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महारास लीला के साथ बूढ़ी लीला का समापन

Sat, 14 Sep 2019 12:00 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 12:00 AM IST
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boodhee leela mahotsav
बरसाना (मथुरा)। तीर्थ नगरी बरसाना में राधाष्टमी से शुरू हुई बूढ़ी लीला महोत्सव का शुक्रवार को करहला के महारास के साथ समापन हो गया। करहला व राधा बाग स्थित प्राचीन रास चबूतरे पर राधा-कृष्ण के स्वरूपों द्वारा महारास का मंचन किया गया।
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शुक्रवार को बरसाना के समीपवर्ती गांव करहला में महारास का मंचन किया गया। करहला हमेशा रासचार्यों की जन्मस्थली रही है। संत घमंडदेवचार्य महाराज ने करहला में तप किया था। आज भी बूढ़ी लीला महोत्सव के चलते प्राचीन रास चबूतरे पर महारास का मंचन किया जाता है।
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महारास में राधा-कृष्ण के स्वरूप सफेद परिधान में महारास का मंचन कर रहे थे। मान्यता है कि पूर्णिमा की चांदनी में भगवान श्रीकृष्ण ने राधा सहित अन्य सखियों के साथ महारास किया। महारास देखने के लिए देवताओं के साथ स्वयं शंकर भगवान भी उपस्थित हुए थे। उसी प्राचीनता के चलते अब भी बूढ़ी लीला महोत्सव के चलते महारास का आयोजन प्राचीन रास चबूतरे पर किया जाता है।
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