{"_id":"68b9e774deaf130bdc0de9d4","slug":"chir-ghat-will-be-improved-forests-that-have-lost-their-identity-will-become-green-mathura-news-c-369-1-mt11009-135400-2025-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: चीर घाट संवरेगा, पहचान खो चुके वन होंगे हरे-भरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: चीर घाट संवरेगा, पहचान खो चुके वन होंगे हरे-भरे
विज्ञापन
मथुरा। वृंदावन में चीर घाट पड़ाव स्थल का विस्तार और सौंदर्यीकरण होगा। साथ ही परिस्थितियों के दांव-पेंच में क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके प्रचीन 36 वनों को इको रेस्टोरेशन के तहत हरा-भरा किया जाएगा। ताकि पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र बन सकें। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने इसकी योजना बनाई है। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है।
अधिकारियों के मुताबिक, मथुरा-वृंदावन में अपनी पहचान खो चुके पौराणिक स्थलों को संवारने की तैयारी की जा रही है। किसी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है तो किसी की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सरकार की मंशानुरूप ही इनका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की चीर घाट पड़ाव स्थल का विस्तार और सौंदर्यीकरण कराने की योजना है। करीब सात करोड़ रुपये की लागत से यह कार्य होगा। इसके साथ ही मथुरा-वृंदावन में विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पौराणिक 36 वनों को संवारने की भी तैयारी है। इन वनों का इको रेस्टोरेशन के तहत कार्य किया जाएगा। इसमें सक्रिय रूप से पौधे लगाना या हानिकारक दबावों को हटाना शामिल है। ताकि प्रकृति स्वयं ही पुनर्जीवित हो सके और बेहतर जैव विविधता, मिट्टी और अन्य लाभों से वनों के पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे हो सकें। सीईओ एसबी सिंह ने बताया है कि दोनों कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई है। फिलहाल प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। मंजूरी के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा।
--
-जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
एसबी सिंह ने बताया है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इको रेस्टोरेशन के तहत प्राचीन वनों को पुनर्जीवित करने से न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन भी संतुलित होगा। इस योजना में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि पारिस्थितिकी तंत्र अपनी मौलिक अवस्था में लौट सके। पुनरुद्धार से मिट्टी की उर्वरता, भू-जल स्तर और जैव विविधता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही वनों के सौंदर्यीकरण से पर्यटक भी आकर्षित होंगे। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के द्वार भी खुल सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अधिकारियों के मुताबिक, मथुरा-वृंदावन में अपनी पहचान खो चुके पौराणिक स्थलों को संवारने की तैयारी की जा रही है। किसी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है तो किसी की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सरकार की मंशानुरूप ही इनका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की चीर घाट पड़ाव स्थल का विस्तार और सौंदर्यीकरण कराने की योजना है। करीब सात करोड़ रुपये की लागत से यह कार्य होगा। इसके साथ ही मथुरा-वृंदावन में विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पौराणिक 36 वनों को संवारने की भी तैयारी है। इन वनों का इको रेस्टोरेशन के तहत कार्य किया जाएगा। इसमें सक्रिय रूप से पौधे लगाना या हानिकारक दबावों को हटाना शामिल है। ताकि प्रकृति स्वयं ही पुनर्जीवित हो सके और बेहतर जैव विविधता, मिट्टी और अन्य लाभों से वनों के पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे हो सकें। सीईओ एसबी सिंह ने बताया है कि दोनों कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई है। फिलहाल प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। मंजूरी के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा।
विज्ञापन
-जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
एसबी सिंह ने बताया है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इको रेस्टोरेशन के तहत प्राचीन वनों को पुनर्जीवित करने से न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन भी संतुलित होगा। इस योजना में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि पारिस्थितिकी तंत्र अपनी मौलिक अवस्था में लौट सके। पुनरुद्धार से मिट्टी की उर्वरता, भू-जल स्तर और जैव विविधता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही वनों के सौंदर्यीकरण से पर्यटक भी आकर्षित होंगे। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के द्वार भी खुल सकेंगे।
विज्ञापन