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रोई, तड़पी और हमेशा के लिए खामोश हो गई मासूम
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:21 AM IST
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नवजात बच्ची (डमी फाेटाो)
- फोटो : AmarUjala
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दो माह में ही मासूम बच्ची ने पहाड़ जैसे दुख झेल लिए। जन्म के साथ ही उसे मां ने अपने आंचल से दूर कर दिया। पुलिस को सड़क किनारे मिली तो राजकीय शिशु सदन के सुपुर्द कर दिया कि यहां इसकी देखभाल हो जाएगी। लेकिन, यहां न तो इस बच्ची के गीले कपड़े बदले गए और न ही किसी ने केयर की। वह बीमार हो गई। रात भर रोती थी, तड़पती थी और मंगलवार की तड़के वह हमेशा के लिए खामोश हो गई।
13 अक्तूबर की भोर का वक्त था। वृंदावन-मथुरा मार्ग पर एक लाल कपड़े में लिपटी यह मासूम पेड़ के नीचे पड़ी थी। एक किसान की इस पर नजर पड़ी तो उसने पुलिस को सूचना दी। दो सिपाही इस मासूम को लेकर राजकीय शिशु सदन आ गए।
लेकिन यहां तो उसकी इतनी देखभाल भी नहीं हुई जो कोई गीला कपड़ा भी बदल देता। गीले कपड़ों से ठंड उसके सीने में बैठती चली गई। शिशु सदन के रिकार्ड में उसका नाम सिट्टी रख दिया गया था। कई दिन से सिट्टी की तबीयत खराब थी। वह रात को रोती रहती थी। माना जा रहा है कि उसे ठंड लग गई थी। मंगलवार को उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
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निरीक्षण रिपोर्ट के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल यादव ने एक सप्ताह पहले ही राजकीय शिशु सदन का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान लापरवाही मिलने पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यहां तैनात कर्मचारी बच्चों की देखभाल में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। सफाई के अभाव में कई बच्चों के घाव बन गए हैं। बच्चों को शीघ्र उपचार देने के आदेश भी दिए थे, लेकिन इसके बाद भी देखभाल में लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली।
बच्ची का जन्म निर्धारित समय से पहले हो गया था। इसके कारण वह बेहद कमजोर थी। दो माह पहले पुलिस ने शिशु सदन को सौंपा था। रात को अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, सुबह उसे मृत घोषित कर दिया गया।
- ओम प्रकाश, जिला प्रोवेशन अधिकारी
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13 अक्तूबर की भोर का वक्त था। वृंदावन-मथुरा मार्ग पर एक लाल कपड़े में लिपटी यह मासूम पेड़ के नीचे पड़ी थी। एक किसान की इस पर नजर पड़ी तो उसने पुलिस को सूचना दी। दो सिपाही इस मासूम को लेकर राजकीय शिशु सदन आ गए।
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लेकिन यहां तो उसकी इतनी देखभाल भी नहीं हुई जो कोई गीला कपड़ा भी बदल देता। गीले कपड़ों से ठंड उसके सीने में बैठती चली गई। शिशु सदन के रिकार्ड में उसका नाम सिट्टी रख दिया गया था। कई दिन से सिट्टी की तबीयत खराब थी। वह रात को रोती रहती थी। माना जा रहा है कि उसे ठंड लग गई थी। मंगलवार को उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
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निरीक्षण रिपोर्ट के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल यादव ने एक सप्ताह पहले ही राजकीय शिशु सदन का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान लापरवाही मिलने पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यहां तैनात कर्मचारी बच्चों की देखभाल में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। सफाई के अभाव में कई बच्चों के घाव बन गए हैं। बच्चों को शीघ्र उपचार देने के आदेश भी दिए थे, लेकिन इसके बाद भी देखभाल में लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली।
बच्ची का जन्म निर्धारित समय से पहले हो गया था। इसके कारण वह बेहद कमजोर थी। दो माह पहले पुलिस ने शिशु सदन को सौंपा था। रात को अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, सुबह उसे मृत घोषित कर दिया गया।
- ओम प्रकाश, जिला प्रोवेशन अधिकारी