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ख्वाबों में चिल्लाते थे, नोट बदलो..नोट बदलो
पुनीत शर्मा
Updated Mon, 05 Dec 2016 10:39 PM IST
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रात को सही से सो नहीं पा रहे थे। ख्वाबों में नोट बदलो..नोट बदलो चिल्लाने लगते और अचानक हड़बड़ाकर उठ जाते। पहले बड़े हंसमुख थे। परिवार के सभी सदस्यों के साथ बात करते थे मगर अचानक इन्हें एकांत अच्छा लगने लगा था। यहां पत्नियों ने इन्हें सहारा दिया। हिम्मत बंधाई। समझाया तो यह संभल गए। कारोबार में हुए घाटे से कई तो डिप्रेशन में चले गए थे मगर जब जीवन साथी ने इन्हें सहारा दिया तो फिर से नए जोश और उमंग के साथ काम में जुट गए हैं।
आठ नवंबर को 1000 और 500 के नोट बंद होने के साथ ही काफी लोग तनाव में चले गए थे। कोई कारोबार की चिंता के चलते अवसाद में घिर गया तो किसी को बेटी की शादी के इंतजाम ने बेचैन कर दिया। किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था तो कोई अवसाद में घिर रहा था। ऐसे में अपनों ने इन्हें सहारा दिया। कहीं मनोचिकित्सक के ट्रीटमेंट चला तो कहीं फिजिशियन का। अब यह आहिस्ता आहिस्ता स्वस्थ हो रहे हैं।
केस वन: मथुरा शहर के एक कारोबारी 15 दिसंबर के बाद से बीमार हो गए हैं। अचानक घबराहट बढ़ जाती है। नींद नहीं आती। हर वक्त एकांत में बैठे रहते। उनकी पत्नी उन्हें लेकर मनोचिकित्सक के पास गईं। वह अब नियमित ट्रीटमेंट ले रहे हैं। वह भी अपने नोटों को बदलवाने को लेकर बेचैन हो गए थे। मगर जब विकल्प सामने आए तो कारोबार की गाड़ी फिर से पटरी पर आ गई है।
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केस दो: एक कारोबारी ने तो अचानक बात करते-करते अपना महंगा मोबाइल तोड़ दिया था। इतने चिड़चिड़े हो गए कि जरा-जरा सी बात पर घरवालों से झगड़ा करते। घर में क्लेश होने लगा। वह भी मनोचिकित्सक से अपना इलाज करा रहे हैं। परिवार वालों ने हिम्मत बंधाई। बताया कि नोट आसानी से बदले जा सकते हैं। सभी ने इसमें मदद भी की तो सब सामान्य हो गया।
केस तीन: एक व्यापारी की बेटी की शादी बीस दिसंबर को है। लेकिन पैसे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। जो पैसा शादी के लिए रखा हुआ था वह अब चल नहीं रहा। बाजार में भी उसे लोग ले नहीं रहे हैं। व्यापारी परेशान हो गया। स्ट्रेस का लेवल बढ़ गया। कैशलेस विवाह के लिए जब लड़के वालों से बात हुई तो टेंशन दूर हुई।
टेंशन और ब्लड प्रेशर के मरीज गए थे
सरल हेल्थ केयर के चिकित्सक डा. आशीष गोपाल का कहना है कि नोटबंदी के बाद के दिनों में एंग्जाइटी और ब्लड प्रेशर के मरीज बढ़ गए थे। ओपीडी में संख्या निरंतर बढ़ी। कई तो मरीज ऐसे भी आ रहे थे जिनका ब्लड प्रेशर पहले कंट्रोल रहता था लेकिन अब बढ़ गया था। लेकिन नियमित ट्रीटमेंट के बाद सब सामान्य है। वैसे भी जब अपने सहयोग करते हैं तो हर टेंशन समाप्त हो जाती है।
स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़े हैं
कृष्णा नगर में विपिन नर्सिंग होम के स्वामी सीनियर फिजिशयन डा. विपिन का कहना है कि इन दिनों स्ट्रेस के रोगी बढ़े थे। जब नर्सिंग होम में आए तो परिवार वालों से कहा गया कि इन्हें समझाएं। यह तनाव न लें। तो आहिस्ता-आहिस्ता स्थिति सामान्य हो गई।
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आठ नवंबर को 1000 और 500 के नोट बंद होने के साथ ही काफी लोग तनाव में चले गए थे। कोई कारोबार की चिंता के चलते अवसाद में घिर गया तो किसी को बेटी की शादी के इंतजाम ने बेचैन कर दिया। किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था तो कोई अवसाद में घिर रहा था। ऐसे में अपनों ने इन्हें सहारा दिया। कहीं मनोचिकित्सक के ट्रीटमेंट चला तो कहीं फिजिशियन का। अब यह आहिस्ता आहिस्ता स्वस्थ हो रहे हैं।
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केस वन: मथुरा शहर के एक कारोबारी 15 दिसंबर के बाद से बीमार हो गए हैं। अचानक घबराहट बढ़ जाती है। नींद नहीं आती। हर वक्त एकांत में बैठे रहते। उनकी पत्नी उन्हें लेकर मनोचिकित्सक के पास गईं। वह अब नियमित ट्रीटमेंट ले रहे हैं। वह भी अपने नोटों को बदलवाने को लेकर बेचैन हो गए थे। मगर जब विकल्प सामने आए तो कारोबार की गाड़ी फिर से पटरी पर आ गई है।
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केस दो: एक कारोबारी ने तो अचानक बात करते-करते अपना महंगा मोबाइल तोड़ दिया था। इतने चिड़चिड़े हो गए कि जरा-जरा सी बात पर घरवालों से झगड़ा करते। घर में क्लेश होने लगा। वह भी मनोचिकित्सक से अपना इलाज करा रहे हैं। परिवार वालों ने हिम्मत बंधाई। बताया कि नोट आसानी से बदले जा सकते हैं। सभी ने इसमें मदद भी की तो सब सामान्य हो गया।
केस तीन: एक व्यापारी की बेटी की शादी बीस दिसंबर को है। लेकिन पैसे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। जो पैसा शादी के लिए रखा हुआ था वह अब चल नहीं रहा। बाजार में भी उसे लोग ले नहीं रहे हैं। व्यापारी परेशान हो गया। स्ट्रेस का लेवल बढ़ गया। कैशलेस विवाह के लिए जब लड़के वालों से बात हुई तो टेंशन दूर हुई।
टेंशन और ब्लड प्रेशर के मरीज गए थे
सरल हेल्थ केयर के चिकित्सक डा. आशीष गोपाल का कहना है कि नोटबंदी के बाद के दिनों में एंग्जाइटी और ब्लड प्रेशर के मरीज बढ़ गए थे। ओपीडी में संख्या निरंतर बढ़ी। कई तो मरीज ऐसे भी आ रहे थे जिनका ब्लड प्रेशर पहले कंट्रोल रहता था लेकिन अब बढ़ गया था। लेकिन नियमित ट्रीटमेंट के बाद सब सामान्य है। वैसे भी जब अपने सहयोग करते हैं तो हर टेंशन समाप्त हो जाती है।
स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़े हैं
कृष्णा नगर में विपिन नर्सिंग होम के स्वामी सीनियर फिजिशयन डा. विपिन का कहना है कि इन दिनों स्ट्रेस के रोगी बढ़े थे। जब नर्सिंग होम में आए तो परिवार वालों से कहा गया कि इन्हें समझाएं। यह तनाव न लें। तो आहिस्ता-आहिस्ता स्थिति सामान्य हो गई।