोर कर रही है। जिला अस्पताल में रोजाना दांत एवं हड्डी की परेशानी को लेकर 200 से अधिक मरीज आ रहे हैं। चिकित्सक मरीजों का उपचार करने के साथ ही उन्हें स्वच्छ पानी का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस और अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि उनके पास जोड़ों, मांसपेशियों में दर्द के सबसे अधिक मरीज आ रहे हैं। मरीजों को घुटनों और शरीर के जोड़ों में दर्द की शिकायत है। इसके पीछे पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा है। रोजाना 150 के करीब मरीज इस तरह के आते हैं। उनका उपचार तो किया जाता है साथ ही पानी को उबाल कर पीने की सलाह भी दी जाती है।
इसी तरह अस्पताल के दंत चिकित्सक (परामर्श) डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा लोगों के साथ बच्चों के दांतों पर सबसे ज्यादा असर डाल रही है। इसके कारण दांतों का रंग पीला हो रहा है और दांतों पर धब्बे पड़ रहे हैं। साथ ही दांत कमजोर हो रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों का मुंह कम खुलता है, दांतों में कीड़े लग जाते हैं। उन्होंने बताया कि शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के मरीज अधिक संख्या में आते हैं। शहर में लोग आरओ का पानी पीते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी सबमर्सिबल और ट्यूबवेल का पानी पी रहे हैं।
विज्ञापन
अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रवि माहेश्वरी ने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा पानी में अधिक होने से गुर्दे और लीवर भी प्रभावित होता है।
वर्जन
जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में पेयजल के अंदर फ्लोराइड की मात्रा अलग-अलग है। जहां पर खारा पानी है वहां के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। जहां पानी मीठा है वहां ठीक है।
- पंकज यादव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
विज्ञापन
जिला अस्पताल के सीएमएस और अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि उनके पास जोड़ों, मांसपेशियों में दर्द के सबसे अधिक मरीज आ रहे हैं। मरीजों को घुटनों और शरीर के जोड़ों में दर्द की शिकायत है। इसके पीछे पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा है। रोजाना 150 के करीब मरीज इस तरह के आते हैं। उनका उपचार तो किया जाता है साथ ही पानी को उबाल कर पीने की सलाह भी दी जाती है।
विज्ञापन
इसी तरह अस्पताल के दंत चिकित्सक (परामर्श) डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा लोगों के साथ बच्चों के दांतों पर सबसे ज्यादा असर डाल रही है। इसके कारण दांतों का रंग पीला हो रहा है और दांतों पर धब्बे पड़ रहे हैं। साथ ही दांत कमजोर हो रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों का मुंह कम खुलता है, दांतों में कीड़े लग जाते हैं। उन्होंने बताया कि शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के मरीज अधिक संख्या में आते हैं। शहर में लोग आरओ का पानी पीते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी सबमर्सिबल और ट्यूबवेल का पानी पी रहे हैं।
विज्ञापन
अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रवि माहेश्वरी ने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा पानी में अधिक होने से गुर्दे और लीवर भी प्रभावित होता है।
वर्जन
जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में पेयजल के अंदर फ्लोराइड की मात्रा अलग-अलग है। जहां पर खारा पानी है वहां के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। जहां पानी मीठा है वहां ठीक है।
- पंकज यादव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी