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जिला कारागार में बढ़ाई निगरानी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 20 Sep 2016 12:13 AM IST
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जिला जेल
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सजायाफ्ता कैदी की मौत के बाद जिला कारागार में बंदियों और कैदियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। सोमवार को डीआईजी जेल फिर जिला कारागार पहुंचे और बैरकों का निरीक्षण किया।
हत्या के आरोप में सजायाफ्ता कैदी ब्रजनंदन की रविवार की शाम मौत के बाद जेल में गतिविधियां काफी बढ़ी रहीं। सोमवार को एक बार फिर डीआईजी जेल शरद कुलश्रेष्ठ जिला कारागार पहुंचे। यहां पर उन्होंने एक अस्पताल में बंद 12 बंदियों के बयान लिए। छह से अधिक कर्मचारियों और अफसरों के भी बयान लिए।
सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक डीआईजी जेल जिला कारागार में रहे। इस दौरान उन्होंने बैरकों का निरीक्षण भी किया। हालांकि कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। उन्होंने और अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बाद में एक बार फिर जेल की बैरकों का निरीक्षण किया और बंदियों, कैदियों का हाल जाना। वहीं सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव भी जिला कारागार में पहुंचे और डीएम नितिन बंसल को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
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जेल प्रशासन ही करता है काउंसिलिंग
जिला कारागार में 375 सजायाफ्ता कैदी हैं। जिला कारागार प्रशासन काउंसिलिंग करता रहता है। बताया गया कि बाहर से तो कोई काउंसलर नहीं बुलाया जाता लेकिन जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर, चीफ, नंबरदार ऐसे कैदियों से बातचीत करते रहते हैं। जिससे कि कोई डिप्रेशन में नहीं आए। इधर अपर पुलिस महानिदेशक गोपाल लाल मीणा की ओर से एक सर्कुलर भी आया है जिसमें कैदियों और बंदियों की काउंसिलिंग किसी एनजीओ के काउंसलर से कराने के निर्देश हैं। इसमें जमानत खारिज होने वाले कैदियों की पूरी निगरानी की बात भी कही गई है।
जी का जंजाल बने प्वाइंट हटाए जाएंगे
प्रदेश की जेलों में ऐसे प्वाइंटों को हटाया जाएगा, जिससे किसी की जान को खतरा पैदा हो। अपर पुलिस महानिदेशक गोपाल लाल मीणा के इस संबंध में आदेश मिलने के बाद जिला कारागार में ऐसे प्वाइंट को चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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हत्या के आरोप में सजायाफ्ता कैदी ब्रजनंदन की रविवार की शाम मौत के बाद जेल में गतिविधियां काफी बढ़ी रहीं। सोमवार को एक बार फिर डीआईजी जेल शरद कुलश्रेष्ठ जिला कारागार पहुंचे। यहां पर उन्होंने एक अस्पताल में बंद 12 बंदियों के बयान लिए। छह से अधिक कर्मचारियों और अफसरों के भी बयान लिए।
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सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक डीआईजी जेल जिला कारागार में रहे। इस दौरान उन्होंने बैरकों का निरीक्षण भी किया। हालांकि कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। उन्होंने और अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बाद में एक बार फिर जेल की बैरकों का निरीक्षण किया और बंदियों, कैदियों का हाल जाना। वहीं सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव भी जिला कारागार में पहुंचे और डीएम नितिन बंसल को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
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जेल प्रशासन ही करता है काउंसिलिंग
जिला कारागार में 375 सजायाफ्ता कैदी हैं। जिला कारागार प्रशासन काउंसिलिंग करता रहता है। बताया गया कि बाहर से तो कोई काउंसलर नहीं बुलाया जाता लेकिन जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर, चीफ, नंबरदार ऐसे कैदियों से बातचीत करते रहते हैं। जिससे कि कोई डिप्रेशन में नहीं आए। इधर अपर पुलिस महानिदेशक गोपाल लाल मीणा की ओर से एक सर्कुलर भी आया है जिसमें कैदियों और बंदियों की काउंसिलिंग किसी एनजीओ के काउंसलर से कराने के निर्देश हैं। इसमें जमानत खारिज होने वाले कैदियों की पूरी निगरानी की बात भी कही गई है।
जी का जंजाल बने प्वाइंट हटाए जाएंगे
प्रदेश की जेलों में ऐसे प्वाइंटों को हटाया जाएगा, जिससे किसी की जान को खतरा पैदा हो। अपर पुलिस महानिदेशक गोपाल लाल मीणा के इस संबंध में आदेश मिलने के बाद जिला कारागार में ऐसे प्वाइंट को चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।