{"_id":"5f18881a8ebc3e63c87bd008","slug":"court-mathura-news-agr4515561148","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक गोली ने सीना छुआ तो एक ने कान....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक गोली ने सीना छुआ तो एक ने कान....
विज्ञापन
मथुरा। चश्मदीद विजय सिंह सिरोही।
- फोटो : MATHURA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। एक गोली ने सीना छुआ था, एक गोली मेरे कान के पास से गुजरी और मेरे कान ने सुनना बंद कर दिया। सामने राजस्थान पुलिस की बंदूकें तनी थीं तो मेरी बगल में राजा मानसिंह का रक्त रंजित शव पड़ा हुआ था। उस पल को याद करता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सात दिन तक मुझे कान से कुछ भी सुनाई नहीं दिया था। यह कहना है राजा मानसिंह के दामाद विजय सिंह सिरोही का।
उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह उस समय राजा मानसिंह के साथ जोंगा (वाहन) में आगे ही बैठे थे। जोंगा में आगे सिर्फ चार ही लोग थे, जिनमें से एक राजा मानसिंह, दो उनके साथी हरी सिंह और सुम्मेर सिंह और एक मैं था। हम लोग गिरफ्तारी के लिए डीग थाने जा ही रहे थे कि थाने से कुछ पहले ही पुलिस ने जोंगा के सामने अपनी जीप लगा दी और हमें रोक दिया। हम सोच रहे थे कि पुलिस राजा मान सिंह को गिरफ्तार करेगी परंतु ऐसा नहीं हुआ।
पुलिस ने राजा मानसिंह पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। केवल उनको ही नहीं बल्कि पुलिस ने आगे बैठे और दो लोगों को भी निशाना बनाया। पता नहीं कैसे एक गोली मेरे सीने को तथा एक गोली कान को छूती हुई निकल गई और मैं बच गया परंतु राजा मान सिंह हरी सिंह और सुम्मेर सिंह की वहीं मौत हो गई थी। उस दिन को याद करके मैं सिहर जाता हूं। मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उस दिन मुझे नया जीवन मिला था। राजा मान सिंह के दामाद आगे बताते हैं कि राजस्थान पुलिस ने उन्हें तथा जोंगा में मौजूद अन्य तीन लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया था । हमें बाद में अगले दिन छोड़ा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह उस समय राजा मानसिंह के साथ जोंगा (वाहन) में आगे ही बैठे थे। जोंगा में आगे सिर्फ चार ही लोग थे, जिनमें से एक राजा मानसिंह, दो उनके साथी हरी सिंह और सुम्मेर सिंह और एक मैं था। हम लोग गिरफ्तारी के लिए डीग थाने जा ही रहे थे कि थाने से कुछ पहले ही पुलिस ने जोंगा के सामने अपनी जीप लगा दी और हमें रोक दिया। हम सोच रहे थे कि पुलिस राजा मान सिंह को गिरफ्तार करेगी परंतु ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन
पुलिस ने राजा मानसिंह पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। केवल उनको ही नहीं बल्कि पुलिस ने आगे बैठे और दो लोगों को भी निशाना बनाया। पता नहीं कैसे एक गोली मेरे सीने को तथा एक गोली कान को छूती हुई निकल गई और मैं बच गया परंतु राजा मान सिंह हरी सिंह और सुम्मेर सिंह की वहीं मौत हो गई थी। उस दिन को याद करके मैं सिहर जाता हूं। मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उस दिन मुझे नया जीवन मिला था। राजा मान सिंह के दामाद आगे बताते हैं कि राजस्थान पुलिस ने उन्हें तथा जोंगा में मौजूद अन्य तीन लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया था । हमें बाद में अगले दिन छोड़ा गया।
विज्ञापन