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Mathura News: इंजीनियर पक्षियों ने जोधपुर झाल को बनाया संसार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 May 2025 12:28 AM IST
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Engineered birds have made Jodhpur Jhal a world
मथुरा। जोधपुर झाल पर बसा है इंजीनियर पक्षियों का संसार। - फोटो : mathura
मथुरा। इंजीनियर पक्षियों ने जोधपुर झाल को अपना संसार बना लिया है। यहां प्रजनन से पहले विभिन्न प्रजातियां इन दिनों अपना घोंसले बना रही हैं। यहां के सैकड़ों पक्षी छुपने के लिए घोंसले का सहारा ले रहे हैं। घोंसला बनाने की अद्भुत कला से इन्हें इंजीनियर के नाम से भी जाना जाता है।
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जोधपुर झाल मथुरा जनपद में फरह के निकट स्थित है। इसे उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा वन विभाग के सहयोग से वेटलैंड्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बेहतर वातावरण के चलते बड़ी संख्या में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां प्रवास करती हैं। बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी (बीआरडीएस) के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल पर बीवर की तीन प्रजातियां बया बीवर, ब्लैक-ब्रस्टेड बीवर और स्ट्रीक्ड बीवर प्रजनक निवासी हैं।
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पशु-पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां अपनी वंशवृद्धि की प्रक्रिया को अपने अपने तरीकों से पूर्ण करती हैं। पक्षियों की बात करें तो जितनी प्रजातियां हैं उनके घोंसले बनाने से लेकर प्रजनन के लिए पालन-पोषण के अलग अलग तौर तरीके हैं। जोधपुर झाल पर बीवर की प्रजातियों की ब्रीडिंग का अध्ययन कर रहे अब्दुल कलाम के अनुसार बीवर प्रजाति का प्रजनन काल जून से सितंबर तक चलता है। बीवर अपने घोंसले जिस तरह बनाते हैं इस कारण इन्हें बुनकर पक्षी भी कहा जाता है। वेटलैंड्स, नहरें और तालाब के पास के स्थलीय वृक्ष घोंसले बनाने के आदर्श स्थल हैं। यह पाम, खजूर, मूंज, कांस, टाइफा घास अथवा धान की लंबी पत्तियों को काटकर आपस में उन्हें बुनते हैं। केवल नर बीवर घोंसले का निर्माण करते हैं। इसमें मिट्टी का भी प्रयोग किया जाता है। घोंसले निर्माण में मानसून व शत्रु पक्षियों से सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है।
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बीवर के घोंसले बनाने की है अद्भुत प्रक्रिया
बया बीवर: ये अपने घोंसले अधिकतर कांटेदार पेड़ो पर बनाते हैं। वेटलैंड्स के नजदीक एवं नहरों के किनारे यह घोंसले बनाना पसंद करते हैं। इनके घोंसले देसी बबूल, खजूर, बेर, सिरिस आदि पेड़ों पर देखे जाते हैं।

ब्लैक-ब्रस्टेड बीवर: इनके घोंसले एक ही जगह पर या आसपास 4 से 8 तक होते हैं। इनके घोंसले कुछ छोटे होते हैं। सामान्य रूप से प्रवेश ट्यूब भी छोटी होती है। यह अपने घोंसलों के लिए दलदली स्थल की टाइफा घास, ईख, मूंज या कांस का चयन करते हैं।

स्ट्रीक्ड बीवर : ये मूंज की पत्तियों को मिलाकर बांधते हैं और लटकते हुए घोंसले बनाते हैं। अधिकतर दूर-दूर ही घोंसले बनाते हैं। टाइफा घास पर भी इनके घोंसले रिकार्ड किए गए हैं।

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वर्जन

जोधपुर झाल पिछले कुछ सालों के दौरान पक्षियों की बेहतर पसंद बन गया है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी प्रवास करते हैं। यहां सभी सुविधाएं पक्षियों के लिए देने की कोशिश हो रही है, जो उनकी जरूरत है। साथ ही विकास को गति दी जा रही है।
-श्याम बहादुर सिंह, सीईओ उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा
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