फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   theft oil supplied during election

चुनावों में कई जिलों को सप्लाई हुआ चोरी का तेल

Mon, 27 Mar 2017 12:43 AM IST
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा Updated Mon, 27 Mar 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
theft oil supplied during election
तेल माफिया मनोज गोयल - फोटो : अमर उजाला
विधानसभा चुनावों में चोरी का तेल प्रदेश के कई जिलों को सप्लाई किया गया। 80 से भी ज्यादा ऐसे टैंकर थे जो रातों को तेल लेकर निकलते थे। सभी टैंकरों पर पेट्रोलियम कंपनियों का नाम लिखा होता था, जिससे कोई शक न कर सके। बताया जाता है कि कुछ जगहों से तो अभी तक तेल का पैसा भी नहीं मिल सका है। तेल माफिया मनोज गोयल की गिरफ्तारी से इसका खुलासा हुआ है।
विज्ञापन


मथुरा रिफाइनरी से जालंधर को जाने वाली पाइप लाइन में सेंधमारी करके तकरीबन 100 करोड़ का तेल चोरी किया गया। हाईवे थाना क्षेत्र में आरकेपुरम कालोनी के पास पाइप लाइन में सेंधमारी का खुलासा 18 फरवरी को हुआ था। 
विज्ञापन


सबसे बड़ी तेल चोरी के इस मामले में पुलिस ने तेल माफिया मनोज गोयल को गिरफ्तार करके जो नेटवर्क का पर्दाफाश किया है उसके मुताबिक खुलासे के पिछले 18 महीनों से तेल की चोरी की जा रही थी। तेल चोरी के इस ‘खेल’ में पचास से भी ज्यादा लोग शामिल हैं। बताया जाता है कि चोरी के तेल की सप्लाई आगरा में सबसे ज्यादा की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके साथ ही मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, बदायूं, बुलंदशहर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में तेल बेचा गया। क्योंकि चुनावों में तेल की खपत ज्यादा होती है लिहाजा उस दौरान चोरी के तेल की डिमांड खूब रही थी। मनोज गोयल ने अपने करीबी सियासी लोगों को खूब तेल सप्लाई किया। एक फोन पर टैंकर के टैंकर उपलब्ध करा दिए जाते थे। खुलासा करने वाली टीम का कहना है कि तेल सप्लाई के लिए करीब 40 टैंकर किराए पर ले रखे थे। इन सभी टैंकरों पर अवैध तरीके से पेट्रोलियम कंपनियों के नाम दर्ज करा लिए गए थे।    


अफसरों की दोस्ती और सियासी ताल्लुकात बचाते रहे मनोज को
तेल माफिया मनोज गोयल के अफसरों के साथ खासे संबंध हैं। सियासी रिश्ते भी मजबूत हैं। सरकार किसी भी पार्टी की हो मनोज अपने रिश्ते कायम कर ही लेता था। यही वजह है कि पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। 17 फरवरी को तेल चोरी के मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई थी, जबकि मनोज को पकड़ा जा सका 26 मार्च को। इतने लंबे समय तक पुलिस पकड़ से दूर रहने की वजह भी अफसरों से संबंध ही बताए जा रहे हैं। इस बीच सियासी रिश्तों का भी लाभ उसने उठाया। बताया जाता है कि उसकी गिरफ्तारी के पीछे भी ‘सेटिंग’ ही बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारियों के कहने पर ही वह पुलिस के पास खुद पहुंच गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed