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एक दरोगा, तीन सिपाही के हवाले एक्सप्रेसवे की सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो, मथुरा
Updated Tue, 18 Apr 2017 11:37 PM IST
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नोएडा से आगरा तक जाने वाले यमुना एक्सप्रेसवे की सुरक्षा भी शिफ्टों में हो रही है। सात थानों ने मिलकर खुद ही शेड्यूल बना लिया है। सप्ताह में एक दिन एक थाने की पुलिस करती है गश्त। टप्पल बार्डर से आगरा बॉर्डर तक केवल एक दरोगा तीन सिपाही गश्त करते हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे की सुरक्षा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। मथुरा जिले में एक्सप्रेसवे पर मांट, सुरीर, नौहझील, बलदेव, राया, जमुुनापार और महावन थाने पड़ते हैं। कायदे में हर थाने को अपने-अपने क्षेत्र में पुलिस की ड्यूटी लगानी चाहिए। लेकिन इन थानों ने खुद ही ड्यूटी शिफ्ट का चार्ट बना डाला है। सप्ताह में एक दिन एक थाने की ड्यूटी रहती है।
ड्यूटी में भी केवल एक दरोगा और तीन सिपाही लगाए जा रहे हैं। जबकि बीस से भी ज्यादा प्वाइंट संवेदनशील हैं। अब टप्पल बार्डर से आगरा बॉर्डर तक एक दरोगा, तीन सिपाही भला क्या गश्त करते होंगे। अफसरों का कहना है कि यूपी 100 की भी दो गाड़ियां रहती हैं। लेकिन इनके प्वाइंट फिक्स नहीं होते हैं।
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कुल मिलाकर रफ्तार के इस बड़े प्रोजेक्ट की सुरक्षा बहुत कम है। सर्विस रोड पर तो कहीं पुलिस नजर आती ही नहीं है। जबकि एक्सप्रेसवे के बगल से निकलने वाली सर्विस रोड पर ही बदमाश वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। लूटपाट करने के बाद बदमाश आसानी के साथ फरार हो जाते हैं और पुलिस को कानोंकान खबर तक नहीं होती।
मोटा टोल और सुविधाएं गोल
यमुना एक्सप्रेसवे पर खंदौली, मांट और जेवर पर टोल वसूला जाता है। दोनों तरफ से एक गाड़ी का 650 रुपये टोल लगता है। लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं हैं। अगर क्रेन की जरूरत पड़ गई तो मिलना मुश्किल है। गाड़ी खराब हो गई तो मैकेनिक नहीं मिलेगा। दावा तो किया जाता है कि हर टोल पर एंबुलेंस के साथ मेडिकल स्टाफ रहता है लेकिन हकीकत में कहीं कुछ नहीं है। टोल कर्मी भी एक्सप्रेसवे की सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं देते हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे की सुरक्षा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। मथुरा जिले में एक्सप्रेसवे पर मांट, सुरीर, नौहझील, बलदेव, राया, जमुुनापार और महावन थाने पड़ते हैं। कायदे में हर थाने को अपने-अपने क्षेत्र में पुलिस की ड्यूटी लगानी चाहिए। लेकिन इन थानों ने खुद ही ड्यूटी शिफ्ट का चार्ट बना डाला है। सप्ताह में एक दिन एक थाने की ड्यूटी रहती है।
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ड्यूटी में भी केवल एक दरोगा और तीन सिपाही लगाए जा रहे हैं। जबकि बीस से भी ज्यादा प्वाइंट संवेदनशील हैं। अब टप्पल बार्डर से आगरा बॉर्डर तक एक दरोगा, तीन सिपाही भला क्या गश्त करते होंगे। अफसरों का कहना है कि यूपी 100 की भी दो गाड़ियां रहती हैं। लेकिन इनके प्वाइंट फिक्स नहीं होते हैं।
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कुल मिलाकर रफ्तार के इस बड़े प्रोजेक्ट की सुरक्षा बहुत कम है। सर्विस रोड पर तो कहीं पुलिस नजर आती ही नहीं है। जबकि एक्सप्रेसवे के बगल से निकलने वाली सर्विस रोड पर ही बदमाश वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। लूटपाट करने के बाद बदमाश आसानी के साथ फरार हो जाते हैं और पुलिस को कानोंकान खबर तक नहीं होती।
मोटा टोल और सुविधाएं गोल
यमुना एक्सप्रेसवे पर खंदौली, मांट और जेवर पर टोल वसूला जाता है। दोनों तरफ से एक गाड़ी का 650 रुपये टोल लगता है। लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं हैं। अगर क्रेन की जरूरत पड़ गई तो मिलना मुश्किल है। गाड़ी खराब हो गई तो मैकेनिक नहीं मिलेगा। दावा तो किया जाता है कि हर टोल पर एंबुलेंस के साथ मेडिकल स्टाफ रहता है लेकिन हकीकत में कहीं कुछ नहीं है। टोल कर्मी भी एक्सप्रेसवे की सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं देते हैं।