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पितृपक्ष शुरू, यमुना के केशीघाट पर हुआ सामूहिक तर्पण
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वृंदावन पितृपक्ष के पूर्णिमा प्रथम दिन पर ब्राह्मण महासभा द्वारा केसी घाट पर सामूहिक तर्पण करते
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन। पितृ पक्ष की शुरुआत बुधवार से हो गई। पहले दिन ब्राह्मण महासभा ने यमुना के केशीघाट पर सामूहिक तर्पण का आयोजन किया। इस दौरान ब्राह्मणों ने विधिविधान पूर्वक तर्पण करते हुए इसके महत्व पर भी चर्चा की। कर्मकांड दाऊदयाल शर्मा व मनीष शर्मा ने कराया।
ब्राह्मण महासभा के संस्थापक सुरेश चंद्र शर्मा और ब्राह्मण सेवा संघ के संस्थापक चंद्रलाल शर्मा ने कहा कि अश्वनी मास में कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृपक्ष के नाम से विख्यात हैं। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा से है। पितृपक्ष में श्राद्ध तो मुख्य तिथियों पर ही किया जाता है, लेकिन तर्पण प्रतिदिन किया जाता है। श्राद्ध के लिए सबसे पवित्र स्थान गया तीर्थ माना गया है, लेकिन श्रीधाम वृंदावन में केशीघाट पर पितरों को जल तर्पण करने का अपना अलग महत्व है। ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आंनद वल्लभ गोस्वामी व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पं. महेश भारद्वाज ने भी विचार रखे। श्रीहरि सुरेशाचार्य, गोपाल शरण शर्मा, पार्षद जय शर्मा, सतीश चंद्र पाराशर, राजेश कृष्ण शर्मा, अलौकिक शर्मा, रमाशंकर शास्त्री, गोविंद बौहरे, चुनमुन शर्मा, डिंपल किशोर गोस्वामी, संदीप शास्त्री, विनायक भारद्वाज, राजेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
विश्व जागरण मानव सेवा संघ ने भी श्राद्ध पक्ष की शुरुआत पर निराश्रित, असहाय, निर्धन, वृद्ध महिलाओं को खाद्य सामग्री वितरण की। मुख्य सचिव रामदेव शास्त्री ने बताया कि पितृपक्ष में पूर्वजों की याद में मानवता की सेवा करनी चाहिए। चंद्रभान त्यागी, रोबिन तिवारी, उमेश राजेश गुप्ता, सुमन मिश्रा, विक्रम पांडे आदि उपस्थित रहे।
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यमुना के घाटों पर पितरों को किया तर्पण
मथुरा। पितृपक्ष के 15 दिनों तक पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाएगा। घर-घर में ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दी जाएगी। 17 सितंबर को पितृ पक्ष का समापन होगा। पूर्णिमा के अवसर पर यमुना घाटों पर पितरों के प्रति श्रद्धा भाव रखते हुए उन्हें तर्पण किया गया।
आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार यह 15 दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं। समयानुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है। इसलिए पितरों का तर्पण हर स्थिति में करना चाहिए। जो व्यक्ति नितांत गरीब हैं वो तिल, जौ, चावलयुक्त जल से तिलांजलि देकर भी पितरों को संतुष्ट कर सकते हैं। यदि यह भी न हो तो दक्षिण दिशा की ओर मुख कर के श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करें तो भी पितृ संतुष्ट होते हैं। पूर्णिमा के अवसर पर यमुना घाट पर पितरों के प्रति श्रद्धा का भाव रखते हुए उन्हें तर्पण किया गया।
घर पर भोजन करने में संकोच कर रहे ब्राह्मण
कोरोना महामारी का असर पितृपक्ष पर भी दिख रहा है। इस बार श्राद्धकर्ता व ब्राह्मण दोनों में संकोच की स्थिति बनी हुई है। श्राद्धकर्ता ब्राह्मण को निमंत्रित करने में और ब्राह्मण निमंत्रण स्वीकार करने में हिचकिचा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस बार सिर्फ एक ब्राह्मण को बुलाया जाए या फिर ब्राह्मण के घर पर ही कच्चा राशन भिजवाएं। पं. अमित भारद्वाज ने बताया कि ऐसी स्थिति में यदि ब्राह्मण की व्यवस्था न हो तो श्राद्धकर्ता गो ग्रास व पंचक राशि निकालने के बाद एक ब्राह्मण के निमित्त वाला भोजन गाय को खिलाया जा सकता है।
अतृप्त आत्माओं के लिए किया तर्पण
मथुरस्थ सर्वकर्म पांडित्य समिति की ओर से अज्ञात अतृप्त आत्माओं के लिए स्वामीघाट पर तर्पण किया गया। इसके तहत जौ, तिल, यव व कुश के साथ जल दान किया गया। सचिव पं. गोपालाचार्य ने बताया कि समिति परमार्थ के लिए यह कार्य एक दशक से करती आ रही है। कोषाध्यक्ष पं. कृष्णदत्त शास्त्री ने बताया कि जौ, तिल, चावल व कुश के साथ दिया जल ही पितृ ग्रहण करते हैं। संस्था अध्यक्ष राधे बाबा ने पदाधिकारियों के साथ कोरोना की मुक्ति के लिए भगवान श्री हरि से प्रार्थना की, संस्था के मंत्री ने सभी का धन्यवाद किया। कन्हैया लाल शर्मा, विपुल पारीक, संदीप आचार्य, अंकित शर्मा, प्रभूदयाल शर्मा थे।
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ब्राह्मण महासभा के संस्थापक सुरेश चंद्र शर्मा और ब्राह्मण सेवा संघ के संस्थापक चंद्रलाल शर्मा ने कहा कि अश्वनी मास में कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृपक्ष के नाम से विख्यात हैं। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा से है। पितृपक्ष में श्राद्ध तो मुख्य तिथियों पर ही किया जाता है, लेकिन तर्पण प्रतिदिन किया जाता है। श्राद्ध के लिए सबसे पवित्र स्थान गया तीर्थ माना गया है, लेकिन श्रीधाम वृंदावन में केशीघाट पर पितरों को जल तर्पण करने का अपना अलग महत्व है। ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आंनद वल्लभ गोस्वामी व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पं. महेश भारद्वाज ने भी विचार रखे। श्रीहरि सुरेशाचार्य, गोपाल शरण शर्मा, पार्षद जय शर्मा, सतीश चंद्र पाराशर, राजेश कृष्ण शर्मा, अलौकिक शर्मा, रमाशंकर शास्त्री, गोविंद बौहरे, चुनमुन शर्मा, डिंपल किशोर गोस्वामी, संदीप शास्त्री, विनायक भारद्वाज, राजेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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विश्व जागरण मानव सेवा संघ ने भी श्राद्ध पक्ष की शुरुआत पर निराश्रित, असहाय, निर्धन, वृद्ध महिलाओं को खाद्य सामग्री वितरण की। मुख्य सचिव रामदेव शास्त्री ने बताया कि पितृपक्ष में पूर्वजों की याद में मानवता की सेवा करनी चाहिए। चंद्रभान त्यागी, रोबिन तिवारी, उमेश राजेश गुप्ता, सुमन मिश्रा, विक्रम पांडे आदि उपस्थित रहे।
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यमुना के घाटों पर पितरों को किया तर्पण
मथुरा। पितृपक्ष के 15 दिनों तक पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाएगा। घर-घर में ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दी जाएगी। 17 सितंबर को पितृ पक्ष का समापन होगा। पूर्णिमा के अवसर पर यमुना घाटों पर पितरों के प्रति श्रद्धा भाव रखते हुए उन्हें तर्पण किया गया।
आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार यह 15 दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं। समयानुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है। इसलिए पितरों का तर्पण हर स्थिति में करना चाहिए। जो व्यक्ति नितांत गरीब हैं वो तिल, जौ, चावलयुक्त जल से तिलांजलि देकर भी पितरों को संतुष्ट कर सकते हैं। यदि यह भी न हो तो दक्षिण दिशा की ओर मुख कर के श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करें तो भी पितृ संतुष्ट होते हैं। पूर्णिमा के अवसर पर यमुना घाट पर पितरों के प्रति श्रद्धा का भाव रखते हुए उन्हें तर्पण किया गया।
घर पर भोजन करने में संकोच कर रहे ब्राह्मण
कोरोना महामारी का असर पितृपक्ष पर भी दिख रहा है। इस बार श्राद्धकर्ता व ब्राह्मण दोनों में संकोच की स्थिति बनी हुई है। श्राद्धकर्ता ब्राह्मण को निमंत्रित करने में और ब्राह्मण निमंत्रण स्वीकार करने में हिचकिचा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस बार सिर्फ एक ब्राह्मण को बुलाया जाए या फिर ब्राह्मण के घर पर ही कच्चा राशन भिजवाएं। पं. अमित भारद्वाज ने बताया कि ऐसी स्थिति में यदि ब्राह्मण की व्यवस्था न हो तो श्राद्धकर्ता गो ग्रास व पंचक राशि निकालने के बाद एक ब्राह्मण के निमित्त वाला भोजन गाय को खिलाया जा सकता है।
अतृप्त आत्माओं के लिए किया तर्पण
मथुरस्थ सर्वकर्म पांडित्य समिति की ओर से अज्ञात अतृप्त आत्माओं के लिए स्वामीघाट पर तर्पण किया गया। इसके तहत जौ, तिल, यव व कुश के साथ जल दान किया गया। सचिव पं. गोपालाचार्य ने बताया कि समिति परमार्थ के लिए यह कार्य एक दशक से करती आ रही है। कोषाध्यक्ष पं. कृष्णदत्त शास्त्री ने बताया कि जौ, तिल, चावल व कुश के साथ दिया जल ही पितृ ग्रहण करते हैं। संस्था अध्यक्ष राधे बाबा ने पदाधिकारियों के साथ कोरोना की मुक्ति के लिए भगवान श्री हरि से प्रार्थना की, संस्था के मंत्री ने सभी का धन्यवाद किया। कन्हैया लाल शर्मा, विपुल पारीक, संदीप आचार्य, अंकित शर्मा, प्रभूदयाल शर्मा थे।