{"_id":"64dcbec326658d35b60a682a","slug":"elephant-lakshmi-celebrates-tenth-anniversary-of-independence-at-wildlife-sos-in-mathura-2023-08-16","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Mathura: वाइल्डलाइफ एसओएस में हथिनी लक्ष्मी ने मनाई आजादी की 10वीं वर्षगांठ, बेहद मार्मिक है इसकी कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura: वाइल्डलाइफ एसओएस में हथिनी लक्ष्मी ने मनाई आजादी की 10वीं वर्षगांठ, बेहद मार्मिक है इसकी कहानी
Wed, 16 Aug 2023 05:49 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 16 Aug 2023 05:49 PM IST
सार
मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस में हथिनी लक्ष्मी ने आजादी की 10वीं वर्षगांठ मनाई। इसकी कहानी बेहद मार्मिक है। आगे पढ़ें और जानें पूरी कहानी...
विज्ञापन
Mathura: वाइल्डलाइफ एसओएस में हथिनी लक्ष्मी ने मनाई आजादी की 10वीं वर्षगांठ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तीर्थनगरी मथुरा के वाइल्डलाइफ एसओएस स्थित हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र में हथिनी लक्ष्मी ने आजादी की 10वीं वर्षगांठ मनाई। लक्ष्मी को मुंबई से रेस्क्यू करके यहां लाया गया है। मुंबई में लक्ष्मी का जीवन कठिनाई और दुर्व्यवहार से भरी था। उसे उस जीवन से बचाकर यहां लाया गया।
विज्ञापन
लक्ष्मी हथिनी की कहानी क्रूरता पर करुणा की विजय का प्रतीक है। आज उसकी स्वतंत्रता की 10वीं वर्षगांठ का यह पल अत्यधिक महत्वपूर्ण है। लक्ष्मी की उम्र 28 साल से अधिक और लंबाई लगभग 8 फीट है। मुंबई में रेस्क्यू से पहले लक्ष्मी का जीवन दुर्व्यवहार और शोषण की एक दुखद कहानी थी।
विज्ञापन
यह भी पढ़ेंः- Agra News: भाजपा नेता को बाइक सवार हमलावरों ने घर के सामने मारी गोली, दिनदहाड़े हुई वारदात से लोगों में दहशत
विज्ञापन
कैप्टिव हथनी के रूप में उसे मंदिरों के बाहर भिक्षा मांगने के लिए मजबूर किया जाता था। मुंबई की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलते हुए उसके नाजुक पैरों में काफी चोट आईं। उसके आहार में मुख्य रूप से मिठाइयां और तले हुए खाद्य पदार्थ शामिल थे। इससे उसका मोटापा काफी बढ़ गया था।
लक्ष्मी को लोग सड़क पर वड़ा पाव खिलाते थे। खानपान खराब होने की वजह से वह मुश्किल से बिना किसी सहारे के खड़ी हो पाती थी। इस कारण उसका वजन लगभग 1800 किलोग्राम अधिक था। इसके परिणामस्वरूप उसे गंभीर ऑस्टियो आर्थराइटिस और शरीर के अंगों में दर्द होने लगा था।
यह भी पढ़ेंः- मनचले समीर का दुस्साहस: बीच सड़क युवती पर केमिकल फेंकने की कोशिश, बस का शीशा तोड़ा, बजरंगियों ने किया हंगामा
लक्ष्मी को लोग सड़क पर वड़ा पाव खिलाते थे। खानपान खराब होने की वजह से वह मुश्किल से बिना किसी सहारे के खड़ी हो पाती थी। इस कारण उसका वजन लगभग 1800 किलोग्राम अधिक था। इसके परिणामस्वरूप उसे गंभीर ऑस्टियो आर्थराइटिस और शरीर के अंगों में दर्द होने लगा था।
यह भी पढ़ेंः- मनचले समीर का दुस्साहस: बीच सड़क युवती पर केमिकल फेंकने की कोशिश, बस का शीशा तोड़ा, बजरंगियों ने किया हंगामा
2013 में लक्ष्मी को मुंबई से रेस्क्यू किया गया। यह समय उसके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। वाइल्डलाइफ एसओएस के हस्तक्षेप के बाद उसे हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र लाया गया। उस समय उसका वजन लगभग 5,000 किलोग्राम था। इसे कम करना वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और देखभाल करने वालों की समर्पित टीम का उद्देश्य था।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि, 'लक्ष्मी का परिवर्तन जहां एक उत्साह का कारण है, वहीं यह जागरूकता और कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। उसकी कहानी पीड़ा और शोषण के जीवन में मजबूर भीख मांगने वाले हाथियों की दुर्दशा पर प्रकाश डालती है। वाइल्डलाइफ एसओएस कैद में मजबूर हाथियों को बचाने और पुनर्वास करने के अपने मिशन के लिए प्रतिबद्ध है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि, 'लक्ष्मी का परिवर्तन जहां एक उत्साह का कारण है, वहीं यह जागरूकता और कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। उसकी कहानी पीड़ा और शोषण के जीवन में मजबूर भीख मांगने वाले हाथियों की दुर्दशा पर प्रकाश डालती है। वाइल्डलाइफ एसओएस कैद में मजबूर हाथियों को बचाने और पुनर्वास करने के अपने मिशन के लिए प्रतिबद्ध है।