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Mathura News: आ जाइयो हुरंगा में, तोय होरी कौ मजा चखाय दूंगी
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श्रीदाऊजी मंदिर में समाज गायन करते हुए सेवायत
राजेश पाठक
बलदेव। श्रीदाऊजी महाराज मंदिर में हुरंगा देखने के लिए 15 मार्च को जनसैलाब उमड़ेगा। प्रांगण मंदिर में खेलें बलराम कुमार होली की गूंज से गूंजेगा। हुरंगा देखने के लिए देवता भी तरसते हैं। या होरी कूं देखवे कूं ब्रह्मा-विष्णु भी ललचायें।
जब गोप स्वरूपों के कपड़े फाड़ कर गोपिका स्वरूप महिलायें प्रेम से भीगों कर नंगे बदन पर कपड़ों के कोड़े बनाकर बरसाती हैं तो माहौल आनंदित करने वाला होता है। ऐसी होली पूरे ब्रज में देखने को नहीं मिलती है। ऐसौ बिरज आनंद भयौ, जो कहौ न जायै। टेसू के रंगों में मंदिर केसरिया सागर बन जाता है। आकाश में सतरंगी छटा बिखेरते टनों गुलाल व फूलों की वर्षा इन्द्रधनुषी वातावरण बना देती है। रसिया व होली के पदों का उच्च स्वर में गुंजायमान होता है।
हुरियारे रोजाना समाज गायन में उच्च स्वर में होली के पदों को गा व नाच कर हुरंगा की तैयारी कर रहे हैं। इसमें सुबह-शाम सैकड़ों सेवायत शामिल हो रहे हैं। हुरियारिनें भी रोजाना सुबह बैंड-बाजे की धुन पर पूर्वाभ्यास कर हुरंगा का ऐलान कर रही हैं। आ जाइयो हुरंगा में, तोय होरी कौ मजा चखाय दूंगी। पूर्वाभ्यास परंपरागत लहंगा फरिया में जारी है। संवाद
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जि दाऊजी कौ हुरंगा है, जाकूं देखवे कूं देवता आवैं। हुरियारे हुरंगा की तैयारी जोर-शोर से कर रहे हैं। कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। - सेवायत भगवत पांडेय, चकाचक पांडेय
जि होरी कौ खसम हुरंगा है, जाकी तैयारी बड़े स्तर पर हुरियारे कर रहे हैं, हुरियारों के नंगे बदन पर तड़ातड़ कोड़े पड़ते देखवे वारे आनंदित है जावैं। सेवायत बलदेव पांडेय
जि होरी नायै दाऊजी को हुरंगा हैं, ऐसी होरी पूरे ब्रज में देखवे कूं नहीं मिलेगी। हुरियारे तैयारी कर रहे हैं। नित नित नाच गाने का अभ्यास कर रहे हैं।- सेवायत अरुण पांडेय
जि होरी तौ ऐसी है जौ मुख से कहीं ना जा सके, जाकौ आनंद तो देखवे पर मिलैगौ। हुरियारे अपने सखाओं के संग हुरंगा की तैयारी कर रहे हैं। सेवायत लड्डू गोपाल पांडेय
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बलदेव। श्रीदाऊजी महाराज मंदिर में हुरंगा देखने के लिए 15 मार्च को जनसैलाब उमड़ेगा। प्रांगण मंदिर में खेलें बलराम कुमार होली की गूंज से गूंजेगा। हुरंगा देखने के लिए देवता भी तरसते हैं। या होरी कूं देखवे कूं ब्रह्मा-विष्णु भी ललचायें।
जब गोप स्वरूपों के कपड़े फाड़ कर गोपिका स्वरूप महिलायें प्रेम से भीगों कर नंगे बदन पर कपड़ों के कोड़े बनाकर बरसाती हैं तो माहौल आनंदित करने वाला होता है। ऐसी होली पूरे ब्रज में देखने को नहीं मिलती है। ऐसौ बिरज आनंद भयौ, जो कहौ न जायै। टेसू के रंगों में मंदिर केसरिया सागर बन जाता है। आकाश में सतरंगी छटा बिखेरते टनों गुलाल व फूलों की वर्षा इन्द्रधनुषी वातावरण बना देती है। रसिया व होली के पदों का उच्च स्वर में गुंजायमान होता है।
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हुरियारे रोजाना समाज गायन में उच्च स्वर में होली के पदों को गा व नाच कर हुरंगा की तैयारी कर रहे हैं। इसमें सुबह-शाम सैकड़ों सेवायत शामिल हो रहे हैं। हुरियारिनें भी रोजाना सुबह बैंड-बाजे की धुन पर पूर्वाभ्यास कर हुरंगा का ऐलान कर रही हैं। आ जाइयो हुरंगा में, तोय होरी कौ मजा चखाय दूंगी। पूर्वाभ्यास परंपरागत लहंगा फरिया में जारी है। संवाद
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जि दाऊजी कौ हुरंगा है, जाकूं देखवे कूं देवता आवैं। हुरियारे हुरंगा की तैयारी जोर-शोर से कर रहे हैं। कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। - सेवायत भगवत पांडेय, चकाचक पांडेय
जि होरी कौ खसम हुरंगा है, जाकी तैयारी बड़े स्तर पर हुरियारे कर रहे हैं, हुरियारों के नंगे बदन पर तड़ातड़ कोड़े पड़ते देखवे वारे आनंदित है जावैं। सेवायत बलदेव पांडेय
जि होरी नायै दाऊजी को हुरंगा हैं, ऐसी होरी पूरे ब्रज में देखवे कूं नहीं मिलेगी। हुरियारे तैयारी कर रहे हैं। नित नित नाच गाने का अभ्यास कर रहे हैं।- सेवायत अरुण पांडेय
जि होरी तौ ऐसी है जौ मुख से कहीं ना जा सके, जाकौ आनंद तो देखवे पर मिलैगौ। हुरियारे अपने सखाओं के संग हुरंगा की तैयारी कर रहे हैं। सेवायत लड्डू गोपाल पांडेय