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चीनी से भरे पड़े हैं मिलों के सभी गोदाम
पुनीत शर्मा
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:04 AM IST
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चीनी
- फोटो : demo
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चीनी को लेकर चिंता करने की कतई जरूरत नहीं है। प्रदेश की 116 मिलों के गोदाम चीनी से भरे हुए हैं। पच्चीस लाख मीट्रिक टन चीनी तो पिछले पेराई सत्र की ही पड़ी है जबकि 10 लाख कुंतल चीनी इस साल अभी तक शुरू हुई मिलों ने तैयार कर ली है। अफसरों का कहना है कि चीनी की मांग से अधिक उपलब्धता है लिहाजा रेट बढ़ने की कोई आशंका नहीं है।
प्रदेश में नमक और चीनी की कमी बताकर फैलाई जा रही अफवाहों ने हर शख्स को बेचैन कर दिया है। शुक्रवार की रात में चीनी के उपलब्धता के संबंध में ऐसी अफरातफरी मची कि आगरा, मथुरा, हाथरस, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और गाजियाबाद में कई सौ कुंतल चीनी बिक गई। जबकि हकीकत यह है कि चीनी की कहीं कोई कमी नहीं है।
प्रदेश की 116 मिलों के गोदामों में चीनी भरी पड़ी है। अभी तो पिछले साल का स्टाक भी खत्म नहीं हो पाया है। जबकि मौजूदा पेराई सत्र में शुरू हुई 37 चीनी मिलों ने अभी तक 10 लाख कुंतल चीनी तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि बीस दिसंबर तक ये आंकड़ा चालीस लाख कुंतल तक पहुंच जाएगा। क्योंकि हफ्ते भर में सभी मिलों का चक्का घूम जाएगा। अफसरों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इतना स्टाक है कि दो साल तक भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत जो मिलों की ओर से चीनी दी जाती है वह भी दे दी गई है।
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इस बार होगा चीनी का रिकार्ड उत्पादन
इस बार चीनी का रिकार्ड उत्पादन होगा। क्योंकि प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ गया है। गन्ना बेल्ट में शामिल जनपदों में क्षेत्रफल में दस से पंद्रह फीसदी का इजाफा हो गया है। अगैती गन्ने का रकबा भी पच्चीस फीसदी तक बढ़ा है। पांच नई किस्मों को इस बार किसानों ने लगाया है लिहाजा रिकवरी में भी इजाफा होना तय माना जा रहा है।
चीनी की कहीं कोई कमी नहीं है। लोग अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। तकरीबन पच्चीस लाख मीट्रिक टन चीनी तो पिछले पेराई सत्र की ही मिलों पर मौजूद है। जबकि नवंबर से नया पेराई सत्र भी शुरू हो गया है। चीनी का उत्पादन होने लगा है। दस दिन में सभी मिलें गन्ना खरीद शुरू करने जा रही हैं।
-वीके शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त
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प्रदेश में नमक और चीनी की कमी बताकर फैलाई जा रही अफवाहों ने हर शख्स को बेचैन कर दिया है। शुक्रवार की रात में चीनी के उपलब्धता के संबंध में ऐसी अफरातफरी मची कि आगरा, मथुरा, हाथरस, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और गाजियाबाद में कई सौ कुंतल चीनी बिक गई। जबकि हकीकत यह है कि चीनी की कहीं कोई कमी नहीं है।
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प्रदेश की 116 मिलों के गोदामों में चीनी भरी पड़ी है। अभी तो पिछले साल का स्टाक भी खत्म नहीं हो पाया है। जबकि मौजूदा पेराई सत्र में शुरू हुई 37 चीनी मिलों ने अभी तक 10 लाख कुंतल चीनी तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि बीस दिसंबर तक ये आंकड़ा चालीस लाख कुंतल तक पहुंच जाएगा। क्योंकि हफ्ते भर में सभी मिलों का चक्का घूम जाएगा। अफसरों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इतना स्टाक है कि दो साल तक भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत जो मिलों की ओर से चीनी दी जाती है वह भी दे दी गई है।
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इस बार होगा चीनी का रिकार्ड उत्पादन
इस बार चीनी का रिकार्ड उत्पादन होगा। क्योंकि प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ गया है। गन्ना बेल्ट में शामिल जनपदों में क्षेत्रफल में दस से पंद्रह फीसदी का इजाफा हो गया है। अगैती गन्ने का रकबा भी पच्चीस फीसदी तक बढ़ा है। पांच नई किस्मों को इस बार किसानों ने लगाया है लिहाजा रिकवरी में भी इजाफा होना तय माना जा रहा है।
चीनी की कहीं कोई कमी नहीं है। लोग अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। तकरीबन पच्चीस लाख मीट्रिक टन चीनी तो पिछले पेराई सत्र की ही मिलों पर मौजूद है। जबकि नवंबर से नया पेराई सत्र भी शुरू हो गया है। चीनी का उत्पादन होने लगा है। दस दिन में सभी मिलें गन्ना खरीद शुरू करने जा रही हैं।
-वीके शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त