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झोलाछाप के इलाज से महिला की मौत

Sun, 11 Jan 2015 12:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/फरह
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/फरह Updated Sun, 11 Jan 2015 12:08 AM IST
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woman died after wrong vaccination in mathura
थाना फरह के गांव बेरी में नीम हकीम के इलाज ने महिला की जान ले ली। गांव बेरी की एक महिला ने शनिवार तड़के पेट दर्द की शिकायत की। परिवारीजनों ने गांव में क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप से पेट दर्द का इलाज कराया। इलाज में चिकित्सक ने महिला को इंजेक्शन लगाया और कुछ गोलियां खाने को दी थ्ाी।
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आरोप है कि इंजेक्शन लगने के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। इस पर चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिए। महिला को परिवारीजन मथुरा अस्पताल लाने लगे। रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। दोपहर में महिला का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले में परिवारीजनों ने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी से शिकायत की है।
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लाचारी, लापरवाही और झोलाछाप इलाज
जनपद के फरह क्षेत्र में एक बार फिर झोलाछाप चिकित्सकीय सेवा का शिकार एक महिला बनी है। यह पहली बार नहीं है जब झोलाछाप के इलाज ने किसी की जान ली हो। लेकिन देहात में पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने के चलते तीमारदार लाचार हैं तो सब कुछ जानकर भी अफसर लापरवाह बने हुए हैं। नतीजा झोलाछाप इलाज के बाद मरीजों की मौत के रूप में सामने आता है।
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सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर भरपूर खर्च की बात करे लेकिन ग्रामीण अंचल में इनका पूरी तरह से अभाव है। इसका आंकलन सरकारी और निजी चिकित्सकों की संख्या से सहज लगाया जा सकता है। जनपद में करीब 300 सरकारी और निजी चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें से ग्रामीण अंचल में सेवा देने वालों की संख्या अंगुलियों पर गिनने वाली है। जिसके चलते ग्रामीण अंचल की चिकित्सकीय सेवा झोलाछाप के हवाले रहती हैं। जिले में करीब छह साल पहले झोलाछाप का सर्वे कराया गया था। उस वक्त इनकी संख्या 1200 के सामने आई थी। सरकारी तौर पर कोई अंकुश न लगाने के कारण अब यह संख्या दो हजार से ऊपर जा पहुंची है। इनकी बहुतायत फरह और मांट क्षेत्र में है।

देहात में नहीं पहुंचते चिकित्सक
जनपद में सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन केंद्रों पर तैनात चिकित्सकों की मौजूदगी की अक्सर शिकायत रहती है। ऐसे में इलाज के लिए मरीज झोलाछाप के पास जाते हैं।

108 के मुकाबले 80 डाक्टर
जनपद की सरकारी स्वास्थ्य सेवा के लिए चिकित्सकों के 108 पद स्वीकृत हैं। इनमें से तैनाती सिर्फ 80 के आसपास है। उसमें भी ज्यादातर महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में हैं। ग्रामीण अंचल के अस्पताल में अधिकांश पद खाली हैं।


गांव में निजी अस्पताल भी नहीं
निजी चिकित्सालयों की संख्या शहरी क्षेत्रों में ही ज्यादा है। इसके अलावा कुछ निजी चिकित्सालय ग्रामीण अंचल के बडे़ कस्बों में हैं। बाकी जगह इनका अभाव है।
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