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Mathura News: आमरण अनशन पर बैठे बुजुर्ग की मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jun 2024 03:30 AM IST
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Death of an elderly man sitting on fast unto death
नौहझील (मथुरा)। क्षेत्र के गांव शंकरगढ़ी में पिछले चार माह से भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन पर बैठे 66 वर्षीय देवकीनंदन शर्मा की मंगलवार देर शाम तबीयत खराब हो गई। परिजन उन्हें सीएचसी ले गए, हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिजन को सौंप दिया।
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इधर, कार्रवाई की मांग को लेकर परिजनों ने शव का दाह संस्कार करने से इन्कार कर दिया। बाद में एसडीएम से बात करने के बाद परिजन मान गए और शव का दाह संस्कार कर दिया।
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देवकीनंदन शर्मा गांव शंकरगढ़ी स्थित मंदिर नगरकोट धाम पर 12 फरवरी से भ्रष्टाचार के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी प्रमुख मांगों में जिला पंचायत राज विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार है। पिछले 13 वर्ष से वे शिकायत, धरना, अनशन, पदयात्रा निकाल रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। आमरण अनशन को लेकर उन्होंने सीएम व प्रधानमंत्री पोर्टल पर भी अवगत कराया था।
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परिजन ने बताया कि नायब तहसीलदार चार माह में तीन बार आईं, मगर देवकीनंदन से बात नहीं की। 10 जून को शाम एसडीएम मांट आदेश कुमार पहुंचे। शरीर का चेकअप कराने और अनशन खत्म करने को कहा। देवकीनंदन ने लिखित में आश्वासन मांगा, जिस पर बात नहीं बनी। मंगलवार देर शाम अचानक देवकीनंदन की तबीयत बिगड़ गई। एंबुलेंस से परिजन बुजुर्ग को नौहझील सीएचसी से मथुरा ले गए। जहां जिला अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
शव गांव पहुंचने पर परिजन डीएम को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। नायब तहसीलदार जयंती मिश्रा, इंस्पेक्टर नौहझील शैलेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर सुरीर संजीव कांत मिश्र पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे, पर परिजन नहीं माने। बाद में एसडीएम मांट आदेश कुमार से बात कराने पर परिजन मान गए। नायब तहसीलदार जयंती मिश्रा ने बताया कि परिजन की फोन पर एसडीएम आदेश कुमार से बात करा दी गई है। नियमानुसार जो भी सहायता होगी परिजन को दिलाई जाएगी।


जिम्मेदारों ने चस्पा कर दिया नोटिस
चार माह से भ्रष्टाचार के खिलाफ बुजुर्ग देवकीनंदन शर्मा अनशन पर बैठे थे। मगर किसी अधिकारी ने उनकी नहीं सुनी। परिजन में एसडीएम व नायब तहसीलदार के खिलाफ रोष व्याप्त था। आरोप लगाया इन्होंने देवकीनंदन व परिजन से ठीक से बात नहीं की। 10 जून को एसडीएम ने जबरन अनशन समाप्त करवाना चाहा। घर पर नोटिस चस्पा कर दिया। इस पर लिखा था कि संज्ञान में आया है कि आपके द्वारा 4-5 माह से बिना अनुमति अपने आवास पर धरना दिया जा रहा है। आपकी मांगें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। प्रशासन पर अनैतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से धरना दिया जा रहा है। नोटिस के माध्यम से निर्देशित किया जाता है कि आप धरने को तत्काल समाप्त करें, अन्यथा कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अनशन पर बैठने के साथ ही देवकीनंदन ने चार माह से अन्न-जल त्याग दिया था। अधिकारियों ने जानकारी के बावजूद इसे हल्के में लिया, जिससे बुजुर्ग की मौत हो गई।
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