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अतिक्रमण हटवाए तो किया पथराव
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:53 PM IST
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वन विभाग के आन्यौर ब्लाक से हटाए गए अतिक्रमण
ग्रामीणों ने किया तो पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया
आन्यौर मे वन विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचे पुलिस और राजस्व विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने लाठियां फटकार कर लोगों को खदेड़ दिया। जेसीबी से कब्जे हटवाए गए।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद पुलिस प्रशासन वन विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटवा रहा है। शुक्रवार की दोपहर डीएफओ भरत लाल, एसडीएम एमपी सिंह और सीओ अजय कुमार ने पुलिस और पीएसी के साथ गांव आन्यौर में गिरिराज पर्वत के निकट से अतिक्रमण हटवाए। कार्रवाई के दौरान लोगों ने टीम पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। विरोध करते हुए अपनी भूसे की बुर्जियों में आग लगा दी। गिरिराज पर्वत किनारे एकत्रित लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिसके बाद पुलिस और पीएसी ने मौके पर एकत्रित भीड़ को खदेड़ दिया। इस दौरान किसी के चोट नहीं लगी। एसडीएम एमपी सिंह ने अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
कार्रवाई के दौरान आन्यौर के गोविंद कुंड के निकट कंटीली झाड़ियों में बने बुर्जी-बिटौरे, परिक्रमा मार्ग में जतीपुरा तक रास्ते के किनारे वन भूमि से अतिक्रमण हटवाए गए। ग्रामीणों का कहना था कि वो कई दशक से यहां कब्जा धारक हैं। कार्रवाई की जद में आ रहे तीर्थ विकास ट्रस्ट की ओर से निर्मित प्याऊ और विश्राम स्थल को यथावत छोड़ते हुए उन्हें वन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया। एसडीएम एमपी सिंह ने बताया कि एनजीटी के छह अक्तूबर के आदेश के क्रम में वन विभाग की भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जा रही है।
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वन विभाग के अधीन आई 38 हेक्टेयर भूमि
गिरिराज तलहटी की 38 हेक्टेयर भूमि को गिरिराज पर्वत व परिक्रमा मार्ग के नाम दाखिल खारिज किया गया है। 18 वर्ष से ये भूमि लापरवाही के चलते लावारिस चल रही थी। एसडीएम एमपी सिंह ने बताया कि गांव आन्यौर, जतीपुरा, गोवर्धन व सकीतरा में तलहटी की ये भूमि वन अधिकार में तो थी, पर उनके नाम नहीं थी। वर्ष 1998 में गिरिराज पर्वत व परिक्त्रस्मा मार्ग को वन विभाग के अधीन करने के बाद भी उक्त भूमि उनके नाम नहीं थी।
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ग्रामीणों ने किया तो पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया
आन्यौर मे वन विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचे पुलिस और राजस्व विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने लाठियां फटकार कर लोगों को खदेड़ दिया। जेसीबी से कब्जे हटवाए गए।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद पुलिस प्रशासन वन विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटवा रहा है। शुक्रवार की दोपहर डीएफओ भरत लाल, एसडीएम एमपी सिंह और सीओ अजय कुमार ने पुलिस और पीएसी के साथ गांव आन्यौर में गिरिराज पर्वत के निकट से अतिक्रमण हटवाए। कार्रवाई के दौरान लोगों ने टीम पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। विरोध करते हुए अपनी भूसे की बुर्जियों में आग लगा दी। गिरिराज पर्वत किनारे एकत्रित लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिसके बाद पुलिस और पीएसी ने मौके पर एकत्रित भीड़ को खदेड़ दिया। इस दौरान किसी के चोट नहीं लगी। एसडीएम एमपी सिंह ने अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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कार्रवाई के दौरान आन्यौर के गोविंद कुंड के निकट कंटीली झाड़ियों में बने बुर्जी-बिटौरे, परिक्रमा मार्ग में जतीपुरा तक रास्ते के किनारे वन भूमि से अतिक्रमण हटवाए गए। ग्रामीणों का कहना था कि वो कई दशक से यहां कब्जा धारक हैं। कार्रवाई की जद में आ रहे तीर्थ विकास ट्रस्ट की ओर से निर्मित प्याऊ और विश्राम स्थल को यथावत छोड़ते हुए उन्हें वन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया। एसडीएम एमपी सिंह ने बताया कि एनजीटी के छह अक्तूबर के आदेश के क्रम में वन विभाग की भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जा रही है।
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वन विभाग के अधीन आई 38 हेक्टेयर भूमि
गिरिराज तलहटी की 38 हेक्टेयर भूमि को गिरिराज पर्वत व परिक्रमा मार्ग के नाम दाखिल खारिज किया गया है। 18 वर्ष से ये भूमि लापरवाही के चलते लावारिस चल रही थी। एसडीएम एमपी सिंह ने बताया कि गांव आन्यौर, जतीपुरा, गोवर्धन व सकीतरा में तलहटी की ये भूमि वन अधिकार में तो थी, पर उनके नाम नहीं थी। वर्ष 1998 में गिरिराज पर्वत व परिक्त्रस्मा मार्ग को वन विभाग के अधीन करने के बाद भी उक्त भूमि उनके नाम नहीं थी।