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Mathura News: रक्षा सूत्र बांध भाइयों से लिया अपराध से दूर रहने का वचन
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मथुरा। भाइयों से मिलने के लिए जेल के बाहर लगी बहनों की लंबी कतार।
- फोटो : mathura
मथुरा। रक्षाबंधन पर जेल में बंद अपने भाई की झलक पाते ही बहनों की आंख से आंसू निकल आए। भाइयों ने बहनों को अपराध से दूर रहने का वचन दिया। साथ ही जेल से बाहर निकलने के बाद ईमानदारी से जीवन व्यतीत करने का आश्वासन देकर रक्षा सूत्र बंधवाया। जेल प्रशासन के अनुसार रक्षाबंधन पर 1549 बहनों ने जेल में बंद 898 बंदियों के राखी बांधी। सुबह 8.30 से शाम 4.30 बजे तक 767 बच्चों समेत 2316 महिला-पुरुषों ने जेल में बंद अपने परिजन से मुलाकात की।
जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि रक्षाबंधन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दूर दराज से आने वाली बहनों के ठहरने के लिए जेल प्रशासन ने टेंट और उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति ने पेयजल, बिस्कुट तथा बच्चों के लिए चॉकलेट की व्यवस्था की। वहीं जो महिला अपने साथ राखी नहीं लाईं थीं, जेल प्रशासन ने उनके लिए राखी, रोली व चावल और मिठाई की व्यवस्था की।
जेल में बंद बहनों से राखी बंधवाने आए 10 भाई
- भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनें ही जेल में नहीं पहुंची, बल्कि 10 भाई भी जेल में बंद बहनों से राखी बंधवाने को जिला कारागार पहुंचे। जेल प्रशासन ने महिला बंदियों के लिए राखी और मिठाई की व्यवस्था की। राखी बंधवाने के बाद भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार दिए।
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कुछ दिव्यांग महिलाओं को नहीं मिली व्हीलचेयर, घिसटती हुई पहुंची जेल
दिव्यांग बहनों को चेकिंग के बाद लाइन में नहीं लगने दिया गया। उन्हें व्हीलचेयर पर बिठाकर जेल के अंदर प्रवेश कराया गया। बावजूद इसके कई बहनें ऐसी रहीं, जिनको व्हील चेयर की सुविधा नहीं मिल पाई। शहर के गोपाल नगर क्षेत्र की रहने वाली दिव्यांग मंजू जमीन पर घिसटती हुई अपने भाई को राखी बांधने जेल पहुंची।
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जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि रक्षाबंधन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दूर दराज से आने वाली बहनों के ठहरने के लिए जेल प्रशासन ने टेंट और उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति ने पेयजल, बिस्कुट तथा बच्चों के लिए चॉकलेट की व्यवस्था की। वहीं जो महिला अपने साथ राखी नहीं लाईं थीं, जेल प्रशासन ने उनके लिए राखी, रोली व चावल और मिठाई की व्यवस्था की।
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जेल में बंद बहनों से राखी बंधवाने आए 10 भाई
- भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनें ही जेल में नहीं पहुंची, बल्कि 10 भाई भी जेल में बंद बहनों से राखी बंधवाने को जिला कारागार पहुंचे। जेल प्रशासन ने महिला बंदियों के लिए राखी और मिठाई की व्यवस्था की। राखी बंधवाने के बाद भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार दिए।
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कुछ दिव्यांग महिलाओं को नहीं मिली व्हीलचेयर, घिसटती हुई पहुंची जेल
दिव्यांग बहनों को चेकिंग के बाद लाइन में नहीं लगने दिया गया। उन्हें व्हीलचेयर पर बिठाकर जेल के अंदर प्रवेश कराया गया। बावजूद इसके कई बहनें ऐसी रहीं, जिनको व्हील चेयर की सुविधा नहीं मिल पाई। शहर के गोपाल नगर क्षेत्र की रहने वाली दिव्यांग मंजू जमीन पर घिसटती हुई अपने भाई को राखी बांधने जेल पहुंची।