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डिजिटल हस्ताक्षर: 1539 में से महज 155 ने लगाई ऑनलाइन हाजिरी
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मथुरा। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा शुरू किया गया डिजिटल हस्ताक्षर अभियान जनपद में पूरी तरह प्रभावी होता नजर नहीं आ रहा है। स्थिति यह है कि 1539 परिषदीय स्कूलों में से मात्र 155 विद्यालयों ने ही ऑनलाइन हाजिरी लगाई, जबकि शेष 1384 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने अब तक आदेश का पालन नहीं किया है। यही वजह है कि बीएसए ने 1384 प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
सरकार का उद्देश्य डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से शिक्षकों की नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। इसके तहत विद्यालयों में शिक्षकों को निर्धारित एप या पोर्टल के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज करनी थी, लेकिन अभियान शुरू होने के बाद अधिकांश विद्यालयों द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। डिजिटल हाजिरी के विरोध में एक बार फिर से शिक्षक संगठनों आक्रोश भड़क उठा है। जनपद में कई शिक्षक संगठनों इसका विरोध कर रणनीति बनाई है।
ये गिनाईं वजह
विरोध करने वाले शिक्षकों ने तकनीकी समस्याओं, इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी और समय को लेकर इसका विरोध किया है। साथ ही अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन करने की बात कही है। वहीं शिक्षकों का कहना है कि कोई बच्चा अगर स्कूल में बीमार हो गया और उसके अभिभावक बच्चे को ले गए तो काउंटिंग में बच्चों की संख्या कम रह जाएगी। इस पर शिक्षकों पर कार्रवाई होगी। बीएसए रतन कीर्ति का कहना है कि प्रदेश के 60 प्रतिशत से अधिक जनपदों में शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी लगा रहे हैं। विरोध करने लायक इसमें कोई ऐसी समस्या नहीं है। आदेश जारी होने के बाद से कभी 2 या 3 प्रतिशत शिक्षकों ने हाजिरी लगाई है। 10 दिसंबर का डाटा सार्वजनिक किया गया है। अगर ऐसा क्रम जारी रहा तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाने वाले 1384 शिक्षकों के वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
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सरकार का उद्देश्य डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से शिक्षकों की नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। इसके तहत विद्यालयों में शिक्षकों को निर्धारित एप या पोर्टल के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज करनी थी, लेकिन अभियान शुरू होने के बाद अधिकांश विद्यालयों द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। डिजिटल हाजिरी के विरोध में एक बार फिर से शिक्षक संगठनों आक्रोश भड़क उठा है। जनपद में कई शिक्षक संगठनों इसका विरोध कर रणनीति बनाई है।
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ये गिनाईं वजह
विरोध करने वाले शिक्षकों ने तकनीकी समस्याओं, इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी और समय को लेकर इसका विरोध किया है। साथ ही अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन करने की बात कही है। वहीं शिक्षकों का कहना है कि कोई बच्चा अगर स्कूल में बीमार हो गया और उसके अभिभावक बच्चे को ले गए तो काउंटिंग में बच्चों की संख्या कम रह जाएगी। इस पर शिक्षकों पर कार्रवाई होगी। बीएसए रतन कीर्ति का कहना है कि प्रदेश के 60 प्रतिशत से अधिक जनपदों में शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी लगा रहे हैं। विरोध करने लायक इसमें कोई ऐसी समस्या नहीं है। आदेश जारी होने के बाद से कभी 2 या 3 प्रतिशत शिक्षकों ने हाजिरी लगाई है। 10 दिसंबर का डाटा सार्वजनिक किया गया है। अगर ऐसा क्रम जारी रहा तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाने वाले 1384 शिक्षकों के वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
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