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Mathura News: भूतपूर्व सैनिक परिषद का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
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छाता । क्षेत्र की बंद पड़ी छाता शुगर मिल को पुनः चालू कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार से भूतपूर्व सैनिक परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। शुगर मिल पर परिषद के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया। वक्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक मिल का संचालन शुरू नहीं होता, तब तक यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। इसे पूर्व तीन दिन दीपक शर्मा भी मिल के गेट पर अनशन दिए बैठे थे।
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक सूबेदार कर्मयोगी ने सरकार और प्रशासन पर जमकर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुगर मिल के लंबे समय से बंद रहने के कारण क्षेत्र का अन्नदाता किसान और स्थानीय युवा भारी आर्थिक तंगी का सामना करने को विवश हैं। रोजगार और कृषि के मोर्चे पर समूचा क्षेत्र पिछड़ रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। परिषद के अध्यक्ष ने सरकार के समक्ष स्पष्ट विकल्प रखते हुए कहा कि यदि प्रशासन छाता शुगर मिल का संचालन करने में असमर्थ है, तो वहां वैकल्पिक तौर पर अन्य बड़े विकास कार्य कराए जाएं। सरकार यदि शुगर मिल नहीं चलाना चाहती है, तो वह यहां आधुनिक आटा मिल, चावल मिल, एक विशाल खेल स्टेडियम या एम्स जैसी स्वास्थ्य संस्था की स्थापना करे, जिससे स्थानीय आम जनमानस को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सके और क्षेत्र विकास के पथ पर अग्रसर हो सके। धरना-प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के किसानों, युवाओं और पूर्व सैनिकों ने भाग लिया और सरकार से जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की। इस दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और परिषद के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संगठनों और नेताओं का मिला समर्थन
छाता। आंदोलन को लगातार समर्थन मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को करणी सेना के जिला अध्यक्ष कन्हैयालाल अपने समर्थकों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद दीपक शर्मा भी मौके पर पहुंचे और अपनी एकजुटता दिखाई। वहीं, कोसीकलां के पूर्व चेयरमैन नरेंद्र गुर्जर, दिगम्बर चौधरी समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों और समर्थकों का धरने में पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा। सभी ने एक स्वर में शुगर मिल के जल्द संचालन की मांग का समर्थन किया है।
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धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक सूबेदार कर्मयोगी ने सरकार और प्रशासन पर जमकर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुगर मिल के लंबे समय से बंद रहने के कारण क्षेत्र का अन्नदाता किसान और स्थानीय युवा भारी आर्थिक तंगी का सामना करने को विवश हैं। रोजगार और कृषि के मोर्चे पर समूचा क्षेत्र पिछड़ रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। परिषद के अध्यक्ष ने सरकार के समक्ष स्पष्ट विकल्प रखते हुए कहा कि यदि प्रशासन छाता शुगर मिल का संचालन करने में असमर्थ है, तो वहां वैकल्पिक तौर पर अन्य बड़े विकास कार्य कराए जाएं। सरकार यदि शुगर मिल नहीं चलाना चाहती है, तो वह यहां आधुनिक आटा मिल, चावल मिल, एक विशाल खेल स्टेडियम या एम्स जैसी स्वास्थ्य संस्था की स्थापना करे, जिससे स्थानीय आम जनमानस को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सके और क्षेत्र विकास के पथ पर अग्रसर हो सके। धरना-प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के किसानों, युवाओं और पूर्व सैनिकों ने भाग लिया और सरकार से जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की। इस दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और परिषद के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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संगठनों और नेताओं का मिला समर्थन
छाता। आंदोलन को लगातार समर्थन मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को करणी सेना के जिला अध्यक्ष कन्हैयालाल अपने समर्थकों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद दीपक शर्मा भी मौके पर पहुंचे और अपनी एकजुटता दिखाई। वहीं, कोसीकलां के पूर्व चेयरमैन नरेंद्र गुर्जर, दिगम्बर चौधरी समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों और समर्थकों का धरने में पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा। सभी ने एक स्वर में शुगर मिल के जल्द संचालन की मांग का समर्थन किया है।
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