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Mathura News: बांकेबिहारी की पुष्प सेवा में भक्तों ने खर्च किए 20 करोड़ से ज्यादा
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मथुरा। हरियाली अमावस्या को फूल बंगला तैयार करता कारीगर।
- फोटो : mathura
वृंदावन। हरियाली अमावस्या पर बृहस्पतिवार को श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। ग्रीष्मकालीन पुष्प सेवा शृंखला के समापन पर आयोजित 218वें फूल बंगला में ठाकुरजी की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। शुक्रवार से ठाकुरजी अब गर्भगृह से दर्शन देंगे।
सावन मास की हरियाली अमावस्या को, मंदिर परिसर और मुख्य गर्भगृह को विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से सजाकर भव्य फूल बंगला सजाया गया। श्रीबांकेबिहारी जी के इस दिव्य शृंगार दर्शन का लाभ लेने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे। सेवायत विप्रांश वल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि चैत्र शुक्ला एकादशी 8 अप्रैल से लेकर हरियाली अमावस्या तक चली पुष्प सेवा शृंखला में भक्तों ने अनुमानित 20 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खुशी-खुशी व्यय की।
उन्होंने बताया कि एक दिन के बंगले की सेवा के लिए भक्तों द्वारा सामान्यतः 8 से 10 लाख रुपये तक खर्च किए गए, वहीं कुछ अत्यंत भव्य और विशालकाय बंगलों में इससे भी अधिक राशि लगी। फूल बंगला शृंखला के समापन पर 218वें बंगले की विशेष छटा रही। मंदिर प्रांगण में महकते पुष्प, भक्ति रस में सराबोर संगीत और भावविभोर भक्तों की उपस्थिति ने इसे एक दिव्य अनुभव में बदल दिया।
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मंदिर प्रशासन के अनुसार, इतने बड़े आयोजन और जनसमूह को संभालने के लिए पुलिस व निजी सुरक्षा कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। विदित हो कि ठाकुर बांकेबिहारी लाल के लिए ग्रीष्मकालीन सेवा में भाग लेने के लिए भक्तजनों की सूची वर्षभर पहले से आरक्षित होती है। सेवा पाना सौभाग्य माना जाता है और भक्तगण इसे अपना जीवन गौरव समझते हैं।
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सावन मास की हरियाली अमावस्या को, मंदिर परिसर और मुख्य गर्भगृह को विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से सजाकर भव्य फूल बंगला सजाया गया। श्रीबांकेबिहारी जी के इस दिव्य शृंगार दर्शन का लाभ लेने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे। सेवायत विप्रांश वल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि चैत्र शुक्ला एकादशी 8 अप्रैल से लेकर हरियाली अमावस्या तक चली पुष्प सेवा शृंखला में भक्तों ने अनुमानित 20 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खुशी-खुशी व्यय की।
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उन्होंने बताया कि एक दिन के बंगले की सेवा के लिए भक्तों द्वारा सामान्यतः 8 से 10 लाख रुपये तक खर्च किए गए, वहीं कुछ अत्यंत भव्य और विशालकाय बंगलों में इससे भी अधिक राशि लगी। फूल बंगला शृंखला के समापन पर 218वें बंगले की विशेष छटा रही। मंदिर प्रांगण में महकते पुष्प, भक्ति रस में सराबोर संगीत और भावविभोर भक्तों की उपस्थिति ने इसे एक दिव्य अनुभव में बदल दिया।
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मंदिर प्रशासन के अनुसार, इतने बड़े आयोजन और जनसमूह को संभालने के लिए पुलिस व निजी सुरक्षा कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। विदित हो कि ठाकुर बांकेबिहारी लाल के लिए ग्रीष्मकालीन सेवा में भाग लेने के लिए भक्तजनों की सूची वर्षभर पहले से आरक्षित होती है। सेवा पाना सौभाग्य माना जाता है और भक्तगण इसे अपना जीवन गौरव समझते हैं।