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आज राजा साहब की सुनवाई है, कोई काम नहीं होगा...
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कलक्ट्रेट के सामने लगे बैरियर पर चेकिंग करती पुलिस।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। वर्ष 1990 के बाद से जब-जब राजा मानसिंह की हत्या के मामले की सुनवाई मथुरा की जिला न्यायालय में हुई तब-तब न्यायालय परिसर में यही संदेश गूंजा कि आज राजा साहब की सुनवाई है, कोई और काम नहीं होगा। इसलिए सुनवाई के दिन आम आदमी कम ही आते थे। बुधवार को भी कचहरी परिसर के ऐसे ही हालात थे। आम आदमी कम थे। चारों ओर पुलिसकर्मी और अधिवक्ता ही दिखाई दे रहे थे।
सन् 1985 में भरतपुर के राजा मानसिंह और उनके दो साथियों की हत्या डीग थाने के सामने हुई थी। इस मामले में राजा के दामाद विजय सिंह ने 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। 1990 में यह मामला मथुरा ट्रांसफर कर दिया गया। भरतपुर न्यायालय से सभी फाइलें मथुरा भेज दी गईं। जिस दिन मथुरा में इस मामले की सुनवाई होती थी तो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत न्यायालय परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया जाता था। इस दौरान केवल राजा मानसिंह के मामले की सुनवाई हो पाती थी, अन्य कार्य प्रभावित हो जाते थे। तमाम जांच-पड़ताल के बाद ही आम आदमी न्यायालय परिसर में प्रवेश कर पाते थे। धीरे-धीरे न्यायालय परिसर में यह चर्चा होने लगी कि जिस दिन राजा मानसिंह की हत्या के मामले की सुनवाई होगी अन्य काम नहीं होंगे। इसलिए इस दिन आम आदमी कम पहुंचने लगे।
बुधवार को राजा मानसिंह की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई। चूंकि मंगलवार को भी सुनवाई हुई थी, जिसके चलते कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। न्यायालय परिसर में जाने वालों को जांच-पड़ताल से गुजरना पड़ा इसलिए बुधवार को आम आदमी न्यायालय परिसर में कम ही पहुंचे। चारों ओर पुलिसकर्मी और अधिवक्ता ही दिखाई दिए। एडीजीसी भीष्म दत्त सिंह तोमर ने बताया कि राजा मानसिंह की हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है इसलिए इस दिन आम आदमी कम ही यहां आते हैं। एडवोकेट किशन सिंह राजपूत ने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत आम आदमी को तमाम जांच-पड़ताल से गुजरना पड़ता है इसलिए लोग इस दिन कम ही न्यायालय परिसर में आते हैं।
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सन् 1985 में भरतपुर के राजा मानसिंह और उनके दो साथियों की हत्या डीग थाने के सामने हुई थी। इस मामले में राजा के दामाद विजय सिंह ने 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। 1990 में यह मामला मथुरा ट्रांसफर कर दिया गया। भरतपुर न्यायालय से सभी फाइलें मथुरा भेज दी गईं। जिस दिन मथुरा में इस मामले की सुनवाई होती थी तो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत न्यायालय परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया जाता था। इस दौरान केवल राजा मानसिंह के मामले की सुनवाई हो पाती थी, अन्य कार्य प्रभावित हो जाते थे। तमाम जांच-पड़ताल के बाद ही आम आदमी न्यायालय परिसर में प्रवेश कर पाते थे। धीरे-धीरे न्यायालय परिसर में यह चर्चा होने लगी कि जिस दिन राजा मानसिंह की हत्या के मामले की सुनवाई होगी अन्य काम नहीं होंगे। इसलिए इस दिन आम आदमी कम पहुंचने लगे।
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बुधवार को राजा मानसिंह की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई। चूंकि मंगलवार को भी सुनवाई हुई थी, जिसके चलते कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। न्यायालय परिसर में जाने वालों को जांच-पड़ताल से गुजरना पड़ा इसलिए बुधवार को आम आदमी न्यायालय परिसर में कम ही पहुंचे। चारों ओर पुलिसकर्मी और अधिवक्ता ही दिखाई दिए। एडीजीसी भीष्म दत्त सिंह तोमर ने बताया कि राजा मानसिंह की हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है इसलिए इस दिन आम आदमी कम ही यहां आते हैं। एडवोकेट किशन सिंह राजपूत ने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत आम आदमी को तमाम जांच-पड़ताल से गुजरना पड़ता है इसलिए लोग इस दिन कम ही न्यायालय परिसर में आते हैं।
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