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दिल्ली के बाद भी ब्रज में यमुना शुद्धीकरण दूर की कौड़ी
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 12 May 2016 11:17 PM IST
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वृंदावन में यमुना की स्थिति
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के अनुसार एक साल बाद ब्रज में यमुना दिल्ली की गंदगी लेकर नहीं आएगी। दिल्ली सरकार के सहयोग से दिल्ली में यमुना को साफ करने की मुहिम शुरू हो गई है। अब सोचना ब्रजवासियों को है कि स्थानीय स्तर पर इस चुनौती से कैसे निपटा जाए क्योंकि इस पवित्र भूमि में ही 40 से ज्यादा गंदे नाले सीधे यमुना में समा रहे हैं। इसे देखकर लगता है कि यमुना को प्रदूषित करने में भागीदार हम अर्थात ब्रज के लोग भी हैं।
धार्मिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीलास्थली से जुड़ी यमुना का जल अब आचमन योग्य भी नहीं है। अब तक सवाल खडे़ किए जा रहे थे कि यमुना को प्रदूषित करने का काम दिल्ली और हरियाणा के स्तर से किया जा रहा है, मथुरा को तो यमुना का जल मिलता ही नहीं। यह बात सच है, लेकिन पड़ताल करने पर पता चलता है कि जिले की सीमा में यमुना के प्रवेश करते ही कोसी-छाता औद्योगिक क्षेत्र का पानी सीधे यमुना में जाता हुआ मिल जाएगा। शाहपुर ड्रेन, कूची ड्रेन जिले में यमुना को प्रवेश करते ही मैला कर देती हैं।
इसके बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वृंदावन में करीब 18 नाले भी यही काम कर रहे हैं। बाकी कसर मथुरा क्षेत्र पूरी कर देता है। यहां करीब 24 छोटे और बड़े नाले सीधे यमुना में समाहित हो रहे हैं। इसका आकलन यूं हो सकता है कि ओखला बैराज से मथुरा के लिए यमुना में सिर्फ 100 क्यूसेक जल छोड़ा जाता है, जबकि गोकुल बैराज से आगरा के लिए यह मात्रा 500 से 700 क्यूसेक तक पहुंच रही है। इसमें मथुरा के नालों के पानी की मात्रा ही 300 से 400 क्यूसेक तक बताई जा रही है। मथुरा में मसानी नाला, अंबाखार, सरस्वती कुंड नाला, गऊघाट सहित करीब 22 नाले सीधे यमुना में समा रहे है।
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यमुना कार्य योजना भी छलावा
हाईकोर्ट के निर्देश पर यमुना शुद्धीकरण के लिए गठित यमुना कार्य योजना समिति कागजी साबित हो रही है। यमुना की वर्तमान हालत देखकर तो लगता है कि नियमित अवधि में हो रही यमुना कार्य योजना की बैठक और इसमें पास प्रस्ताव भी छलावा हैं। हकीकत यह है कि यमुना में करीब 300 क्यूसेक पानी जिले के गंदे नाले उड़ेल रहे हैं।
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धार्मिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीलास्थली से जुड़ी यमुना का जल अब आचमन योग्य भी नहीं है। अब तक सवाल खडे़ किए जा रहे थे कि यमुना को प्रदूषित करने का काम दिल्ली और हरियाणा के स्तर से किया जा रहा है, मथुरा को तो यमुना का जल मिलता ही नहीं। यह बात सच है, लेकिन पड़ताल करने पर पता चलता है कि जिले की सीमा में यमुना के प्रवेश करते ही कोसी-छाता औद्योगिक क्षेत्र का पानी सीधे यमुना में जाता हुआ मिल जाएगा। शाहपुर ड्रेन, कूची ड्रेन जिले में यमुना को प्रवेश करते ही मैला कर देती हैं।
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इसके बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वृंदावन में करीब 18 नाले भी यही काम कर रहे हैं। बाकी कसर मथुरा क्षेत्र पूरी कर देता है। यहां करीब 24 छोटे और बड़े नाले सीधे यमुना में समाहित हो रहे हैं। इसका आकलन यूं हो सकता है कि ओखला बैराज से मथुरा के लिए यमुना में सिर्फ 100 क्यूसेक जल छोड़ा जाता है, जबकि गोकुल बैराज से आगरा के लिए यह मात्रा 500 से 700 क्यूसेक तक पहुंच रही है। इसमें मथुरा के नालों के पानी की मात्रा ही 300 से 400 क्यूसेक तक बताई जा रही है। मथुरा में मसानी नाला, अंबाखार, सरस्वती कुंड नाला, गऊघाट सहित करीब 22 नाले सीधे यमुना में समा रहे है।
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यमुना कार्य योजना भी छलावा
हाईकोर्ट के निर्देश पर यमुना शुद्धीकरण के लिए गठित यमुना कार्य योजना समिति कागजी साबित हो रही है। यमुना की वर्तमान हालत देखकर तो लगता है कि नियमित अवधि में हो रही यमुना कार्य योजना की बैठक और इसमें पास प्रस्ताव भी छलावा हैं। हकीकत यह है कि यमुना में करीब 300 क्यूसेक पानी जिले के गंदे नाले उड़ेल रहे हैं।