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48 घंटे बाद टूंडला में मिले देशवानी
ब्यूरो, अमर उजाल मथुरा
Updated Fri, 05 Dec 2014 01:01 AM IST
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गोवर्धन चौराहे से मंगलवार को अगवा कारोबारी संजय देशवानी गुरुवार की रात टुंडला में मिले हैं। उनको अपहरणकर्ता टूंडला ओवरब्रिज पर छोड़कर फरार हो गए। अपहरणकर्ताओं ने छोड़ने से पहले 300 रुपये भी दिए है। ओवरब्रिज से उतरकर वह एक दुकान पर पहुंचे, जहां से उन्होंने परिवारीजनों को अपने रिहा होने की जानकारी दी।
संजय देशवानी ने रिहा होने के बाद पुलिस को बताया कि मंगलवार की रात 8:30 बजे उनका उस समय अपहरण कर लिया गया था, जब वह आटो से अपने घर जा रहे थे। उनको कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया गया था, होश होने पर उन्होंने अपने आपको खेतों के बीच बने एक कमरे में पाया। अपहरणकर्ता उन्हें खाना देते थे लेकिन खाना खाते ही कुछ सुंघाकर बेहोश कर देते। बीच बीच में उनके साथ मारपीट भी की जाती थी।
संजय देशवानी का कहना है कि जिस कमरे में उन्हें रखा गया, उसी कमरे में एक 20-25 साल का एक युवक भी बंधक था और उसके हाथ पैर बांधकर अपहरणकर्ता रखते थे। गुरुवार को अपहरणकर्ताओं ने रिहा करने से पहले 10 से अधिक स्टांप पेपरों पर हस्ताक्षर कराए और अंगूठे की छाप भी लगवाई। रिहा होने के बाद संजय ओवरब्रिज से उतर ओरियंटल बैंक आफ कामर्स के पास स्थित एक दुकान पर पहुंचे, जहां से एसओ टूंडला प्रवीण मान उन्हें थाने ले गए। एसओ टूंडला ने बताया कि संजय देशवानी मानसिक व शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हैं।देर रात मथुरा टूंडला से लेकर उन्हें मथुरा लेकर आई। समाचार लिखे जाने तक एसएसपी मंजिल सैनी ने उनसे पूछताछ कर रही थी।
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बता दें, संजय देशवानी के बेटे केशव देशवानी ने कोतवाली में मथुरा के जयंती प्रसाद अग्रवाल, हेमंत अग्रवाल, होडल के नवीन कात्याल, सतपाल नागपाल, विकेश गोयल, विजय गोयल पर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई हुई है। दो दिन की पूछताछ व कॉल डिटेल आदि को लेकर पुलिस मामले को संदिग्ध मान रही थी। केशव देशवानी ने इस मामले में सभी नामजदों पर लेनदेन के विवाद में अपहरण करने का आरोप लगाया। वहीं जयंती प्रसाद अग्रवाल इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे और पूरे मामले को झूठा बताते रहे।
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संजय देशवानी ने रिहा होने के बाद पुलिस को बताया कि मंगलवार की रात 8:30 बजे उनका उस समय अपहरण कर लिया गया था, जब वह आटो से अपने घर जा रहे थे। उनको कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया गया था, होश होने पर उन्होंने अपने आपको खेतों के बीच बने एक कमरे में पाया। अपहरणकर्ता उन्हें खाना देते थे लेकिन खाना खाते ही कुछ सुंघाकर बेहोश कर देते। बीच बीच में उनके साथ मारपीट भी की जाती थी।
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संजय देशवानी का कहना है कि जिस कमरे में उन्हें रखा गया, उसी कमरे में एक 20-25 साल का एक युवक भी बंधक था और उसके हाथ पैर बांधकर अपहरणकर्ता रखते थे। गुरुवार को अपहरणकर्ताओं ने रिहा करने से पहले 10 से अधिक स्टांप पेपरों पर हस्ताक्षर कराए और अंगूठे की छाप भी लगवाई। रिहा होने के बाद संजय ओवरब्रिज से उतर ओरियंटल बैंक आफ कामर्स के पास स्थित एक दुकान पर पहुंचे, जहां से एसओ टूंडला प्रवीण मान उन्हें थाने ले गए। एसओ टूंडला ने बताया कि संजय देशवानी मानसिक व शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हैं।देर रात मथुरा टूंडला से लेकर उन्हें मथुरा लेकर आई। समाचार लिखे जाने तक एसएसपी मंजिल सैनी ने उनसे पूछताछ कर रही थी।
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बता दें, संजय देशवानी के बेटे केशव देशवानी ने कोतवाली में मथुरा के जयंती प्रसाद अग्रवाल, हेमंत अग्रवाल, होडल के नवीन कात्याल, सतपाल नागपाल, विकेश गोयल, विजय गोयल पर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई हुई है। दो दिन की पूछताछ व कॉल डिटेल आदि को लेकर पुलिस मामले को संदिग्ध मान रही थी। केशव देशवानी ने इस मामले में सभी नामजदों पर लेनदेन के विवाद में अपहरण करने का आरोप लगाया। वहीं जयंती प्रसाद अग्रवाल इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे और पूरे मामले को झूठा बताते रहे।